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Friday, February 6, 2026

पीएमएफएमई योजना से लिखी सफलता की कहानी

Posted Dateline Bhopal on Friday 6th February 2026 at 15:17 IST Regarding Success Story 

प्रदेश के युवा विभिन्न उद्योग स्थापित कर बना रहे हैं अपनी पहचान

सरकारी योजना, तकनीकी मार्गदर्शन एवं ईच्छाशक्ति युवाओं के सपने साकार करने में सहायक


भोपाल: शुक्रवार, 6 फरवरी 2026: (DIPR //MP info// मध्यप्रदेश स्क्रीन डेस्क)::

पीएमएफएमई योजना

केन्द्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री सूक्ष्म, खाद्य, उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) का लाभ लेकर बुरहानपुर जिले के युवा उद्यमी श्री अभिषेक जायसवाल ने उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने डिहाइड्रेट यूनिट की स्थापना की है। यह प्रदेश के युवाओं एवं किसानों को खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में स्वरोजगार से जोड़ने की एक महत्वाकांक्षी योजना है। इस योजना का उद्देश्य उद्यमिता को बढ़ावा देना और युवाओं को आर्थिक रूप से आत्म निर्भर बनाना है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में इस योजना का लाभ अधिक से अधिक युवाओं तक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। शासन द्वारा विभागीय मार्गदर्शन, तकनीकी सहायता एवं वित्तीय सहयोग के माध्यम से युवाओं को उद्यम स्थापना हेतु प्रेरित किया जा रहा है, जिससे वे स्वयं का व्यवसाय स्थापित कर रोजगार के नए अवसर सृजित कर सकें।

यूनिट स्थापना से मिली नई पहचान

बुरहानपुर जिले के युवा उद्यमी अभिषेक जायसवाल एक शिक्षित युवा हैं, जिन्होंने एग्रीकल्चर बीएससी तथा एग्रीकल्चर मैनेजमेंट में एमबीए की पढ़ाई की है। शुरू से ही कृषि से जुड़े परिवार से होने के कारण अभिषेक की कृषि से संबंधित कार्य को आगे बढ़ाने में रूचि थी। उद्यानिकी विभाग के सहयोग से प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना द्वारा अभिषेक ने डिहाइड्रेट यूनिट की स्थापना कर मात्र 4 माह में ही लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।

पीएमएफएमई योजना से मिला संबल

अभिषेक जायसवाल बताते हैं कि उद्यानिकी विभाग के माध्यम से उन्हें पीएमएफएमई योजना की जानकारी प्राप्त हुई, जिसके बाद उन्होंने अपने उद्यम की शुरुआत करने का निर्णय लिया। योजना में उन्होंने बैंक से प्राप्त सहायता राशि के माध्यम से माह अक्टूबर 2025 में डिहाइड्रेट यूनिट की स्थापना की। इस यूनिट में मुख्य रूप से प्याज, केला के डिहाइड्रेट उत्पादों को तैयार करते हैं।

क्या है डिहाइड्रेट यूनिट

डिहाइड्रेशन यूनिट एक ऐसी प्रसंस्करण इकाई है, जिसमें फल एवं सब्जियों जैसे प्याज, केला, हल्दी तथा पत्तेदार सब्जियों से कम तापमान पर नमी हटाकर उन्हें सुखाया जाता है। यह प्रक्रिया जल्दी खराब होने वाली खाद्य सामग्री को लंबे समय तक सुरक्षित रखती है और उन्हें फ्लेक्स, चिप्स अथवा पाउडर के रूप में उपयोग योग्य बनाती है।

डिहाइड्रेशन के कारण उत्पाद लम्बे समय तक सुरक्षित रहते हैं, जिससे भंडारण एवं परिवहन आसान और कम खर्चीला हो जाता है। सही तकनीक से सुखाने पर उत्पाद का रंग, स्वाद एवं पोषण तत्व काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं, जिससे ग्राहकों को गुणवत्तापूर्ण एवं पौष्टिक खाद्य उत्पाद उपलब्ध होते हैं।

प्रक्रिया

अभिषेक जायसवाल बताते हैं कि यूनिट में प्याज को डिहाइड्रेट करने के लिए पहले उसका छिलका हटाकर अच्छे से साफ कर कटर मशीन से 1 एमएम स्लाइस बनाए जाते हैं। इन स्लाइसों को क्रेट में भरकर इलेक्ट्रॉनिक ड्रायर में निर्धारित तापमान पर लगभग 10 घंटे रखा जाता है, जिससे डिहाइड्रेटेड उत्पाद तैयार होता है।

पाउडर बनाने के लिए स्लाइस को पल्वराइज़र मशीन में पीसकर पाउडर तैयार किया जाता है और वाइब्रो फिल्टर से छाना जाता है। वहीं केले को डिहाइड्रेट करने के लिए करीबन 60 डिग्री तापमान पर लगभग 8 घंटे तक ड्रायर में रखा जाता है। इसी प्रकार हल्दी, मैथी एवं अन्य उत्पादों के लिए भी लगभग समान प्रक्रिया अपनाई जाती है।

रोजगार के अवसर भी हुए सृजित

यूनिट में वर्तमान में 5 से 6 लोगों को रोजगार मिल रहा है। इससे न केवल अभिषेक का व्यवसाय आगे बढ़ रहा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं।

मांग और बिक्री से बढ़ रही आय

अभिषेक जायसवाल यूनिट में प्रतिमाह लगभग 5-6 क्विंटल उत्पादन की बिक्री कर लेते हैं, जिससे उन्हें लगभग 50 से 60 हजार रुपये शुद्ध आय प्रति माह का मुनाफा हो जाता है। अभिषेक जायसवाल बताते है कि, उत्पादों की पैकेजिंग 30 एवं 50 किलो के पैकेट्स में की जाती है। इसके लिए पैकिंग बैग में सामग्री भरकर पैकेजिंग मशीन से सील कर ग्राहकों तक पहुँचाया जाता है। ग्राहकों द्वारा इन डिहाइड्रेट उत्पादों को पसंद किया जा रहा है। नियमित ग्राहक के साथ-साथ मांग अनुसार पैकेट्स भी तैयार किए जाते हैं।

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़ने की तैयारी

अभिषेक के उत्पादों की बिक्री बुरहानपुर जिले के साथ-साथ इंदौर, मुंबई सहित अन्य शहरों में भी हो रही है। आने वाले समय में वे अपने उत्पादों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से भी विक्रय करने की तैयारी कर रहे हैं।

योजना बनी आत्मनिर्भरता की राह

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना से सही मार्गदर्शन, योजना का लाभ और ईच्छाशक्ति के बल पर युवा न केवल स्वयं का व्यवसाय स्थापित कर रहे हैं, बल्कि अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर बना रहे है।

आशा उइके/अनिल वशिष्ठ


Tuesday, August 26, 2025

श्रीमहाकालेश्वर उज्जैन-इंदौर-पीथमपुर मेट्रो कॉरिडोर

भोपाल: मंगलवार, अगस्त 26, 2025, 17:09 IST//मंत्रि-परिषद के निर्णय

मेट्रो कॉरिडोर के लिये डी.पी.आर. बनाने परामर्श शुल्क की स्वीकृति 


*प्रदेश में 100 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजना

*साथ ही 60 मेगावाट पवन ऊर्जा परियोजना 

*यह सब कैप्टिव मोड पर स्थापित करने का अनुमोदन

*ई-विवेचना ऐप के लिए 75 करोड़ रूपये से 25 हजार टैबलेट क्रय का निर्णय

*"प्रति न्यायालय एक अभियोजक" के सिद्धांत पर 610 नवीन पदों की स्वीकृति

*मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक


भोपाल: 26 अगस्त 2025:(मीडिया लिंक रविंदर//मध्यप्रदेश स्क्रीन डेस्क)::

बहुत से आवश्यक मुद्दों पर मंत्रि-परिषद के निर्णय  प्रकार रहे:

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा उज्जैन-इंदौर-पीथमपुर लाइन के प्रथम चरण में श्रीमहाकालेश्वर उज्जैन लवकुश चौराहा, इंदौर एवं द्वितीय चरण में लवकुश चौराहा से पीथमपुर, मेट्रो रेल परियोजना की डीपीआर बनाने के कार्य के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड को परामर्श शुल्क 9 लाख रूपये प्रति किमी की दर (जीएसटी के अनुसार) का अनुमोदन किया गया।

मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में संचालित क्राईम एण्ड क्रिमिनल ट्रेकिंग नेटवर्क एण्ड सिस्टम (CCTNS) प्रोजेक्ट के सतत् क्रियान्वयन एवं संचालन के लिए 5 वर्षों (वर्ष 2021-22 से 2025-26) के लिए स्वीकृत लागत 102 करोड़ 88 लाख रूपये की योजना में ई-विवेचना ऐप के लिए 75 करोड़ रूपये से 25 हजार टैबलेट क्रय करने की स्वीकृति दी। संशोधित/विस्तारित (CCTNS) योजना की कुल राशि 177 करोड़ 87 लाख 51 हजार रूपये की स्वीकृति प्रदान गयी।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश के सभी पुलिस थानों में CCTNS प्रोजेक्ट 2012 से स्वीकृति है। नए चरण में सभी विवेचना अधिकारियों को इलेक्ट्रॉनिक टेबलेट दिया जाता है। जिससे मौके पर समस्त कार्यवाही हो सके। इसके लिए ई-विवेचना ऐप बनाया गया है। प्रथम चरण में 1732 टेबलेट खरीदे गए हैं।

610 नवीन पदों की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के प्रभावी क्रियान्वयन, आपराधिक न्याय प्रशासन के सुचारू संचालन एवं प्रदेश के सभी दण्ड न्यायालयों के समक्ष "प्रति न्यायालय एक अभियोजक" के सिद्धांत अनुसार अभियोजकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लोक अभियोजन संचालनालय के तहत 610 नवीन पदों की स्वीकृति प्रदान की गई।

स्वीकृति अनुसार अभियोजन संचालनालय के पदों के सृजन में अतिरिक्त लोक अभियोजक के 185 पद, अतिरिक्त जिला अभियोजन अधिकारी के 255 पद, सहायक जिला अभियोजन अधिकारी के 100 पद और सहायक कर्मचारी के 70 पद का सृजन किया गया है। पद सृजन पर तीन वर्ष में लगभग 60 करोड़ रूपए का व्यय आयेगा।

प्रतिस्पर्धात्मक आधार पर विद्युत क्रय किये जाने का निर्णय:

एम.पी. पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड द्वारा मंत्रि-परिषद की 24 जनवरी 2025 को हुई बैठक के पालन में प्रदेश में स्थापित की जाने वाली 4000 (3200+800 मेगावाट "ग्रीनशू") मेगावाट क्षमता की प्रस्तावित नवीन ताप विद्युत परियोजनाओं से प्रतिस्पर्धात्मक आधार पर विद्युत क्रय के लिए जारी निविदा अंतर्गत चयनित तीन विकासकों से क्रमशः 800 मेगावाट, 1600 मेगावाट एवं 800 मेगावाट विद्युत क्रय के लिए स्वीकृति प्रदान की गई। एम.पी. पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड द्वारा चयनित विकासकों से अतिरिक्त 800 मेगावाट विद्युत का क्रय "ग्रीनशू" प्रावधान का उपयोग कर, निविदा की शर्तों एवं म.प्र. विद्युत नियामक आयोग द्वारा प्रदत्त स्वीकृति के अनुसार किया जायेगा। उक्त स्वीकृति के पालन में अग्रिम कार्यवाही एवं म.प्र. विद्युत नियामक आयोग के समक्ष टैरिफ स्वीकृति के लिए याचिका दायर करने के लिए एम.पी. पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड को अधिकृत किया गया है।

कैप्टिव मोड पर सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा परियोजना स्थापित करने का अनुमोदन:

मंत्रि-परिषद द्वारामध्यप्रदेश जल निगम की समूह ग्राम पेयजल प्रदाय योजनाओं के संचालन-संधारण व्यय को कम करने के लिए प्रदेश में सौर ऊर्जा परियोजना एवं पवन ऊर्जा परियोजना स्थापित किए जाने की स्वीकृति दी गयी।

स्वीकृति अनुसार प्रदेश में 100 मेगावाट सौर उर्जा एवं 60 मेगावाट पवन उर्जा परियोजना कैप्टिव मोड पर स्थापित किए जाने, निविदा से प्राप्त दरों पर विद्युत् क्रय किए जाने एवं उत्पादित विद्युत देयकों के भुगतान की सुनिश्चितता के लिए "भुगतान सुरक्षा व्यवस्था" के अंतर्गत 6 माह का रिवोल्विंग लेटर ऑफ क्रेडिट जारी किए जाने के लिए अनुमोदन दिया गया।

