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Thursday, August 26, 2021

संस्कृत को जन-जन तक पहुँचाना आवश्यक

 Wednesday: 25th August 2021 at 04:48 IST                      M.T. 25th August 2021 at 10:37 PM

स्कूलों में प्रति वर्ष आयोजित होगा संस्कृत सप्ताह:मुख्यमंत्री श्री चौहान


भोपाल
: 25 अगस्त 2021: (मध्यप्रदेश स्क्रीन ब्यूरो)::

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि संस्कृत भाषा को जन-जन तक पहुँचाने के लिए राज्य सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है। जो व्यक्ति तथा संस्थाएँ संस्कृत के लिए कार्य कर रहे हैं उन्हें अब इसीलिए संरक्षण देने और उनके प्रयासों के विस्तार के लिए भी राज्य सरकार द्वारा कार्य किया जाएगा। संस्कृत के माध्यम से ही भारतीय संस्कृति के संचित ज्ञान को अगली पीढ़ी तक ले जाया जा सकता है। प्रदेश के सभी स्कूलों में प्रति वर्ष संस्कृत सप्ताह आयोजित किया जाएगा।

संस्कृत सप्ताह के अंतर्गत प्रदेश की सभी शालाओं में आयोजित हुईं गतिविधियाँ

मुख्यमंत्री श्री चौहान आज संस्कृत सप्ताह के समापन कार्यक्रम को निवास से वर्चुअली संबोधित कर रहे थे। स्कूल शिक्षा राज्य मंत्री श्री इंदर सिंह परमार वर्चुअली सम्मिलित हुए। कार्यक्रम में महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष श्री भरत बैरागी, संस्कृत भारती के क्षेत्र संगठन मंत्री श्री प्रमोद पंडित, प्रांत संगठन मंत्री श्री नीरज दीक्षित, प्रांत अध्यक्ष डॉ. अशोक भदौरिया सहित महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान के निदेशक श्री प्रभात राज तिवारी सहित संस्कृत भारती के पदाधिकारी सम्मिलित हुए। वर्चुअल कार्यक्रम से 2175 विद्यालय जुड़े।  संस्कृत सप्ताह के अंतर्गत 18 अगस्त से प्रदेश के सभी 52 जिलों में योग की गतिविधियाँ तथा संस्कृत आधारित प्रतियोगिताएँ प्रदेश की सभी शालाओं में आयोजित की जा रही हैं।

संस्कृत शिक्षण के केंद्र रहे हैं उज्जैन और ओंकारेश्वर

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि हमारा राज्य आरंभ से ही संस्कृत ज्ञान परंपरा के श्रेष्ठ अध्ययन केंद्र के रूप में प्रतिष्ठित रहा है। उज्जैन और ओंकारेश्वर संस्कृत शिक्षण के केंद्र रहे हैं। इसीलिए प्रथम जगद्गुरु श्री कृष्ण और द्वितीय जगतगुरू आदि शंकराचार्य, क्रमश: उज्जैन और ओंकारेश्वर में विद्या ग्रहण करने आए। अतः संस्कृत भाषा की शिक्षा और इसके विस्तार के लिये प्रदेश का दायित्व बढ़ जाता है। राज्य सरकार संतों और संस्कृत के लिए कार्य कर रही संस्थाओं को जोड़कर संस्कृत के विस्तार के लिए हर संभव प्रयास करेगी।

कई देशों ने कराया वेदों का वैज्ञानिक अध्ययन

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि संस्कृत प्राचीन और महान भाषा है। यह हमारी संस्कृति का आधार है, क्योंकि हमारे सभी ग्रंथ संस्कृत में ही हैं। संस्कृत सभी भाषाओं की जननी भी है। वेद केवल ज्ञान ही नहीं विज्ञान, शिल्प, कौशल, अध्यात्म का खजाना भी है, जिसे बिना संस्कृत के हम नहीं समझ सकते हैं। कई देशों ने वेदों का वैज्ञानिक अध्ययन कराया और विज्ञान के क्षेत्र में भी उपलब्धियाँ अर्जित की हैं।

आने वाली पीढ़ी को संस्कृत से जोड़ना जरूरी

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि पश्चिम के प्रभाव में हम अपनी परंपरा और संस्कृति को भूलते जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में संस्कृत सप्ताह का आयोजन संस्कृत को लोकव्यापी बनाने और अगली पीढ़ी को इससे परिचित कराने में सहायक होगा। यह हमारी ज्ञान परंपरा की निरंतरता के लिए आवश्यक है।  मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि योग से निरोग कार्यक्रम और देवारन्य योजना आगे आने वाली पीढ़ी को अपनी संस्कृति और जड़ों से जोड़ने में सहायक सिद्ध होगी।