मध्यप्रदेश जल निगम द्वारा 35 हजार से अधिक ग्रामों के 75 लाख परिवारों को पेयजल 60,786 करोड़ रुपए की लागत से 147 समूह ग्राम पेयजल प्रदाय योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। उक्त परियोजनाओं के लिये निजी भागीदारी के माध्यम से क्रियान्वयन किए जाने के लिये 24 मार्च 2025 को मंत्रि-परिषद द्वारा सैद्धांतिक सहमति दी गई है।

राजेश दाहिमा

Tuesday, May 6, 2025

बेटियाँ बढ़ा रही है मान, सम्मान और गौरव: CM डॉ. यादव

From Bhopal on Tuesday 6th May 2025 at 18:25 IST Regarding Daughters of M P

मुख्यमंत्री ने किया "परीक्षा संचालन मानक प्रक्रिया निर्देशिका" का किया विमोचन


*हाई स्कूल में 76.22 प्रतिशत और हायर सेकेण्डरी में 74.48 प्रतिशत रहा परीक्षा परिणाम

*विद्यार्थियों की सफलता लक्ष्य के प्रति समर्पण, अथक परिश्रम और लगन का प्रतिफल है

*मुख्यमंत्री ने हाई स्कूल और हायर सेकेण्डरी परीक्षा वर्ष 2024-25 का परिणाम किया घोषित

*हाईस्कूल परीक्षा में सिंगरौली की कु. प्रज्ञा जायसवाल पूरे 500 अंक प्राप्त कर बनी टॉपर

भोपाल: 6 मई 2025: (कार्तिका कल्याणी सिंह//मीडिया लिंक//मध्यप्रदेश स्क्रीन डेस्क):: 

Image By Meta  AI 

महिलाओं का दमन, नवजन्मी कन्यायों की हत्या...अतीत में यह सब आम जैसा ही था। अगर बच्चियों को जीवन मिल भी जाता तो भी उनकी ज़िन्दगी सारी उम्र एक दर्द बन के ही रह जाती। शायरी और कथा कहानियों में इस ज़ुल्म और अत्याचार की बहुत सी बातें सच्ची कहानियों और दस्तावेज़ की तरह दर्ज हैं। बहुत सी फिल्में भी महिलाओं पर हुए ज़ुल्म को लेकर ही बनीं। "दामिनी" और "निकाह" जैसी बहुत सी फिल्मों ने आज के आधुनिक युग की उन कहानियों को भी सामने रखा जो महिला वर्ग पर ज़ुल्म की रिपोर्ट सामने रखती हैं। इस काली अँधेरी आंधी के खिलाफ कुझ समझदार लोगों ने शिक्षा की मशाल रौशन की। बेटियों को पढ़ाया भी जाने लगा। बेटियों ने भी एक बार फिर साबित कर दिखाया यही कि हम किसी से कम नहीं। आसमान छूती इन बच्चियों ने एक बार फिर से सारे समाज को और सारी दुनिया को आशाओं की सौगात दी है कि चिंता न करें--वे हैं जलती हुई सारी दुनिया को बचाने के लिए, सभी को शीतलता और उज्जवल भविष्य देने के लिए...!

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि इस वर्ष हाईस्कूल परीक्षा में 76.22 प्रतिशत एवं हायर सेकेण्डरी परीक्षा में 74.48 प्रतिशत विद्यार्थियों ने पिछले 15 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ते हुए सफलता हासिल की है। यह सफलता लक्ष्य के प्रति समर्पण, अथक परिश्रम और लगन का प्रतिफल है। प्रदेश की प्रतिभाशाली बेटियों ने एक बार फिर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध कर अपने अभिभावकों, शिक्षकों के साथ मध्यप्रदेश को गौरवान्वित किया है। बेटियाँ हमारा, मान, सम्मान और गौरव बढ़ा रही हैं। हाईस्कूल में सिंगरौली की बेटी प्रज्ञा जायसवाल ने शत प्रतिशत 500 अंकों के साथ प्रदेश में प्रथम स्थान और हायर सेकेण्डरी में भी सतना अमरपाटन की बेटी प्रियल द्विवेदी ने 492/500 (विज्ञान - गणित समूह) अंकों के साथ प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज माध्यमिक शिक्षा मण्डल, मध्यप्रदेश द्वारा संचालित हाईस्कूल 10वीं एवं हायर सेकेण्डरी 12वीं परीक्षा वर्ष 2024-25 के परिणामों को समत्व भवन (मुख्यमंत्री निवास) से घोषित कर सफल विद्यार्थियों को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अभिभावकगण एवं शिक्षकगणों को भी बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माध्यमिक शिक्षा मण्डल द्वारा प्रकाशित "परीक्षा संचालन मानक प्रक्रिया निर्देशिका" का विमोचन किया। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री श्री राव उदय प्रताप सिंह, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, माध्यमिक शिक्षा मण्डल की महानिदेशक श्रीमती स्मिता भारद्वाज उपस्थित रहीं।

असफल विद्यार्थियों को मिलेगा एक और अवसर

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जो विद्यार्थी आज असफल रहे, उन्हें निराश नहीं होना है, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लागू नई शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत असफल विद्यार्थियों को एक बार फिर परीक्षा देने का मौका दिया जाएगा और जो विद्यार्थी अपना स्कोर बढ़ाना चाहते हैं वह भी दोबारा परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। यह नवाचार विद्यार्थियों के लिए इतिहास बदलने वाला सिद्ध होगा। मध्यप्रदेश इस प्रकार की परीक्षा कराने वाला देश का तीसरा राज्य होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सफल विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि भारतीय मेधा सम्पूर्ण विश्व में अपनी श्रेष्ठता स्थापित कर रही है। विश्व में बेहतर प्रदर्शन करने वाले अधिकांश देशों की सफलता में भारतीय युवा शक्ति का योगदान उल्लेखनीय है।

माध्यमिक शिक्षा मंण्डल की अध्यक्ष श्रीमती स्मिता भारद्वाज ने बताया कि परीक्षा पद्धति में सुधार और तकनीकी नवाचार के परिणाम स्वरूप इस वर्ष मण्डल द्वारा संचालित परीक्षा में एक भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई और न ही किसी स्थान पर पेपर लीक होने जैसी घटना घटी। नकल के प्रकरण भी न्यूनतम रहे। मण्डल द्वारा विकसित परीक्षा संचालन मानक प्रक्रिया को निरंतर अद्ययतन करते हुए क्रियान्वित किया जाता रहेगा।

संदीप कपूर

Friday, June 14, 2024

आम नहीं खास हैं मप्र के आम

Thursday:13th June 2024 at 14:58

 मध्यप्रदेश में भी है आम का हज़ारों बरस पुराना इतिहास 


भोपाल
: 13 जून 2024: (कार्तिका कल्याणी सिंह//मध्य प्रदेश स्क्रीन डेस्क)::

क्या इस पहेली को आप एक पल में बूझ सकते हैं? यह जनजातीय समाज में बुजुर्ग अपने पोते-पोतियो से पूछते हैं। इसका सही जवाब है-आम। यह ईश्वरीय फल है। इसका स्वाद शब्दों में बता पाना मुश्किल है। भारत में करीब 1500 किस्म का आम होता है। इनमें से कुछ प्रकार बेहद लोकप्रिय है और आम लोगों की जवान पर चढ़े है। अल्फांसो, बॉम्बे ग्रीन, चौसा दशहरा, लंगड़ा, केसर, नीलम, तोतापरी मालदा, सिंदूरी, बादामी, हापुस, नूरजहां, कोह-ए-तूर के नाम अक्सर लोग लेते हैं। इनमें मध्यप्रदेश के आमों का जिक्र खास है।

मध्यप्रदेश के आम बहुत खास है। यदि कहें कि मध्यप्रदेश में “आम पर्यटन” के रूप में पर्यटन की नई शाखा सामने आई है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। आलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा का नूरजहां आम खाना तो दूर इसे देखने तक लोग दूर-दूर से आते हैं। आम आने से पहले ही एक-एक फल की बुकिंग हो जाती है। एक आम का वजन 500 ग्राम से लेकर 2 किलो तक हो सकता है। बारह इंच तक लंबा हो सकता है। स्वाद लाजवाब है। आम जब इतना खास हो जाए कि इसे देखने लोग तरस जाएं तो आम पर्यटन की संभावनाएं बढ़ जाती है। जनवरी में फूल आना शुरू होते हैं और फरवरी के आखिर तक पेड़ फूलों से लद जाता है। जून के आखिर तक फलों से भर जाता है। इसका पौधा अफगानिस्तान से गुजरात होते हुए मध्य प्रदेश आया। कट्ठीवाड़ा में ही 37 किस्में देखी जा सकती है। पेड़ की ऊंचाई 60 फीट तक होती है। एक पेड़ में 100 के करीब आम निकल आते हैं। इस प्रकार करीब 350 आम पांच पेड़ों से मिल जाता है। एक आम 500 रूपए से लेकर 2000 तक बिक जाता है।

सुंदरजा आम भी बहुत लोकप्रिय है 

पिछले साल रीवा के गोविंदगढ़ में होने वाले सुंदरजा आम को ज्योग्राफिकल इंडिकेशन टैग मिला। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने खुश होकर ट्वीट साझा किया था। वर्ष 1968 में सुंदरजा पर डाक टिकट जारी हो चुका है। सुंदरजा आम देखने में जितना सुंदर है स्वाद में उतना ही लाजवाब है। इसकी सुगंध मदहोश करने वाली है। बारिश की पहली फुहार के बाद यह पकता है। 

गोविंदगढ़ के वातावरण में ही यह पनपता है क्योंकि यहां मिट्टी और तापमान दोनों का विशेष महत्व है सुंदरजा पेड़ को फलने-फूलने के लिए। इसकी पत्तियां , छाल गुठलियां सब काम आती है। यह एंटीऑक्सीडेंट है। विटामिन-ए, विटामिन-सी और आयरन से भरपूर है। शक्कर की मात्रा कम होती है इसलिए मधुमेह के मरीज भी इसे पसंद करते हैं। सुंदरजा रीवा जिले और पूरे मध्य प्रदेश की भी पहचान बन गया है। एक जिला एक उत्पादक परियोजना में सुंदरजा को शामिल किया गया है। रीवा के फल अनुसंधान केंद्र कठुलिया में आम पर आगे रिसर्च लगातार चल रही है। यहां विभिन्न किस्मों के आम के 2345 पेड़ हैं। इनमें बॉम्बे ग्रीन, इंदिरा, दशहरा, लंगड़ा, गधुवा, आम्रपाली, मलिका मुख्य है।

बाणसागर की नहर के कारण इस क्षेत्र में खेती विकसित हो गई है। साथ ही उद्यानिकी फसलों की पैदावार भी बढ़ी है। इसी के साथ खाद्य प्रसंस्करण लघु उद्योगों की भी भरपूर संभावनाएं बनी है। गोविंदगढ़ क्षेत्र में ही आम के कई बाग है। यहां करीब 237 किस्म के आम मिल जाते है। सभी स्वाद में एक दूसरे से बढ़कर है। यहां से फ्रांस, अमेरिका, इंग्लैंड और अरब देशों को आम निर्यात होता है।

जबलपुर का मियाजाकी आम सबसे महंगा भी स्वाद भी 

जबलपुर में सबसे महंगे आम मियाजाकी ने स्वाद की दुनिया में धूम मचा दी है। एक आम की कीमत 20000 रूपये तक पहुंच जाती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तीन लाख रूपये किलो तक कीमत मिल जाती है। यह लाल रंग का होता है। एक आम 900 ग्राम से लेकर डेढ़ किलो तक का होता है। यह जापान की किस्म है जो थाईलैंड, फिलिपींस में भी होती है। जापान में इसे सूर्य का अंडा कहते हैं। जबलपुर में 1984 से इसका उत्पादन हो रहा है। इसे पकाने के लिए गर्म मौसम और बारिश दोनों की जरूरत होती है। जबलपुर से सटे डगडगा हिनौता गांव में इन आमों को दूर से देखा जा सकता है। यहां आम के पेड़ कड़ी सुरक्षा में रहते हैं। इसके मालिकों की सारी ऊर्जा पेड़ों की सुरक्षा में लग जाती है। मध्यप्रदेश से अब बांग्लादेश अरब, यूके, कुवैत, ओमान और बहरीन देशों को आम का निर्यात हो रहा है।

आम का इतिहास हज़ारों साल पुराना 

आम फल का इतिहास करीब 5000 सालों का है। यह इंडो वर्मा रीजन में पैदा हुआ और पूर्वी भारत और दक्षिण चीन तक पूरे साउथ एशिया में विस्तार से मिलता था। वर्ष 1498 में जब पुर्तगाली कोलकाता में उतरे तो उन्होंने आम का व्यापार स्थापित किया। आम ट्रॉपिकल और सब ट्रॉपिकल जलवायु में अच्छा फलता है। प्राथमिक रूप से यह ब्राज़ील, इक्वाडोर, ग्वाटेमाला, हैती, मेक्सिको, पेरू में भी पाया जाता है।

आम का इतिहास बताता है कि अंग्रेजी का मेंगो शब्द मलयालम के “मंगा” और तमिल के “मंगाई” से बना है। आम की टहनियों को जोड़कर तरह-तरह की नई किस्में पैदा करने की कला पुर्तगालियों की देन है। जैसे अल्फांसो का नाम एक सैन्य विशेषज्ञ अल्बुकर्क के नाम पर रखा गया। भारत आए चीनी यात्री व्हेन सांग ने दुनिया को बताया कि भारत देश में आम का फल होता है। मौर्य काल में आम के पेड़ रोड के किनारे लगाए जाते थे जिन्हें समृद्धि का प्रतीक माना जाता था।

आम का पेड़ 60 फीट तक ऊंचा हो सकता है और 4 से 6 साल में ही आम देने लगता है। आम का पेड़ पत्तियों से कार्बन डाइऑक्साइड सोख लेता है और इसका उपयोग अपने तने, शाखों के लिए करता है। इसलिए आम की पत्तियों को शादियों के मंडपो, घरों में तोरण के रूप में लगाई जाती हैं।

मप्र में उत्पादन लगातार बढ़ रहा है 

मध्यप्रदेश में पिछले 8 सालों के आम उत्पादन, क्षेत्र और उत्पादकता के आंकड़ों का अध्ययन करने से पता लगता है कि आम फल का उत्पादन और क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2016-17 में उत्पादकता प्रति हेक्टेयर 13.03 मीट्रिक टन थी जो 2023-24 में बढ़कर 14.66 हो गई है। इसी प्रकार 2016-17 में आम का क्षेत्र 43609 हेक्टेयर थाहो गयाजो अब बढ़कर 64216 हो गया है। इसी दौरान उत्पादन 5,04,895 मेट्रिक टन था जो अब बढ़कर 9,41, 352 मीट्रिक टन हो गया है।

अब देखना है कि मध्यप्रदेश के आम को देश के किस किस कोने में ले जा कर आम की नई किस्में पैदा  करने के नए प्रयास होंगें! 

Sunday, December 3, 2023

विधानसभा निर्वाचन-2023:ग्वलियर में भी दिखा मोदी का जादू

रविवार 03 दिसम्बर 2023 को  21:53 बजे 

जिले के सभी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव परिणाम घोषित

ग्वालियर: रविवार,  03 दिसम्बर 2023: (मध्य प्रदेश स्क्रीन ब्यूरो//चुनाव डेस्क)::

इस बार के इन विधानसभा चुनावों के परिणामों पर सभी की नज़र थी। इन परिणामों को 2024  के चुनावों सेमीफाइनल ही मन जा रहा था। मध्यप्रदेश और राजस्थान प् र सियासी लोगों की विशेष निगाहें थीं।  आसान।  फिर भी भाजपा की जीत अब बहुत से नए संकेत दे रही है। कांग्रेस प्रमुख श्री मल्लिकार्जुन खड़गे  परिणामों के दौरान ही जब सब कुछ स्पष्ट होने लगा था तो की विशेष बैठक  कर दी थी। छह दिसंबर  को विपक्षी दल  परिणामों पर विचार करते हुए अपनी नई रणनीति तय करेंगे। ज़ाहिर है श्री खड़गे लम्बे समय से राजनीति  महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियां  हैं। वह इस नई चुनौती का सामना भी करेंगे।

इस बार भी चुनावी परिणामों की तरफ सभी लोग निगाहें लगा कर बैठे थे। देश भर में सबसे अधिक उत्साह  गया भारतीय जनता पार्टी में। भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के तहत रविवार 3 दिसम्बर को ग्वालियर जिले की सभी 6 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के मतों की गिनती यहाँ एमएलबी कॉलेज में विधानसभा क्षेत्रवार बनाए गए मतगणना कक्षों में की गई। गिनती के बाद संबंधित रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा चुनाव परिणाम घोषित किए गए। साथ ही विजयी प्रत्याशियों को कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री अक्षय कुमार सिंह एवं संबंधित प्रेक्षक गणों की मौजूदगी में रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा विजयी प्रत्याशियों को निर्वाचित होने के प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। 

विधानसभा निवा्रचन क्षेत्र 14-ग्वालियर ग्रामीण में कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी श्री साहब सिंह गुर्जर ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी श्री भारत सिंह कुशवाह को 3242 मतों से पराजित किया। श्री गुर्जर को 79 हजार 871 मत और श्री कुशवाह को 76 हजार 629 मत प्राप्त हुए। 

जिले के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र 15-ग्वालियर से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर 19 हजार 140 मतों से विजयी रहे। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी इंडियन नेशनल काँग्रेस के प्रतयाशी श्री सुनील शर्मा को पराजित किया। श्री तोमर को एक लाख 4 हजार 775 और श्री शर्मा को 85 हजार 635 मत मिले।  

विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र 16-ग्वालियर पूर्व से इंडियन नेशनल कांग्रेस के उम्मीदवार डॉ. सतीश सिंह सिकरवार ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भारतीय जनता पार्टी की प्रत्याशी श्रीमती माया सिंह को 15 हजार 353 मतों से हराया। श्री सिकरवार को एक लाख 301 मत और श्रीमती माया सिंह को 84 हजार 948 मत हासिल हुए। 

जिले के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र 17-ग्वालियर दक्षिण से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी श्री नारायण सिंह कुशवाह ने इंडियन नेशनल काँग्रेस के प्रत्याशी श्री प्रवीण पाठक को 2 हजार 536 मतों से हराया। श्री कुशवाह को कुल 82 हजार 317 मत प्राप्त हुए। उनके निकटतम प्रतिद्वंदी श्री पाठक को 79 हजार 781 मत मिले। 

विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र 18-भितरवार से भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार श्री मोहन सिंह राठौर ने इंडियन नेशनल काँग्रेस के प्रत्याशी श्री लाखन सिंह यादव को 22 हजार 354 मतों से पराजित किया। श्री राठौर को 97 हजार और श्री यादव को 74 हजार 646 मत प्राप्त हुए। 

विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र 19-डबरा (अजा) से इंडियन नेशनल काँग्रेस के प्रत्याशी श्री सुरेश राजे विजयी रहे। उन्होंने अपनी निकटतम प्रतिद्वंदी भारतीय जनता पार्टी की उम्मीदवार श्रीमती इमरती देवी को 2 हजार 267 मतों से हराया। श्री सुरेश राजे को 84 हजार 717 व श्रीमती इमरती देवी को 82 हजार 450 मत मिले। 

विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र 14-ग्वालियर ग्रामीण का चुनाव परिणाम रिटर्निंग अधिकारी श्री बृजबिहारी लाल श्रीवास्तव, 15-ग्वालियर का परिणाम रिटर्निंग अधिकारी श्री श्री अतुल सिंह, 16-ग्वालियर पूर्व का परिणाम रिटर्निंग अधिकारी श्री विनोद सिंह, 17-ग्वालियर दक्षिण का परिणाम रिटर्निंग अधिकारी श्री नरेश कुमार गुप्ता, 18-भितरवार का परिणाम रिटर्निंग अधिकारी श्री देवकीनंदन सिंह और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र 19-डबरा (अजा) का चुनाव परिणाम रिटर्निंग अधिकारी श्री मुनीष सिकरवार द्वारा घोषित किया गया। 

कलेक्टर श्री सिंह एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री राजेश चंदेल रविवार को सुबह से मतगणना सम्पन्न होने तक लगातार मतगणना व्यवस्था का का जायजा लेते रहे। साथ ही मतगणना व्यवस्था के प्रभारी एवं जिला पंचायत सीईओ श्री विवेक कुमार, अपर कलेक्टर श्रीमती अंजू अरूण कुमार एवं श्री टी एन सहित जिला प्रशासन के अन्य अधिकारियों तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री ऋषिकेश मीणा समेत अन्य पुलिस अधिकारियों ने सुव्यवस्थित ढंग से मतगणना सम्पन्न कराने में महती भूमिका निभाई।  

पूरी पारदर्शिता के साथ खुले स्ट्रांग रूम

मतगणना दिवस को प्रात:काल लगभग 7 बजे सभी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के स्ट्रांग रूम पूरी पारदर्शिता के साथ खोले गए। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा नियुक्त प्रेक्षकगण, प्रत्याशी और उनके निर्वाचन अभिकर्ताओं की मौजूदगी में स्ट्रांग रूम खोले गए। भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत स्ट्रांग रूम खोलने के दौरान वीडियोग्राफी भी कराई गई। 

कलेक्टर एवं एसएसपी ने जताया आभार

कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री अक्षय कुमार सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री राजेश चंदेल ने सुव्यवस्थित ढंग से मतगणना सम्पन्न होने पर मतगणना में लगे अधिकारी-कर्मचारियों, प्रत्याशी व उनके अभिकर्ताओं, मीडिया प्रतिनिधियों तथा जिलेवासियों के प्रति आभार जताया है। --हितेंद्र सिंह भदौरिया

Thursday, June 1, 2023

120 लाड़ली लक्ष्मी एक जून को जाएँगी बाघा-हुसैनी वाला बार्डर

31st May 2023 at 14:23 IST

मुख्यमंत्री श्री चौहान हरी झंडी दिखा कर करेंगे रवाना


भोपाल: बुधवार, 31मई 31, 2023: (मध्य प्रदेश स्क्रीन ब्यूरो)::

"माँ तुझे प्रणाम" योजना में प्रदेश की 120 लाड़ली लक्ष्मी एक जून को बाघा-हुसैनी वाला बार्डर की अनुभव यात्रा पर जाएंगी। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान दोपहर 12 बजे रवीन्द्र भवन से लाड़ली लक्ष्मियों को हरी झंडी दिखा कर रवाना करेंगे। दोपहर 3:30 बजे दादर-अमृतसर एक्सप्रेस से रवाना होंगी। खेल और युवा कल्याण मंत्री श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया भी उपस्थित रहेंगी।

अनुभव यात्रा में जाने वाली लाड़ली लक्ष्मियाँ बाघा-हुसैनी वाला बार्डर (अमृतसर पंजाब), स्वर्ण मंदिर, जलियाँवाला बाग और रामतीर्थ का भ्रमण करेंगी। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष निर्णय लिया गया था कि प्रदेश की लाड़ली लक्ष्मी बेटियाँ भी "माँ तुझे प्रणाम" योजना का हिस्सा बनेगी। वर्ष 2022 में 200 लाड़ली लक्ष्मी बेटियों ने बाघा बार्डर की यात्रा की थी।

"माँ तुझे प्रणाम" योजना

मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्रदेश के युवाओं में देश की सीमाओं की सुरक्षा के प्रति जागृति लाने, राष्ट्र के प्रति समर्पण, साहस की भावना जाग्रत करने एवं युवाओं को सेना तथा अर्द्ध सैनिक बलों के प्रति आकर्षित करने के उद्देश्य से वर्ष 2013 में "माँ तुझे प्रणाम" योजना प्रारंभ की गई थी। अब तक 14 हजार 293 युवाओं को भ्रमण पर भेजा गया, जिसमें 7 हजार 779 युवक और 6 हजार 514 युवतियाँ शामिल है। इन्हें लेह-लद्दाख, कारगिल, आर.एस. पुरा (जम्मू-कश्मीर), बाघा-हुसैनीवाला बार्डर (अमृतसर, पंजाब), तनोत माता का मंदिर-लोंगेवॉल (राजस्थान), बीकानेर (राजस्थान), बाडमेर (राजस्थान), कोच्चि (केरल), नाथूला-दर्रा (सिक्किम), तुरा (मेघालय), पेंद्रा-पोल (पश्चिम बंगाल), जय गाँव (पश्चिम बंगाल), अण्डमान-निकोबार और कन्याकुमारी (तमिलनाडु) का भम्रण करवाया गया।

बिन्दु सुनील//समाचार 

Wednesday, April 5, 2023

कांटों वाली भूमि पर फूलों की खेती

Indore: 05 April 2023 at 16:11

प्री-वेडिंग शूट के लिए भी हो रही है लगातार लोकप्रिय 

इन्दौर: 5 अप्रैल 2023: (मध्यप्रदेश स्क्रीन डेस्क)::