मुख्यमंत्री निवास पर हुआ संस्कृत पर केन्द्रित कार्यक्रम

कार्यक्रम में महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष श्री भरत बैरागी ने संस्थान द्वारा संचालित गतिविधियों की जानकारी दी। संस्कृत भारती के क्षेत्र संगठन मंत्री श्री प्रमोद पंडित ने कहा कि यह पहला अवसर है जब मुख्यमंत्री निवास में संस्कृत पर केन्द्रित कार्यक्रम आयोजित हो रहा है।                                     

Thursday, April 23, 2020

लॉकडाउन में भी लाउड स्पीकर से घर-घर पहुँचा स्कूल

 22nd April 2020 at 22:37 IST
आकाशवाणी पर शुरू किये गये 'रेडियो स्कूल'' कार्यक्रम दिखाया कमाल 
भोपाल:बुधवार 22 अप्रैल 2020: (मध्यप्रदेश स्क्रीन ब्यूरो)::
कोरोना ने पूरी दुनिया में ज़िंदगी की शैली ही बदल डाली। हर क्षेत्र में पूरी तब्दीली आई। दिलचस्प बात यह भी कि इन तब्दीलियों को स्वीकार करना ही एकमात्र रास्ता था। और कोई विकल्प ही नहीं था। इन तब्दीलियों का असर शिक्षा के क्षेत्र में भी दिखा। परीक्षा के लिए तैयार बैठे बच्चों को लगने लगा कि इस बार तो सब चौपट हो गया। बच्चों की पढ़ाई और शिक्षा के इस सत्र को बचाने के लिए आकाशवाणी के स्कूल कार्यक्रम को जरिया बनाया गया। आकाशवाणी के जादू ने बच्चों पर भी असर दिखाया। शिक्षा के क्षेत्र में भी कोरोना से जंग लड़ने का यह बिलकुल ही अनूठा प्रयोग था। आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने के साथ साथ पुरानी तकनीक का भी सदुप्योग किया गया। गांव के बच्चे बच्चे तक इसका जादू पहुंचा और इसे बेहद पसंद भी किया गया। हर घर तक स्कूल खुद जा पहुंचा। सोशल डिस्टेंसिंग के नियम को बरकरार रखते हुए स्कूल ने बच्चों को पढ़ाई शुरू करवा दी। लोग खुश भी हुए और हैरान भी। जैसे ही आवाज़ गूंजती उनके चेहरों पर मुस्कराहट सी आ जाती। 
इस तरीके को लागू करने की कहानी भी बहुत दिलचस्प है। कोरोना संक्रमण में शिक्षकों एवं पालकों की बच्चों की पढ़ाई की चिंता को दूर करने के लिये सीहोर जिले में लाउड स्पीकर से  हर रोज़ पढ़ाई कराने की पहल की है। नसरूल्लागंज विकासखण्ड के शैक्षिक समन्वयक श्री संतोष धनवारे को जमुनिया बाजयाफ्त गाँव के शासकीय प्राथमिक स्कूल के बरामदे के एक कोने में रखे लाउड स्पीकर को देखकर यह आईडिया आया। उन्होंने तय किया कि लाउड स्पीकर से प्रत्येक बच्चे तक गत एक अप्रैल से आकाशवाणी पर शुरू किये गये 'रेडियो स्कूल'' कार्यक्रम को पहुँचाया जाये। उनका यह प्रयोग पूरी तरह सफल भी रहा। आज यह बेहद लोकप्रिय भी है। 
आकाशवाणी ने एक बार फिर से अपना जादू जगाया है। गाँव के बच्चों के साथ-साथ उनके घर के बड़े बुजुर्ग और अन्य सदस्य भी यह कार्यक्रम सुनते हैं। रेडियो स्कूल कार्यक्रम को इस तरह हर घर तक निर्बाध रूप से पहुँचाने पर ग्रामीणों ने श्री संतोष धनवारे के प्रयास की सराहना की है। एक बार फिर से लोग रेडियो की तरफ तेज़ी से आकर्षित हो रहे हैं। 
चकल्ली जन शिक्षा केन्द्र के गाँव जामुनिया बाजयाफ्त के इस प्रयोग को विकासखंड शैक्षिक समन्वयक संतोष धनवारे ने जन शिक्षा केन्द्र और विकासखंड के अन्य शिक्षकों से भी साझा किया है। नतीजन आज चकल्ली जन शिक्षा केन्द्र के ही ग्राम नांदियाखेड़ा डावा, आमदो, खापा और बनीगाँव सहित लगभग 20 स्कूलों में सुबह 11 बजे से 12 बजे तक शैक्षिक कार्यक्रम 'रेडियो स्कूल' का प्रसारण लाउड स्पीकर पर रोजाना गूंजता है। कहीं स्कूल के चोंगे से, तो कहीं गाँव के बीचो-बीच किसी घर की दालान में रखे साउंड-बॉक्स से बच्चे नियमित रूप से कार्यक्रम सुन रहे हैं और पढ़ रहे हैं। लॉकडाउन के नियमों का पालन करते हुए रेडियो स्कूल कार्यक्रम से अब इन गाँवों के हर घर में हर रोज लगता है स्कूल।--इनपुट:बबीता मिश्रा