चित्तौड़गढ़-भुसावल राष्ट्रीय राजमार्ग पर लोहारी गांव के पास नहर की एक ढलान इन दिनों फूलों वाली ढलान के लिए लोकप्रिय हो रही है। यह ढलान प्री-वेडिंग के कपल्स को खूब आकर्षित कर रही है। इस स्थान के सौंदर्य को पिक्चर में कैद करने और यादगार दृश्य बनाने के लिए अब तक यहां 4 जोड़ों ने प्री-वेडिंग शूट किया है। साथ ही राजमार्ग से गुजरने वाले यात्रियों को भी खुबसूरत निमाड़ का एहसास करा रही है। यहां फूलों की बगिया लगाने की भी बड़ी रोचक कहानी है। खेडीफाटा के किसान शंकर पाटीदार ने बताया कि वे 10 से 15 वर्ष से मिर्च या कपास की खेती में बॉर्डर के रूप में गेंदा फूल लगाया करते थे। जो किसी कीट व्याधि के इंडिकेटर के तौर पर काम किया करती थी। किसी भी फसल पर अटैक आने से पहले फूलों पर अटैक होता है। लेकिन जब रासायनिक छिड़काव या खाद नहीं देना पड़ा और बाजार में वजन व भाव अच्छा मिलने लगा तो पूरी तरह फूलों की खेती की शुरुआत की।     

24 हजार रुपये की लागत से 17 हजार गेंदा 2.5 एकड़ में लगाएँ 

किसान शंकरजी ने बताया कि फूलों की खेती करना आसान भी है और सस्ता भी। 2.5 एकड़ की इस बगिया को बसाने में मात्र 24 हजार रुपये खर्च किये गए है। 17 हजार पौधों की इस बगिया से 80 दिनों बाद फूल आना भी प्रारम्भ हुए हैं। जो लगातार 70 से 80 दिनों तक फसल रहती है। वे 2.50 एकड़ के क्षेत्र में दूसरी बार गेंदा की किमको सीड किस्म की खेती कर रहे हैं। पिछले वर्ष इसी खेत से 150-160 क्विंटल फूलों का उत्पादन ले चुके हैं। 20 से 25 रुपये के भाव से उन्हें फूल उत्पादन में अच्छा मुनाफा हुआ। क्योंकि इस फसल में किसी कीटनाशक या रासायनिक खाद की जरूरत नहीं पड़ती। इस फसल का अधिक मुनाफा लेने के लिए गणेश चतुर्थी, नवरात्रि और दीपावली के सीजन को बेहतर अवसर मान सकते हैं।

गेंदा फूल की इस ढलान में पानी नहीं था तो ट्यूबवेल कराने पर हुए मजबूर    

55 वर्षीय एमकॉम में शिक्षित शंकर भाई ने बताया कि खेती तो उनके पास पर्याप्त है लेकिन 1990 के दशक में पानी नहीं होने से एक फसल ले पाते थे। 1990 से 2010 के मध्य उन्होंने 60 एकड़ खेत के अलग-अलग हिस्सें में अब तक 48 ट्यूबवेल 600 फीट से अधिक गहराई के करवा चुके हैं। लेकिन पानी की पर्याप्त उपलब्धता नहीं हो पाई। फिर 2013 में इंदिरा सागर परियोजना की नहर निकलने के बाद से तस्वीर और खेती का नजरिया बदला। नहर आने के बाद उनके 5 ट्यूबवेल सालभर पानी दे पा रहे है। अब आसपास का पूरा क्षेत्र गर्मी में भी लहलहा रहा है।    

उद्यानिकी विभाग ने पहली बार ड्रिप सिंचाई से परिचय कराया    

कसरावद के वरिष्ठ उद्यान  विस्तार अधिकारी श्री जगदिश मुजाल्दे ने बताया कि 2005-06 में उद्यानिकी विभाग ने पानी के प्रबंधन करने की कला ड्रिप सिंचाई से परिचय कराते हुए 5 एकड़ में ड्रिप सिंचाई अनुदान पर दिया था। इसके बाद अब तक समय-समय पर उनको और भाईयों को इसी भूमि पर 410322 रूपये के अनुदान पर 27 एकड़ में ड्रिप सिंचाई का लाभ दिया। आज वे पूरे 60 एकड़ खेत में ड्रिप सिंचाई से खेती कर रहे है। उद्यानिकी उपसंचालक श्री केके गिरवाल ने बताया कि जिले में वर्ष 2021-22 में फ्लोरीकल्चर का कुल रकबा 152 हे. और इस वर्ष 2022-23 में 220 हे. है।                     महिपाल अजय


Wednesday, March 29, 2023

मध्यप्रदेश में मछुआरो की वित्तीय मज़बूती का एक और अभियान

Bhopal: Tuesday: 28th March 2023 at 11:34 PM

मछुआरों की सुविधा और वित्तीय सुरक्षा में होगी अब और बढ़ोतरी

 मछुआरों के  क्रेडिट कार्ड बनाने को विशेष शिविर :मंत्री श्री सिलावट


भोपाल : मंगलवार, 28 मार्च 2023: (मध्यप्रदेश स्क्रीन डेस्क)::

मछुआरों की ज़िंदगी और आर्थिक हालात कितने कठिन होते हैं इसका अनुमान दूर बैठ कर नहीं लगाया जा सकता। इस ज़िंदगी को कुछ देर जी कर शायद थोड़ा बहुत समझा जा सके। जिन लोगो ने अर्नेस्ट हैमिंग्वे का नावल बूढ़ा आदमी और सागर पदः है वे भी शायद इस कठिन जीवन की कुछ झलक पा सकें। इन लोगों की आर्थिक रीढ़ मज़बूत करने के लिए मध्यप्रदेश सरकार समय समय पर कदम उठाती रही है। इन्हें छात्रवृति देने की बात हो या इन्हें क्रेडिट कार्ड देने की तो सर्कार ने बहुत से महत्वपूर्ण निर्णय समय समय पर लिए हैं।   

जल-संसाधन, मछुआ-कल्याण और मत्स्य विकास मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने  मछुआरों की सर्वांगीण उन्नति के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उन्हें समय पर दिये जाने के निर्देश दिये है। उन्होंने कहा कि पात्र मछुआ भाईयों के किसान क्रेडिट कार्ड बनाने के लिए शिविर लगाए जाएँ। मंत्री श्री सिलावट ने आज निवास कार्यालय में विभागीय समीक्षा की।

मंत्री श्री सिलावट ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व और मंशानुसार मत्स्य विभाग सराहनीय कार्य कर रहा है। आगे भी इसी तरह से कार्य करते रहें। उन्होंने विभागीय योजनाओं में लक्ष्य पूर्ति के लिए अधिकारियों को मछुआ सोसायटी से संपर्क करने और मत्स्य उत्पादन को बढ़ाने के निर्देश दिये।

प्रमुख सचिव श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव, मत्स्य महासंघ के प्रबंध संचालक श्री पुरूषोत्तम धीमान, संचालक श्री भारत सिंह, सेक्रेटरी श्रीमती ज्योति टोप्पो और डिप्टी डायरेक्टर श्री रवि कुमार गजभिये भी इस मौके पर उपस्थित रहे।

गौरतलब है कि इस संबंध में पहले भी कदम उठाए जाते रहे हैं। सात सितंबर 2021 की एक विज्ञप्ति के मुताबिक उस समय भी मछुआरों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता और छात्रवृत्ति की राशि में हुई वृद्धि हुई है। मत्स्य महासंघ की 25 वीं वार्षिक साधारण सभा की बैठक में इसे लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे। 

मछुआ कल्याण और मत्स्य विकास मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने महासंघ की 25वीं वार्षिक साधारण सभा को संबोधित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश सरकार का मुख्य उद्देश्य अंतिम छोर तक के व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। इसके लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। मछुआ समाज मुख्य रूप से मत्स्य पालन और आखेट का कार्य करते हुए जीवन-यापन कर रहा है इनकी आर्थिक स्थिति को बेहतर करने के लिए ही मत्स्य महासंघ का स्थापना की गई थी। लड़कियों के विवाह के लिए "मीनाक्षी कन्या विवाह" जाल-नाव सहित अन्य आर्थिक संबल प्रदान करने वाली योजनायें  मत्स्य महासंघ संचालित कर रहा है।

मंत्री श्रीं सिलावट ने कहा कि सहकारिता के उद्देश्य पर आधारित यह मत्स्य महासंघ सबका विकास, सबका साथ, और सबके विश्वास की अवधारणा पर काम कर रहा है। मंत्री श्री सिलावट ने मछुआ महासंघ की महासभा में गंभीर बीमारी के लिए आर्थिक सहायता राशि को बढ़ाकर 40 हजार से 50 हजार, तकनीकी शिक्षा छात्रवृत्ति योजना में 20 हजार से बढ़ाकर 30 हजार रुपए और मछुआ सोसाइटी  के सदस्यों में किसी की मृत्यु होने पर आर्थिक सहायता राशि 7500 से बढ़ाकर 10 हजार रूपये कर दी है।

साधारण सभा में निर्णय लिया गया कि मेजर कॉर्प और अन्य प्रजाति की मछली पकड़ने पर 32 रूपए किलो के स्थान पर अब 34 रुपए किलो और अन्य छोटी मछलियों को पकड़ने पर 19 रूपए प्रति किलो के स्थान पर 20 रूपए प्रति किलो मत्स्याखेट की  दर निर्धारित कर दी है। इसके साथ ही मछुआ समिति की मांग पर सभी मछुआरों को लाइफ जैकेट उपलब्ध कराने के संबंध में श्री सिलावट ने निर्देश दिए हैं।

मंत्री श्री सिलावट ने संचालक मत्स्य विकास और मत्स्य महासंघ के प्रबंध संचालक को निर्देश दिए कि सभी मछुआरों के क्रेडिट कार्ड दिसंबर तक बन जाने चाहिए, जिससे बैंको से जीरो ब्याज दर पर ऋण राशि उपलब्ध हो। महा सभा की बैठक में मंत्री ने सभी मछुआ सोसायटी के अध्यक्षों को माला पहनाकर और बुके देकर सम्मानित किया। उन्होंने संभाग स्तर पर भी क्षेत्रीय बैठकों का आयोजन करने तथा समिति में महिला सदस्यों की भागीदारी के निर्देश दिए हैं।

साधारण सभा में मत्स्य महासंघ द्वारा प्रस्तुत 56 करोड़ की आय और 36 करोड़ के व्यय का बजट सर्वसम्मति से पारित किया गया। प्रदेश के 27 जिलों के जलाशय में मछुआ समिति क्रियाशील हैं। इस वर्ष 445 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से 20 करोड़ की राशि मछुआरों को प्रदान की गई है। मत्स्य महासंघ में 216 और विभाग में 2 हजार मछुआ समिति कार्यरत हैं।

Tuesday, October 4, 2022

उज्जैन का प्राचीन वैभव "श्री महाकाल लोक" में होगा अवतरित

Tuesday 4th October 2022 at 14:22 PM IST

जनसंपर्क संचालनालय की विशेष फीचर श्रृंखला

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 11 अक्टूबर को प्रथम चरण लोकार्पण करेंगे 


भोपाल: 4 अक्टूबर 2022, (मध्यप्रदेश स्क्रीन ब्यूरो)::

भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली, प्राचीन काल-गणना, ज्योतिष, संस्कृति का केन्द्र, महाकवि कालिदास एवं सम्राट विक्रमादित्य की गौरवशाली नगरी का प्राचीन वैभव अब नए स्वरूप "श्री महाकाल लोक" में अवतरित होने जा रहा है। पौराणिक नगरी उज्जैन के वैभव, परंपराओं, धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक महत्व को पूरी तरह ध्यान में रखते हुए राज्य शासन ने श्री महाकाल क्षेत्र के समग्र विकास के लिए प्रभावी विकास योजना बनाई, जो मूर्तरूप ले रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 11 अक्टूबर को गरिमामय समारोह में योजना के प्रथम चरण के कार्यों का लोकार्पण करने उज्जैन आ रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में सिंहस्थ-2016 में उज्जैन में विश्व स्तरीय अधो-संरचना का विकास किया गया था। अब ‘’बनारस कॉरिडोर’’ की तर्ज पर "महाकाल लोक" बनाया जा रहा है। योजना के प्रथम चरण में भगवान श्री महाकालेश्वर के आँगन में छोटे एवं बड़े रूद्र सागर, हरसिद्धि मन्दिर, चार धाम मन्दिर, विक्रम टीला आदि का विकास किया गया है। दूसरे चरण में महाराजवाड़ा परिसर का विकास किया जायेगा, जिसमें ऐतिहासिक महाराजवाड़ा भवन का हैरिटेज के रूप में पुनर्पयोग, कुंभ संग्रहालय के रूप में पुराने अवशेषों का समावेश एवं इस परिसर का महाकाल मन्दिर परिसर से एकीकरण होगा।

श्री महाकाल लोक का प्रथम चरण, जिसे तकनीकी रूप से ‘’मृदा प्रोजेक्ट-1’’ कहा जाता है, पूर्ण हो चुका है। प्रथम चरण के कार्यों का 11 अक्टूबर को लोकार्पण के बाद इसे आम श्रद्धालुओं के लिये खोल दिया जायेगा। प्रथम चरण के कार्यों के खुलते ही हरि फाटक ब्रिज की चौथी भुजा से आकर श्रद्धालु जैसे ही त्रिवेणी संग्रहालय पहुँचेंगे, उन्हें बाबा श्री महाकाल के अलौकिक दर्शन होंगे।

"श्री महाकाल लोक" क्षेत्र विकास परियोजना की अनुमानित लागत 800 करोड़ रूपये है, जिसमें प्रथम चरण में 350 करोड़ रूपये से महाकाल प्लाजा, महाकाल कॉरिडोर, मिड-वे झोन, महाकाल थीम पार्क, घाट एवं डैक एरिया, नूतन स्कूल कॉम्पलेक्स और गणेश स्कूल कॉम्पलेक्स का कार्य पूर्ण हो चुका है। महाकाल कॉरिडोर के प्रथम घटक में पैदल चलने के लिए उपयुक्त 200 मीटर लम्बा मार्ग बनाया गया है। इसमें 25 फीट ऊँची एवं 500 मीटर लम्बी म्युरल वॉल बनाई गई है। साथ ही 108 शिव स्तंभ, शिव की विभिन्न मुद्राओं सहित निर्मित हो चुके हैं, जो अलग ही छटा बिखेर रहे हैं। लोटस पोंड, ओपन एयर थिएटर तथा लेक फ्रंट एरिया और ई-रिक्शा एवं आकस्मिक वाहनों के लिए मार्ग भी  बनाए गए हैं। बड़े  रूद्र सागर की झील में स्वच्छ पानी भरा गया है। साथ ही यह सुनिश्चित किया गया है कि पानी स्वच्छ ही रहे।

महाकाल थीम पार्क में भगवान श्री महाकालेश्वर की कथाओं से युक्त म्यूरल वॉल, सप्त सागर के लिए डैक एरिया एवं उसके नीचे शॉपिंग और बैठक क्षेत्र सुविधाएँ विकसित की गई हैं। इसी तरह त्रिवेणी संग्रहालय के समीप कार, बस और दोपहिया वाहन की मल्टीलेवल पार्किंग बन चुकी है। इस क्षेत्र में धर्मशाला एवं अन्न क्षेत्र भी बनाये जा रहे हैं। रोड क्रॉसिंग के जरिये पदयात्रियों की कनेक्टिविटी विकसित की गई है। मिड-वे झोन में पूजन सामग्री की दुकानें, फूड कोर्ट, लेक व्यू रेस्टोरेंट, लेक फ्रंट डेवलपमेंट, जन-सुविधाएँ और टॉवर सहित निगरानी एवं नियंत्रण केन्द्र की स्थापना भी की गई है। सुगम मन्दिर पहुँच मार्ग के तहत त्रिवेणी संग्रहालय से हरसिद्धि मार्ग, भगत सिंह मार्ग, हरि फाटक ब्रिज से महाकाल चौराहा, बेगमबाग रोड, सरस्वती शिशु मन्दिर के समानांतर मार्ग, महाकाल चौराहे से महाकाल मन्दिर, महाकाल थाना से बड़ा गणेश नया मार्ग, बड़ा गणेश मन्दिर रोड, नृसिंह घाट के समानांतर नूतन स्कूल तक नवीन मार्ग, हरसिद्धि मन्दिर से भगतसिंह मार्ग को चौड़ा किया गया है और नये मार्ग बनाये गये हैं।

मृदा प्रोजेक्ट दूसरा चरण

श्री महाकाल लोक क्षेत्र विकास योजना के दूसरे चरण ‘’मृदा प्रोजेक्ट-2’’ में महाराजवाड़ा परिसर का विकास किया जायेगा। इस चरण के कार्य वर्ष 2023-24 में पूर्ण होंगे। इसमें ऐतिहासिक महाराजवाड़ा भवन का हैरिटेज के रूप में पुनर्पयोग, पुराने अवशेषों का समावेश कर भवन का आंशिक उपयोग कुंभ संग्रहालय के रूप में करते हुए इस परिसर का महाकाल मन्दिर परिसर से एकीकरण किया जायेगा। स्थानीय कला एवं संस्कृति को दर्शाते हुए सांस्कृतिक हाट का निर्माण होगा। रामघाट फसाड ट्रीटमेंट के घटक में रामघाट की ओर जाने वाले पैदल मार्ग का कायाकल्प, फेरी एवं ठेला व्यवसाइयों के लिये अलग व्यवस्था, वास्तुकलात्मक तत्वों के प्रयोग द्वारा गलियों का सौन्दर्यीकरण तथा रामघाट पर सिंहस्थ थीम आधारित डायनेमिक लाइट शो किया जायेगा। पार्किंग, धर्मशाला, प्रवचन हॉल एवं अन्न क्षेत्र का भी निर्माण किया जा रहा है। दूसरे चरण में महाराजवाड़ा, रूद्र सागर जीर्णोद्धार, छोटा रूद्र सागर लेक फ्रंट, रामघाट का सौन्दर्यीकरण, पार्किंग एवं पर्यटन सूचना केन्द्र, हरि फाटक पुल को चौड़ा करना एवं रेलवे अण्डरपास तथा रूद्र सागर पर पैदल पुल, महाकाल द्वार, बेगमबाग मार्ग का विकास, रूद्र सागर पश्चिमी मार्ग तथा महाकाल पहुँच मार्ग का उन्नयन किया जायेगा।

इसमें छोटा रूद्र सागर लेक फ्रंट विकास योजना में लैंडस्केपिंग सहित मनोरंजन केन्द्र, वैदिक वाटिका एवं योग केन्द्र, मंत्रध्वनि स्थल एवं पार्किंग का विकास होगा। पार्किंग सूचना केन्द्र एवं विक्रय केन्द्र का विकास किया जायेगा। रूद्र सागर जीर्णोद्धार योजना में स्लज को हटाते हुए रूद्र सागर लेक की डीसिल्टिंग की जायेगी। रूद्र सागर को शिप्रा नदी से जोड़ा जायेगा। हरि फाटक ओवर ब्रिज की चारों भुजाओं को चौड़ा किया जायेगा और जयसिंहपुरा के समीप रेलवे अण्डरपास बनाया जायेगा।

श्री महाकालेश्वर थाने के पास स्थित महाकाल द्वार का संरक्षण किया जायेगा और यहाँ हेरिटेज कॉरिडोर विकसित होगा। इसी तरह बेगमबाग क्षेत्र का विकास एवं सौन्दर्यीकरण भी होगा। रूद्र सागर पर 210 मीटर लम्बा पैदल पुल बनाया जायेगा, जो पीएचई की पानी की टंकी से महाकाल थीम पार्क को जोड़ेगा। इस चरण में श्री महाकाल मन्दिर परिसर के आगे के भाग का लगभग 70 मीटर तक विस्तार किया जायेगा। इसमें 11 भवनों के अधिग्रहण की कार्यवाही पूर्ण हो चुकी है। इस क्षेत्र में बैठने का स्थान, लैंडस्केपिंग एवं पैदल मार्ग भी प्रस्तावित हैं।

Saturday, November 20, 2021

मुख्यमंत्री श्री चौहान को भेंट में प्राप्त पौधों का बनेगा "पौध बैंक"

20th November 2021 at 10:20 PM

विश्व बाल दिवस पर बच्चों द्वारा भेंट किये आम के पौधे को रोपा CM ने

श्री चौहान के साथ संगिनी संस्था के सदस्यों ने पौध-रोपण किया


भोपाल: शनिवार, 20 नवम्बर 2021, 16:16 IST

बच्चों से हमारा वंश चलता है, हमारा परिवार चलता है। बच्चों से ही हमारा स्नेह संसार चलता है लेकिन जीवन का संसार पेड़ पौधों से ही चलता है। पेड़ पौधे ज़िंदगी के लिए बेहद आवश्यक हैं। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि पौध-रोपण को लेकर लोगों में सक्रियता बढ़ रही है। प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर प्रवास के दौरान उन्हें बड़ी संख्या में पौधे भेंट में मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि भेंट में प्राप्त इन पौधों का "पौध बैंक" बनाया जाएगा और इनका उपयुक्त स्थान पर रोपण होगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने स्मार्ट उद्यान में पौध-रोपण के अवसर पर यह बात कही। 

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आज स्मार्ट उद्यान में केसिया-सामिया, करंज और आम का पौधा लगाया। विश्व बाल दिवस के अवसर पर आम का पौधा मुख्यमंत्री श्री चौहान को बच्चों द्वारा भेंट किया था। पौध-रोपण में भोपाल की संगिनी संस्था की श्रीमती बलजीत सलूजा, श्रीमती प्रार्थना मिश्रा तथा सुश्री अपूर्वा सांडिल्य भी शामिल हुई। मुख्यमंत्री श्री चौहान पर्यावरण संरक्षण की गतिविधियों में जन-भागीदारी को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रतिदिन सामाजिक संस्थाओं, स्वयं-सेवी संस्थाओं और व्यक्तिगत स्तर पर इस दिशा में सक्रिय व्यक्तियों के साथ पौध-रोपण करते हैं।

संगिनी संस्था पर्यावरण संरक्षण की गतिविधियों के साथ शासकीय विभागों और स्कूल-कॉलेज टीचर्स के साथ महिला सशक्तीकरण पर प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाती है। संस्था महिला हिंसा केविरूद्ध अभियान, पीड़ित महिलाओं के लिए नि:शुल्क कानूनी सलाह, स्वच्छता, प्लास्टिक के उपयोग को कम करने, घरेलू कामगारों के समूह गठित कर उनके कौशल विकास और उन्हें रोजगार से जोड़ने जैसी गतिविधियों में सक्रिय है। संस्था ने कोरोना की पहली और दूसरी लहर में जागरूकता और आवश्यक सहायता संबंधी विभिन्न गतिविधियाँ संचालित की।

करंज को आयुर्वेदिक चिकित्सा में महत्वपूर्ण माना गया है। करंज का इस्तेमाल धार्मिक कार्यों में भी किया जाता है। केसिया-सामिया भी पर्यावरण और आयुर्वेद की दृष्टि से उपयोगी है।

Monday, September 13, 2021

बुन्देला विद्रोह ने बोये 1857 क्रांति के बीज

भोपाल : 12 सितंबर 2021 को 11:00

 सागर तथा दमोह क्षेत्र पर अंग्रेजों ने कब्जा कर लिया था 

अंग्रेज़ों से भारत की स्वतंत्रता के आंदोलन और विद्रोह के इतिहास को जितना भी खोजा जाए उतना ही कम है। हर खोज में बहुत कुछ नया ही मिलता है। इस आलेख में भी काफी कुछ नया है। पढ़ने पर आपको बहुत सी नई हकीकतें और तथ्य मिलेंगे। देखिए ज़रा एक नज़र। 

कहते हैं कि इतिहास सत्य का अन्वेषण है, लेकिन जब सत्य विजेता-प्रायोजित हो तब हमारे इतिहास के साथ यही समस्या है। इसीलिये जब 7 अप्रैल, 1818 को तत्कालीन ब्रिटिश गवर्नर जनरल के सेक्रेटरी टी.एच. मेडोक ने सागर और दमोह क्षेत्र को हड़पने की गरज़ से ब्रिटिश सरकार को भेजे गये अपने पत्र में निम्नांकित निष्कर्ष निकाला तो वे एकदम झूठ बोल रहे थे। उन्होंने लिखा- "इस क्षेत्र के निवासी पूरी तरह शांत हैं और ब्रिटिश सरकार की छत्र- छाया में रखे जाने की संभावना से बेहद खुश हैं।"

यथार्थतः स्थिति एकदम उलट थी क्योंकि इस इलाके के लोग अंदर ही अंदर अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र विद्रोह की रचना रच रहे थे। सन् 1817-18 में अप्पा साहब भोंसले की पराजय के बाद मराठों का पराभव हो चुका था और सागर तथा दमोह क्षेत्र पर अंग्रेजों ने कब्जा कर लिया था। दस मार्च, 1818 को अंग्रेजों ने समस्त चौधरियों, कानूनगो, जमींदारों और इलाके की रियाया के नाम बाकायदा घोषणा जारी करके बता दिया था कि अब से यहाँ अंग्रेजी राज कायम हो गया है। यही वह इलाका था जिसे अंग्रेजों ने 'सागर और नर्मदा क्षेत्र' घोषित किया था तथा जिसमें जबलपुर, मंडला, सिवनी, बैतूल, होशंगाबाद, नरसिंहपुर, सागर और दमोह जिले आते थे। इसी क्षेत्र में सन् 1857 की क्रांति के 15 साल पहले सन् 1842 में जो विद्रोह हुआ उसे ही 'बुन्देला विद्रोह' का नाम दिया गया है। यद्यपि इसे बुन्देला विद्रोह कहा गया किन्तु इसमें क्षेत्र के ठाकुरों के अलावा गोंड आदिवासियों, लोधियों, कुर्मियों आदि ने भी सक्रिय भाग लिया।