Saturday, February 10, 2018

पहन लो जैकेट अगर बिजली नहीं तो क्या हुआ

MP में शिक्षकों के लिए विशेष ड्रेस कोड की जैकेट 
भोपाल: 10 फरवरी 2018: (मध्य प्रदेश स्क्रीन ब्यूरो//इंट.)::
"डिजिटल इंडिया" और "विकास" के इस युग में प्राथमिकताएं बदल रही हैं। कभी जनाब दुष्यंत कुमार साहिब ने कहा था:
भूख है तो सब्र कर रोटी नहीं तो क्या हुआ; 
आजकल दिल्ली में है ज़ेर-ए-बहस ये मुदद्आ। 
अब जबकि प्रदेश में बहुत सी बातें विकास करने वालों का ध्यान मांग रही हैं उस समय कुछ नए ऐलान सामने आ रहे हैं। 
एक ऐलान सुनने में आया है कि मध्य प्रदेश के शिक्षकों को अब नया ड्रेस कोड मिलने वाला है। शिक्षकों को "नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी"(निफ्ट) की तरफ से डिजाइन की गई जैकेट दी जाएंगी।  उनकी शख्सियत में निखार आएगा और वे सचमुच राष्ट्र निर्माता दिखने लगेंगे। आम जनता के मुद्दों से जुड़ कर काम कर रहे एक जानेमाने टीवी चैनल एनडीटीवी की खबर के मुताबिक मध्य प्रदेश के शिक्षा मंत्री विजय शाह ने कहा कि यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि शिक्षकों को महसूस हो कि वे एक महान कार्य कर रहे हैं और उनकी पहचान सरकारी शिक्षक के तौर पर हो सके। इस फैसले मुताबिक राज्य में करीब ढाई लाख सरकारी शिक्षकों को जल्द ही ये जैकेट मुहैया कराई जाएंगी। राज्य के शिक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि सभी शिक्षकों को निफ्ट की तरफ से डिजाइन की गई जैकेट पहननी होंगी, जैकेट पर राष्ट्र निर्माता नाम की नेमप्लेट भी लगी होगी। 
गौररतलब है कि यह सरकारी आदेश ऐसे समय आया है जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने पिछले वर्ष यह स्वीकार किया था कि राज्य में एक लाख से ज्यादा स्कूलों में बिजली नहीं है, 17 हजार से ज्यादा स्कूल में केवल एक-एक शिक्षक पर निर्भर हैं और करीब 50 हजार से ज्यादा शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं।
इसी बीच कांग्रेस पार्टी ने इसकी आलोचना की है और कहा है की वास्तविक मुद्दों पर दशा देने की बजाये ड्रेस कोड जैसे मुद्दे प्राथमिक बना कर एक ख़ास विचारधारा को लागू करने का छुपा एजेंडा है यह योजना। गौरतलब है कि यह प्रयास काफी देर से जारी है।  डाक बाबुओं के लिए भी विशेष ड्रेस बनाने की बात चली थी। 
अब लगे हाथ दुष्यंत कुमार साहिब की ग़ज़ल के कुछ और शेयर भी पढ़ लीजिये। 
भूख है तो सब्र कर रोटी नहीं तो क्या हुआ 
आजकल दिल्ली में है ज़ेर-ए-बहस ये मुदद्आ ।
मौत ने तो धर दबोचा एक चीते कि तरह 
ज़िंदगी ने जब छुआ तो फ़ासला रखकर छुआ । 
गिड़गिड़ाने का यहां कोई असर होता नही 
पेट भरकर गालियां दो, आह भरकर बददुआ । 
क्या वज़ह है प्यास ज्यादा तेज़ लगती है यहाँ 
लोग कहते हैं कि पहले इस जगह पर था कुँआ । 
आप दस्ताने पहनकर छू रहे हैं आग को 
आप के भी ख़ून का रंग हो गया है साँवला । 
इस अंगीठी तक गली से कुछ हवा आने तो दो 
जब तलक खिलते नहीं ये कोयले देंगे धुँआ । 
दोस्त, अपने मुल्क की किस्मत पे रंजीदा न हो 
उनके हाथों में है पिंजरा, उनके पिंजरे में सुआ । 
इस शहर मे हो कोई बारात हो या वारदात 
अब किसी भी बात पर खुलती नहीं हैं खिड़कियाँ ।