यह विद्रोह बुनियादी रूप से अंग्रेजों द्वारा लागू की गई उस शोषणकारी भूमि व्यवस्थापन नीति के विरुद्ध था जिसमें लगान की दरें पाँच से पंद्रह गुना तक कर दी गई थीं। ये दरें तो भूमिपतियों पर भी भारी पड़ रही थीं। बड़ी संख्या में छोटे-बड़े किसानों को बेदखल कर दिया गया। जागीरदारों-जमींदारों का अपमान किया गया। अंग्रेजों द्वारा नियुक्त अफ़सरों ने मनमाने अत्याचार किये। परंपरागत पंचायत व्यवस्था ध्वस्त कर दी गई। नई न्यायिक व्यवस्था उन अंग्रेज अफ़सरों के हाथ में थी जो फिलहाल स्थानीय बोली तो क्या हिन्दी-उर्दू से भी अनभिज्ञ थे। विदेशी शासकों ने सदियों से स्थापित धार्मिक-सामाजिक संस्थाओं को समाप्त कर दिया था। ब्रिटिश शासकों ने यहाँ जिस तरह का प्रशासन स्थापित किया उसकी निरंकुशता पर प्रकाश डालने के लिये स्वयं आर. एम. बर्ड की रिपोर्ट का वह उद्धरण काफी है जो 'बर्ड्स रिपोर्ट ऑन द सागर एंड नर्मदा टेरिटरीज़' से लिया गया है - "प्रत्येक जिले का प्रशासन उसके प्रभारी अधिकारी की मनमर्जी से चलता था। सारा इलाका कमिश्नर के स्व-विवेक पर निर्भर था। जो कभी-कभी सनक और स्वेच्छाचार के सीमान्त छू लेता था।" बाद में इस विद्रोह के कारणों की जाँच करके उस पर रिपोर्ट देने के लिये कर्नल स्लीमेन नियुक्त हुए। उन्होंने साफ कबूल किया- "एक कमज़ोर तथा लोलुप सरकार के कारण अव्यवस्थाएँ फैल गई, सरकार सिर्फ ताकतवर के ही अधिकार का सम्मान कर सकती थी। इसलिये ताकत की अभिव्यक्ति लूटमार में होने लगी, यह उन प्रमुख कारणों में से एक था जिनके कारण सागर-दमोह संभाग में विद्रोह हुआ।" अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह की शुरुआत सागर के उत्तर में नारहट के बुन्देला ठाकुरों ने 8 अप्रैल 1842 को ब्रिटिश पुलिस पर हमला कर की। इन लोगों ने समीपस्थ मालथौन, खिमलासा और गढ़ाकोटा पर कब्जा करने के लिए अभियान शुरू किया।

सागर के ब्रिटिश अफसर एम.सी. ओमन्नी ने नारहट के ढोकुल सिंह के अलावा राव विजय बहादुर, मधुकर शाह आदि को सागर बुलवाया। राव विजय बहादुर ओमन्नी से मिले लेकिन कोई हल नहीं निकला। अगले दो दिनों में विद्रोहियों ने नारहट और खिमलासा पर कब्जा कर लिया। नारहट में मजबूत गढ़ी थी और खिमलासा तो पूरी तरह किलेबंद था। यह विद्रोह आसपास के एक दर्जन से भी अधिक स्थानों पर फैल गया। यद्यपि शाहगढ़ के राजा अर्जुन सिंह ने अंग्रेजों की सहायता की लेकिन विद्रोही भारी पड़ने लगे थे। बुन्देलखंड के अंग्रेज पॉलिटिकल एजेन्ट एस. फ्रेजर ने रिपोर्ट दी "हमारे सवारों और पुलिस की हत्या का निर्विवाद तथ्य यह है कि हमारी सीमाओं पर बुन्देला ठाकुरों के बीच गंभीर असंतोष है, आम जनता इनके साथ है, हमने विद्रोह को प्रारंभ में हलके में लेने की गलती की।" उल्लेखनीय है कि नारहट की लड़ाई में बुन्देले अंग्रेजों पर इतने भारी पड़े थे कि कैप्टेन राल्फ वहीं मारा गया था। नरियावली और खुरई भी विद्रोहियों की लपेट में थे।

अंग्रेजों को विद्रोह की गंभीरता का अहसास बहुत बाद में हुआ। उन्होंने नागपुर से लेफ्टिनेंट कर्नल वाटसन के नेतृत्व में एक फील्ड फोर्स भेजी और बुन्देलखंड लीजियन तथा सीपरी कंटिन्जेन्ट के अलावा भोपाल से भी एक फौंजी टुकड़ी को विद्रोह दबाने हेतु भेजा। दरअसल बीना नदी के तट पर बुन्देला ठाकुरों ने एक बड़ा संघ बना लिया था, लेकिन 'समीपस्थ रियासतों ने अंग्रेजों की मदद की।

जवाहर सिंह, मधुकर सिंह, गणेशजू तथा विक्रमजीत के नेतृत्व में विद्रोहियों ने संगठित होकर जून 1842 के प्रथम सप्ताह में अंग्रेजों से बिनेका तहसील के बर्रा ग्राम में भीषण युद्ध किया। नौ जून को पंचमनगर के पास पुन: कैप्टन मेकिन्टोश के नेतृत्व में अंग्रेजों ने विद्रोहियों को घेरा। अंग्रेजों को ऐसा लगा कि देशी पुलिस इन लोगों के विरूद्ध कोई ठोस कार्यवाही नहीं कर रही है। अतः 9 जुलाई, 1842 को फ्रेजर ने एक घोषणा करके देशी सैनिकों को बहुत लालच दिये। उसने बिनेका के तहसीलदार रामचंद्र राव को बर्खास्त कर दिया। बारह जुलाई को फ्रेजर शाहगढ़ के राजा बखतबली शाह से मिला और विद्रोह दबाने में उसकी सहायता मांगी। लेफ्टिनेंट गवर्नर के सेक्रेटरी हेमिल्टन ने लिखा कि-'अगर राजा को ब्रिटिश संरक्षण चाहिये तो वह विद्रोह को दबाकर सिद्ध करे कि वह ऐसा संरक्षण पाने योग्य है।'

जुलाई और अगस्त 1842 में भी सागर क्षेत्र विद्रोहियों की चपेट में रहा। यद्यपि कैप्टेन ओ. ब्रियेन ने विद्रोहियों के खिलाफ अनेक अभियान किये लेकिन अंग्रेजों का विरोध बराबर जारी रहा। अगस्त 1842 में बहरोल के पास विद्रोहियों से मुठभेड़ में ले. हर्बर्ट बुरी तरह घायल हो गया। जिस गोली से वह घायल हुआ था वह बहरोल के लोधी प्रमुख ठा. मलखान सिंह की हवेली से आई थी।

सितंबर 1842 तक जबलपुर भी विद्रोह की चपेट में आ गया। यहाँ हीरापुर के राजा हिरदेशाह विद्रोहियों के नायक थे। उनके पास लगभग 15 हजार सशस्त्र सैनिक थे और बारह हजार रुपये की लगान माफी थी। उन्होंने नर्मदा और हिरण नदियों में नावों पर कब्जा कर लिया तथा हीरापुर से अंग्रेजों का सम्पर्क काट दिया। हीरापुर नगर नर्मदा और हिरण के संगम पर था। राजा के पास तोपे भी थी। आसपास के अनेक ठाकुर राजा से मिल गये थे। जन. थाम्ब के मातहत अनेक फौजी टुकड़ियों ने हिरदेशाह के खिलाफ़ मुहिम चलाई, लेकिन वे उनके हाथ नहीं आये। कंप्टेन क्लेमेन्ट ब्राउन ने लिखा है कि 'अस्थायी रूप से ही सही लेकिन राजा ने नर्मदा पर स्थित नरसिंहपुर, सागर और जबलपुर के बड़े भाग पर हमारी सत्ता उखाड़ फेंकी थी।" नरसिंहपुर में खजाने की रक्षा करने में के. मेक्लाड को पसीने छूट गये थे। हीरापुर के पास सांकल में दशहरा उत्सव के दौरान अंग्रेजों को खूब छकाया। ऐसा लगता था कि विद्रोही बरमान घाट की नावों पर भी कब्जा करने वाले हैं।

होशंगाबाद जिले की नर्मदा घाटी में लोधी प्रमुखों ने भीषण विद्रोह कर दिया। इस क्षेत्र के प्रमुख नेताओं में मदनपुर के देहलन सिंह गोंड, धिलवार के नटवर सिंह गोंड, घुघरी के नटवर सिंह लोधी, नदिया के अजीत सिंह लोधी, सुआवला के रणजोर सिंह बुन्देला और सावंत सिंह एवं देवरी के ठाकुर शिवराज सिंह उल्लेखनीय हैं। इन लोगों ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण तेंदूखेड़ा पर कब्जा कर लिया। होशंगाबाद जिले के सोहागपुर सब-डिवीजन की रक्षा करना अंग्रेजों के लिये असंभव था।

जब विद्रोह बहुत फैल गया तो अंग्रेजों ने कई सैनिक टुकड़ियों को एकत्रित करके विद्रोह को दबाने की कोशिश की। नागपुर फोर्स के कमांडर ले.क. वाटसन ने 28 अक्टूबर, 1842 को हीरापुर पहुँचकर राजा हिरदेशाह और उनके साथियों को किला छोड़ने पर मजबूर कर दिया। फ्रेजर ने हिरदेशाह की गिरफ्तारी के लिये दो हजार रुपये के इनाम की घोषणा कर दी। तीस अक्टूबर को हथियारबंद गोंडों ने अंग्रेजों को सोनखेड़ा ग्राम में खूब छकाया। पाँच नवंबर, 1842 को गोंड सरदार देहलन सिंह और नटवर सिंह ने होशंगाबाद के थिलवार जंगल पर कब्जा कर लिया और असिस्टेंट कमिश्नर हग फ्रेंजर को घायल कर दिया। उस क्षेत्र में दो फ्रेजर कार्यरत थे- एक था एच. फ्रेजर और दूसरा था एस. फ्रेजर। यद्यपि घायल फ्रेंजर को अंग्रेज निकाल ले गये किंतु 10 नवंबर, 1842 को उसकी मृत्यु हो गई।

राजा हिरदेशाह बुन्देलखंड की कई रियासतों में गये और उन्हें अंग्रेजों के विरुद्ध गोलबंद करने की कोशिशें की। नवंबर 1842 के अंत तक अंग्रेजों ने होशंगाबाद और नरसिंहपुर जिलों में आंशिक रूप से विद्रोह को दबा दिया था। विद्रोही सरदारों में फूट डाली गई तथा एक का इलाका जब्त करके दूसरे को दे दिया जिसने अंग्रेजों की सहायता की थी। विद्रोही वनों में छिपकर छापामार युद्ध करते रहे। अंग्रेजों ने नृशंस दमन की नीति अपनाई। भोपाल, ग्वालियर और रीवा रियासतों ने अंग्रजों की सहायता की। इंदौर स्थित अंग्रेज रेजीडेन्ट सर सी.एम. वेडे तथा भोपाल स्थित पॉलिटिकल एजेन्ट कैप्टेन ट्रेवलिन ने आपसी सहयोग से विद्रोहियों पर दबिश बनाये रखी। मेजर जनरल टाम्बस तथा मेजर स्लीमेन को विद्रोहियों, उनके सहायकों आदि की शक्ति तथा पते-ठिकानों की सूची बनाकर दमन करने को कहा गया। स्लीमेन ने सर्वप्रथम हीरापुर के हिरदेशाह पर ध्यान केन्द्रित किया। सत्रह नवंबर, 1842 को अंग्रेजों ने एक घोषणा जारी करके विद्रोहियों से हथियार डालकर आत्म-समर्पण करने को कहा। चौबीस नवंबर को एक और घोषणा करके विद्रोहियों को जिंदा-मुर्दा पकड़वाने के लिये इनाम घोषित किये गये। ये इनाम 200 रुपये से लेकर 2000 रुपये तक के थे। 19 दिसंबर, 1842 को एक और घोषणा जारी की गई जिसमें हीरापुर के राजा हिरदेशाह, चंद्रपुर के दीवान जवाहर सिंह तथा जैतपुर के अपदस्थ राजा परीछत सिंह की गिरफ्तारी पर दस-दस हजार की रकम घोषित कर दी गई।

इस कार्यवाही का परिणाम अंग्रेजों के हित में रहा। 22 दिसंबर, 1842 को, उक्त घोषणा के मात्र तीन दिन बाद शाहगढ़ के बखतबली शाह ने हीरापुर के राजा हिरदेशाह को गिरफ्तार करवा दिया जब वे अपने दल के साथ जेतपुर से सागर रहे थे। इन बंदियों को दमोह के रास्ते बनारस के पास चुनार भेजा गया जहाँ इनकी जिम्मेदारी चुनार जेल के निर्दयी कमांडन्ट कर्नल चार्ल्स पुले को सौंपी गई। मेजर स्लीमेन ने आदेश दिया कि जब हिरदेशाह और उनके साथियों को दमोह से निकाला जाए तो उसका ऐसा खासा प्रदर्शन हो जिसे सारे दमोहवासी देखे और किसी के मन में यह शंका न रहे कि हिरदेशाह की गिरफ्तारी हुई है या नहीं। अब अंग्रेजों ने विद्रोहियों में फूट डालने की एक और चाल चली। गवर्नर जनरल लार्ड एलेनब्रो चुनार जेल जाकर हिरदेशाह से मिला और उसे ऐसी शर्तों पर माफ करके राज लौटाया ताकि एक तो वह आजीवन अंग्रेजों का अधीनस्थ रहे और दूसरे कोई भी विद्रोही अब उसका विश्वास न करे। अंग्रेजों ने आत्म-समर्पण करने वाले अधिकांश विद्रोहियों को सब तरह से असहाय और निर्बल बनाकर माफी दे दी। लेकिन बुन्देला विद्रोह शुरू करने वाले नारहट के मधुकर शाह को सार्वजनिक रूप से सागर जेल में फाँसी दे दी। जेल के पीछे ही उनका दाह संस्कार कर दिया गया। वहाँ एक चबूतरे का निर्माण किया गया है। गोपालगंज के लोग आज भी स्वाधीनता संग्राम के इस शहीद के प्रति निरंतर श्रद्धा-सम्मान व्यक्त करते हैं। मधुकर शाह के साथ उन्हीं की बहन ने विश्वासघात करके उन्हें सोते समय गिरफ्तार करवा दिया था। मधुकर शाह के उन्नीस वर्षीय भाई गणेशजू को देश निकाले का दंड दिया गया।

अगस्त 1845 तक बुन्देला विद्रोह समाप्त हो गया। यद्यपि दमन और माफी की नीति से अंग्रेजों ने इसे फिलहाल खत्म कर दिया, लेकिन इस विद्रोह ने ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध असंतोष की जो चिंगारी दहकाई वह ज्वाला बनकर मात्र 15 साल बाद सन् 1857 के सशस्त्र स्वाधीनता संग्राम के रूप में भड़की। याद रहे कि सन् 1842 का बुन्देला विद्रोह स्वतंत्रता महायज्ञ में मध्यप्रदेश की प्रथम आहुति था। स्थिति का व्यंग्य देखिये कि जिन राजा बखतबली और ठाकुर मर्दन सिंह ने 1842 में अंग्रेजों का साथ दिया उन्हीं ने 1857 के विद्रोह में अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिये। इन दोनों को जनवरी 1858 में आजन्म कारावास की सजा देकर मथुरा जेल में रखा गया। (जनसम्पर्क विभाग  मध्यप्रदेश  सरकार से साभार)

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार है।)

Saturday, September 11, 2021

राष्ट्रीय वन शहीद दिवस

Saturday: 11th September 2021 at 17:45 IST

वन्य-प्राणियों की रक्षा में शहीद हुए 3 वन कर्मियों के परिजन सम्मानित

सम्मान समारोह में एक-एक लाख रूपये के चेक और प्रशस्ति-पत्र किये गये भेंट

भोपाल: शनिवार: 11 सितम्बर 2021 (मध्यप्रदेश स्क्रीन ब्यूरो):: 


कई बार वन और वन-प्राणियों की रक्षा करते हुए होने वाले हिंसक टकराव केवल फ़िल्मी कहानियां नहीं होतीं। वे सच में घटित होते हैं। वन की ज़िंदगी शांत होने के बावजूद उन लोगों की वजह से अशांत होती रहती है जिनकी बुरी नज़र वन सम्पदा पर होती है। इन हिंसक लोगों का सामना करते करते कई बार वन कर्मी शहीद भी हो जाते हैं। कभी कभी वन में भयंकर आग लग जाती है तो उस समय भी उस आग को नियंत्रित करते करते अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं। इसी तरह के शहीदों को नमन किया है मध्यप्रदेश सरकार ने इन शहीदों के परिजनोंसम्मानित भी किया और वित्तीय सहायता भी दी। 

प्रधान मुख्य वन्य संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री रमेश कुमार गुप्ता ने कहा है कि वन विभाग के वनकर्मी प्रदेश के जंगलों की सुरक्षा और वन्य-प्राणियों के संरक्षण कार्य में अपने प्राणों की आहूति देकर कर्त्तव्य-परायणता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते है। ऐसे शहीद वनकर्मियों के बलिदान पर विभाग फक्र करता है। श्री गुप्ता राष्ट्रीय वन शहीद दिवस के मौके पर चार इमली स्थित वन विश्राम गृह परिसर में कर्त्तव्य के दौरान शहीद वनकर्मियों के परिजन को सम्मानित कर रहे थे।  

कार्यक्रम में तीन शहीद वनकर्मियों के परिजन को एक-एक लाख रूपये का चेक और प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया। प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) श्री आलोक कुमार सहित वन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी मौजूद थे।

शहीद वनकर्मी

शहीद मदन लाल वर्मा: वन मण्डल देवास में वन रक्षक के पद पर कार्यरत श्री मदनलाल वर्मा 4 फरवरी 2021 को वन क्षेत्र की पुंजापुरा परिक्षेत्र की बीट रतनपुर में वन्य-प्राणी शिकारियों से हुई मुठ-भेड़ के दौरान गोली लगने से वीरगति को प्राप्त हुए थे। वन मण्डलाधिकारी देवास ने वनकर्मियों के शहीद दिवस के दिन आज ही रतनपुर बीट का नाम शहीद मदनलाल वर्मा के नाम रखे जाने के आदेश जारी किए हैं।

शहीद राज परीक्षित सतपुड़ा टाइगर रिजर्व होशंगाबाद में वन रक्षक के पद पर कार्यरत श्री राज परीक्षित भट्ट 5 मई 2021 को वन क्षेत्र में हुई अग्नि दुर्घटना को नियंत्रित करने के प्रयासों के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए थे।

शहीद सूर्यप्रकाश ऐडे: वन मण्डल बालाघाट में वन रक्षक के पद पर कार्यरत रहे श्री सूर्यप्रकाश ऐडे वन क्षेत्र में 12 अप्रैल 2021 को हुई अग्नि दुर्घटना को नियंत्रित करने के प्रयास में वीरगति को प्राप्त हुए थे।

Monday, August 2, 2021

बहुत से लोगों के अच्छे दिन आए हैं मध्यप्रदेश में

  मुख्यमंत्री पथ विक्रेता योजना से बदली खूबीलाल तोश की ज़िंदगी 


भोपाल: 31 जुलाई 2021: (मध्यप्रदेश स्क्रीन ब्यूरो)::

मुख्यमंत्री पथ विक्रेता योजना उन लोगों के लिए लाईफ-लाईन साबित हो रही है जो आशा छोड़ चुके हैं। गरीबी   ने जिन्हें निराश और हताश कर दिया है। कोई छोटा रोजगार करने वाले परिवारों को फिर से आत्मनिर्भर बनाने में कारगर हो रही है यह विशेष योजना।  

लाभ उठाने वाले लोगों में से एक हैं श्री खुबीलाल साहू। तोष और ब्रेड बेचने का काम करते थे पर बहुत मेहनत से किये इस काम से भी परिवार का भरण पोषण बमुश्किल से ही हो पाता था। गरीब पीछा न छोड़ती। जेब खली की खली रहती थी। फिर उन्हें मुख्यमंत्री पथ विक्रेता योजना का पता चला और उन्होंने भी इस योजना का लाभ लिया। अब उनका काम और परिवार का खर्चा अच्छे से चल रहा है। यह स
च्ची कहानी बयां की है विकासखंड बैरसिया के ग्राम सौहाया निवासी श्री खुबीलाल साहू ने। अब खूबी लाल साहू  आ रहे हैं। 

 इस के यादें बताते हुए श्री साहू बताते हैं कि मैं पहले तोष और ब्रेड बेचने का काम करता था पर इस काम से भी परिवार का भरण पोषण करने में दिक्कतें आती थी। मुझे मेरे परिचित द्वारा मुख्यमंत्री पथ विक्रेता योजना के बारे में जानकारी दी गई। मैने योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन किया और मुझे बैंक द्वारा मुख्यमंत्री पथ विक्रेता योजना के तहत रूपये 10 हजार की राशि व्यवसाय आरंभ करने के लिए दी गई। इस राशि के आने से ही जैसे लक्ष्मी  कृपा बरसनी शुरू हो गई। अच्छे दिनों ने दस्तक डी दी उनके घर द्धार पर। 

साहू ने बताया कि मुख्यमंत्री पथ विक्रेता योजना की राशि मिलने के बाद मैंने किराना की दुकान खोल ली और अब धीरे-धीरे मेरी किराने की दुकान अच्छी चल रही है। परिवार का पालन पोषण भी अच्छे से हो रहा है। श्री साहू मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का धन्यवाद करते हुए कहते हैं कि शासन की ऐसी योजनाएं हमारे जैसे लोगों के लिए बहुत सहारा बन रही है। इसी तरह बहुत से लोगों ने अच्छे दिनों का मुँह देखा है। 


अब देखना है कि
कितनी जल्दी प्रदेश के सभी कमज़ोर वर्गों से जुड़े लोगों के अच्छे दिन इसी तरह की योजनाओं से आ पाते हैं। घर घर में खुशहाली कितनी जल्दी नज़र आने लगती है। 

Friday, March 19, 2021

65 लाख रूपये की नल-जल योजना का भूमि-पूजन

Thursday: 18th March 2021 at 20:23 IST

  भूमि-पूजन किया परिवहन मंत्री श्री गोविन्द सिंह राजपूत ने  


भोपाल
: गुरूवार: 18 मार्च 2021: (मध्यप्रदेश स्क्रीन ब्यूरो):: 

आज़ादी आने  सात दश्कों के बावजूद भी  अभी बहुत से इलाके ऐसे हैं जहां  पानी की गंभीर किल्लत लगातार  गंभीर बनी हुई है। घर परिवार की   महिलाओं को बाहर से पानी लाना पड़ता है। इस तरह  दुनिया  में कई जगहों पर पानी की किल्लत गंभीर बानी हुई है। इसी तरह की समस्या मध्यप्रदेश में भी है। मध्यप्रदेश की सरकार इस समस्या को कैसे हल कर रही है इसकी एक छोटी सी झलक आपको मिलेगी  हमारी इस रिपोर्ट में। मध्यप्रदेश स्क्रीन की इस पोस्ट में पढ़िए पूरी रिपोर्ट। 

परिवहन एवं राजस्व मंत्री श्री गोविन्द सिंह राजपूत ने सागर के ग्राम गेहलपुर एवं कंदेला में 65 लाख की नल-जल योजना का भूमि-पूजन किया। उन्होंने कहा कि इस पेयजल योजना से घर-घर तक पानी पहुँचेगा। पहाड़ी पर बसे इस गाँव की महिलाओं को अभी पेयजल के लिये काफी मशक्कत करना पड़ती है। श्री राजपूत ने कहा कि सुरखी क्षेत्र का एक भी घर ऐसा नहीं बचेगा, जिस घर में जल नल से नहीं आये। उन्होंने कहा राज्य सरकार पात्र लोगों के आयुष्मान-कार्ड बनवा रही है, गाँव के लोग अपना आयुष्मान-कार्ड बनवा लें। इस योजना में 5 लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त में होता है। उन्होंने कोरोना से बचाव के लिये चलाये जा रहे वैक्सीन अभियान में शामिल होने की अपील की।

साकार हुआ अपने घर का सपना

मंत्री श्री राजपूत ने प्रधानमंत्री आवास योजना में गृह-प्रवेश का शुभारंभ एवं हितग्राहियों को प्रमाण-पत्र वितरित किये। उन्होंने कहा कि गरीब आदमी के लिए पक्के मकान की सोच एक सपना होता था, लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस सपने को साकार किया है। वर्ष 2022 तक सभी के पास पक्के मकान होंगें, यह जिम्मेदारी हमारी सरकार की है। मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि सुरखी क्षेत्र में 25 साल पहले सड़कें नहीं थी। गेंती-फावड़ा लेकर क्षेत्र में आना पड़ता था। अब ऐसा कोई गाँव नहीं, जहाँ सड़क न हो। गेहलपुर से पिपरिया मार्ग एक करोड़ रुपये की लागत से मंजूर किया था, जिसका कार्य चल रहा है। ग्राम भजिया एवं गेहूँरास में सभी विकास कार्य प्रगति पर हैं।

आदर्श स्कूल की होगी स्थापना

मंत्री श्री राजपूत ने कहा कि क्षेत्र की जनता के लिये मैं मंत्री नहीं, एक सेवक और परिवार का सदस्य हूँ। उन्होंने कहा कि सरकार नया सिस्टम ला रही है, जिसमें 20 से 25 कि.मी. के दायरे में इतना भव्य आदर्श स्कूल बनेगा, जो किसी प्राईवेट स्कूल से बेहतर होगा। स्कूल में अच्छे अध्यापकों सहित खेल व बच्चों के आने-जाने के लिए वाहनों की व्यवस्थाएँ भी रहेंगी। इससे गाँव के बच्चों को भी शहरों जैसे स्कूल में पढ़ने को मिलेगा। स्वामित्व योजना से गाँव में सभी को मकान का स्वामित्व मिलेगा, जिससे घर मालिक को मिलेगी घर की हकदारी। इस दौरान उन्होंने लाड़ली लक्ष्मी योजना के प्रमाण-पत्र एवं मध्यान्ह भोजन योजना अंतर्गत राशन वितरण भी किया।

यदि आपके पास पानी की किल्लत दूर करने के लिए कुछ ठोस सुझाव हों तो हमें अवश्य बताएं। विचारों की इंतज़ार रहेगी ही। 

मुकेश दुबे


Saturday, December 19, 2020

नए कृषि कानूनों से बिचौलियों में हड़कंप- मंत्री पटेल का दावा

Saturday, 19th December 2020 at 20:11 IST

  हरदा के ग्राम धुरगाड़ा में विधेयकों के समर्थन में चौपाल आयोजित 

भोपाल: 19 दिसम्बर 2020:, (मध्यप्रदेश स्क्रीन ब्यूरो)::

भारतीय जनता पार्टी की तरफ से किसानों के आंदोलन का मुकाबला जारी है। इस मकसद के लिए चौपालों का अयिजन भी किया जा रहा है। हाल ही में एक चौपाल हरदा के गांव धुरवाड़ा में भी आयोजित की गई जिसमें किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री श्री कमल पटेल भी पहुंचे। 

किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री श्री कमल पटेल ने कहा है कि नवीन कृषि कानूनों से बिचौलियों में हड़कंप मचा है। उन्होंने कहा कि अब तक बिचौलिए किसानों के लाभ को हजम कर जाते थे। इन कानूनों के आने के बाद किसानों को उनका वाजिब हक मिलेगा। श्री पटेल ने यह बात हरदा जिले के ग्राम धुरगाड़ा में नवीन कृषि विधेयकों के समर्थन में आयोजित किसान चौपाल में कहीं।

मंत्री श्री पटेल ने नए कृषि विधेयकों के समर्थन में आयोजित चौपाल में कहा कि विधेयक किसानों के हित में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा लाए गए हैं। इनसे किसानों की आय बढ़ेगी। खेती का उन्नत स्वरूप विकसित होगा। गांव में कृषि आधारित अधोसंरचनात्मक विकास होगा। किसान अपने उद्योग खुद लगा सकेंगे।   वे किसान के साथ-साथ उद्योगपति भी बन सकेंगे। श्री पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के संबोधन से किसानों में सकारात्मकता का भाव आया है। किसान अब आगे बढ़कर नवीन कृषि विधेयकों का समर्थन कर रहे हैं। ग्राम धुरगाड़ा में भी किसानों ने नारे लगाए कि वे नवीन कृषि विधेयकों के मामले में केंद्र और प्रदेश सरकार के साथ हैं। उनका पूरा- पूरा समर्थन नवीन कृषि विधेयकों के लिए है।

           किसान चौपाल में मंत्री श्री पटेल ने किसानों को आश्वस्त किया कि मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्र में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार किसानों की आय को न सिर्फ दुगुना करेगी बल्कि किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त और समृद्ध बनाने का हर मुमकिन प्रयास करेगी।


Saturday, October 31, 2020

राष्ट्रीय एकता दिवस के उपलक्ष में आयोजित मार्चपास्ट

 देशभक्ति गीतों की धुनों से बना विशेष माहौल 


सागर
: 31 अक्टूबर 2020: (मध्य प्रदेश स्क्रीन ब्यूरो)::

सरदार बल्लभ भाई पटेल की जयंती के अवसर पर शनिवार को स्थानीय पुलिस प्रशिक्षण मैदान में राज्य पुलिस और अन्य वर्दीधारी बलों तथा अन्य एजेन्सियों द्वारा भव्य मार्चपास्ट का आयोजन किया गया। जिसमें देशभक्ति गानों की धुनें प्रस्तुत की गई। इस अवसर पर कलेक्टर श्री दीपक सिंह, पुलिस अधीक्षक श्री अतुल सिंह, नगर निगम कमिश्नर श्री आरपी अहिरवार नगर दण्डाधिकारी श्री प्रकाश नायक, डीआईजी श्री वर्मा, उपायुक्त डॉ. प्रणय कमल खरे सहित अन्य अधिकारी कर्मचारी मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन श्री अरविन्द जैन ने किया।  

Saturday, October 24, 2020

यह बीसवीं-इक्कीसवीं सदी है किसकी !!

 Friday: 23rd  October 2020 at 13:12 IST

  विख्यात गांधीवादी चिंतक और इतिहासकार धर्मपाल की पुण्यतिथि 24 अक्टूबर पर विशेष आलेख  


भोपाल
: 23 अक्टूबर 2020: (मध्यप्रदेश स्क्रीन ब्यूरो)::

पृथ्वी के कष्टों का निवारण करने के लिए अवतार-पुरूष जन्म लिया करते हैं, यह मान्यता भारतवर्ष में अत्यन्त प्राचीन समय से चली आ रही है। इसलिए 1915 में भारत के लोगों ने सहज ही यह मान लिया कि भगवान ने उनका दु:ख समझ लिया है और उस दु:ख को दूर करने के लिए व भारतीय जीवन में एक नया संतुलन लाने के लिए महात्मा गाँधी को भेजा गया है। गाँधीजी के प्रयासों से भारतीय सभ्यता की दास्तान का दु:ख बहुत कुछ कट ही गया, लेकिन भारतीय जीवन में कोई संतुलन नहीं आ पाया। गाँधीजी 1948 के बाद जीवित रहते तो भी इस नए संतुलन के लिए तो कुछ और ही प्रयत्न करने पड़ते।

जो काम महात्मा गाँधी पूरा नहीं कर पाए उसे पूरा करने के प्रयास हमें आगे-पीछे तो आरंभ करने ही पड़ेंगे। आधुनिक विश्व में भारतीय जीवन के लिए भारतीय मानव व काल के अनुरूप कोई नया संतुलन ढूँढें बिना तो इस देश का बोझ हल्का नहीं हो पाएगा और उस नए ठोस धरातल को ढूँढने का मार्ग वही है जो महात्मा गांधी का था। इस देश के साधारणजन के मानस में पैठकर, उसके चित्त व काल को समझकर ही, इस देश के बारे में कुछ सोचा जा सकता है।

पर शायद हमें यह आभास भी है कि भारतीय चित्त वैसा साफ-सपाट नहीं है जैसा मानकर हम चलना चाहते हैं। वास्तव में तो वह सब विषयों पर सब प्रकार के विचारों से अटा पडा़ है और वे विचार कोई नए नहीं हैं। वे सब पुराने ही है। शायद ऋग्वेद के समय से वे चले आ रहे है या शायद गौतम बुद्ध के समय से कुछ विचार उपजे होंगे या फिर महावीर के समय से। पर जो भी ये विचार है जहां से भी वे आए हैं वे भारतीय मानस में बहुत गहरे बैठे हुए हैं। और शायद हम यह बात जानते हैं। लेकिन हम इस वास्तविकता को समझना नहीं चाहते। इसे किसी तरह नकार कर भारतीय मानस व चित्त की सभी वृत्तियों से आंखे मूंदकर अपने लिए कोई एक नई दुनिया हम गढ़ लेना चाहते हैं।

इसलिए अपने मानस को समझने की सभी कोशिशें हमें बेकार लगती हैं। अठारहवीं-उन्नीसवीं सदी के भारत के इतिहास का मेरा अध्ययन भी भारतीय मानस को समझने का एक प्रयास ही था। उस अध्ययन से अंग्रेजों के आने से पहले के भारतीय राज-समाज की भारत के लोगों के सहज तौर-तरीकों की एक समझ तो बनी। समाज की जो भौतिक व्यवस्थाएं होती है, विभिन्न तकनीकें होती है, रोजमर्रा का काम चलाने के जो तरीके होते हैं, उनका एक प्रारूप-सा तो बना पर समाज के अंतर्मन की उसके मानस की चित्त की कोई ठीक पकड़ उस काम से नहीं बन पाई। मानस को पकड़ने का, चित्त को समझने का मार्ग शायद अलग होता है।

हममें से कुछ लोग शायद मानते हों कि वे स्वयं भारतीय मानस, चित्त व काल की सीमाओं से सर्वथा मुक्त हो चुके हैं। अपनी भारतीयता को लाँघकर वे पश्चिमी आधुनिकता या शायद किसी प्रकार की आदर्श मानवता के साथ एकात्म हो गए है। ऐसे कोई लोग है तो उनके लिए बीसवीं सदी की दृष्टि से कलियुग को समझना और भारतीय कलियुग को पश्चिम की बीसवीं सदी के रूप में ढालने के उपायों पर विचार करना संभव होता होगा, पर ऐसा अक्सर हुआ नहीं करता। अपने स्वाभाविक देश-काल की सीमाओं-मर्यादाओं से निकालकर किसी और के युग में प्रवेश कर जाना असाधारण लोगों के बस की भी बात नहीं होती। जवाहरलाल नेहरू जैसों से भी नहीं हो पाया होगा। अपनी सहज भारतीयता से पूरी तरह मुक्त वे भी नहीं हो पाए होंगें। महात्मा गाँधी के कहने के अनुसार भारत के लोगों में जो एक तर्कातीत और विचित्र-सा भाव है, उस विचित्र तर्कातीत भाव का शिकार होने से जवाहरलाल नेहरू भी नहीं बच पाए होगें फिर बाकी लोगों की तो बात ही क्या। वे तो भारतीय मानस की मर्यादाओं से बहुत दूर जा ही नहीं पाते होंगे।

भारत के बड़े लोगों ने आधुनिकता का एक बाहरी आवरण सा जरूर ओढ़ रखा है। पश्चिम के कुछ संस्कार भी शायद उनमें आए है। पर चित्त के स्तर पर वे अपने को भारतीयता से अलग कर पाए हो, ऐसा तो नहीं लगता। हां, हो सकता है कि पश्चिमी सभ्यता के साथ अपने लंबे और घनिष्ठ संबंध के चलते कुछ दस-बीस-पचास हजार, या शायद लाखों लोग, भारतीयता से बिल्कुल दूर हट गए हों। पर यह देश तो दस-बीस-पचास हजार या लाख लोगों का नहीं है। यह तो 125 करोड़ अस्सी करोड़ लोगों की कथा है।

भारतीयता की मर्यादाओं से मुक्त हुए ये लाखों आदमी जाना चाहेंगें तो यहाँ से चले ही जाएँगे। देश अपनी अस्मिता के हिसाब से अपने मानस, चित्त व काल के अनुरूप चलने लगेगा तो हो सकता है इनमें से भी बहुतेरे फिर अपने सहज चित्त-मानस में लौट आएँ। जिनका भारतीयता से नाता पूरा टूट चुका है, वे तो बाहर कही भी जाकर बस सकते हैं। जापान वाले जगह देंगे तो वहाँ जाकर रहने लगेंगे। जर्मनी में जगह हुई जर्मनी में रह लेंगे। रूस में कोई सुंदर जगह मिली तो वहाँ चले जाएंगे। अमेरिका में तो वे अब भी जाते ही हैं। दो-चार लाख भारतीय अमेरिका जाकर बसे ही हैं और उनमें बड़े-बड़े इंजीनियर, डॉक्टर, दार्शनिक, साहित्यकार, विज्ञानविद् और अन्य प्रकार के विद्वान भी शामिल है। पर इन लोगों का जाना कोई बहुत मुसीबत की बात नहीं है। समस्या उन लोगों की नहीं जो भारतीय चित्त व काल से टूटकर अलग जा बसे है। समस्या तो उन करोड़ों लोगों की है जो अपने स्वाभाविक मानस व चित्त के साथ जुड़कर अपने सहज काल में रह रहे है। इन लोगों के बल पर देश को कुछ बनाना है तो हमें उस सहज चित्त, मानस व काल को समझना पडे़गा।

भारतीय वर्तमान के धरातल से पश्चिम की बीसवीं सदी का क्या रूप दिखता है, उस बीसवीं सदी और अपने कलियुग में कैसा और क्या संपर्क हो सकता है, इस सब पर विचार करना पडे़गा। यह तभी हो सकता है जब हम अपने चित्त व काल को, अपनी कल्पनाओं व प्राथमिकताओं को और अपने सोचने-समझने व जीने के तौर-तरीकों को ठीक से समझ लेंगे।

(संदर्भ - धर्मपाल समग्र लेखन भाग-1 से साभार)