Friday, February 6, 2026

पीएमएफएमई योजना से लिखी सफलता की कहानी

Posted Dateline Bhopal on Friday 6th February 2026 at 15:17 IST Regarding Success Story 

प्रदेश के युवा विभिन्न उद्योग स्थापित कर बना रहे हैं अपनी पहचान

सरकारी योजना, तकनीकी मार्गदर्शन एवं ईच्छाशक्ति युवाओं के सपने साकार करने में सहायक


भोपाल: शुक्रवार, 6 फरवरी 2026: (DIPR //MP info// मध्यप्रदेश स्क्रीन डेस्क)::

पीएमएफएमई योजना

केन्द्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री सूक्ष्म, खाद्य, उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) का लाभ लेकर बुरहानपुर जिले के युवा उद्यमी श्री अभिषेक जायसवाल ने उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने डिहाइड्रेट यूनिट की स्थापना की है। यह प्रदेश के युवाओं एवं किसानों को खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में स्वरोजगार से जोड़ने की एक महत्वाकांक्षी योजना है। इस योजना का उद्देश्य उद्यमिता को बढ़ावा देना और युवाओं को आर्थिक रूप से आत्म निर्भर बनाना है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में इस योजना का लाभ अधिक से अधिक युवाओं तक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। शासन द्वारा विभागीय मार्गदर्शन, तकनीकी सहायता एवं वित्तीय सहयोग के माध्यम से युवाओं को उद्यम स्थापना हेतु प्रेरित किया जा रहा है, जिससे वे स्वयं का व्यवसाय स्थापित कर रोजगार के नए अवसर सृजित कर सकें।

यूनिट स्थापना से मिली नई पहचान

बुरहानपुर जिले के युवा उद्यमी अभिषेक जायसवाल एक शिक्षित युवा हैं, जिन्होंने एग्रीकल्चर बीएससी तथा एग्रीकल्चर मैनेजमेंट में एमबीए की पढ़ाई की है। शुरू से ही कृषि से जुड़े परिवार से होने के कारण अभिषेक की कृषि से संबंधित कार्य को आगे बढ़ाने में रूचि थी। उद्यानिकी विभाग के सहयोग से प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना द्वारा अभिषेक ने डिहाइड्रेट यूनिट की स्थापना कर मात्र 4 माह में ही लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।

पीएमएफएमई योजना से मिला संबल

अभिषेक जायसवाल बताते हैं कि उद्यानिकी विभाग के माध्यम से उन्हें पीएमएफएमई योजना की जानकारी प्राप्त हुई, जिसके बाद उन्होंने अपने उद्यम की शुरुआत करने का निर्णय लिया। योजना में उन्होंने बैंक से प्राप्त सहायता राशि के माध्यम से माह अक्टूबर 2025 में डिहाइड्रेट यूनिट की स्थापना की। इस यूनिट में मुख्य रूप से प्याज, केला के डिहाइड्रेट उत्पादों को तैयार करते हैं।

क्या है डिहाइड्रेट यूनिट

डिहाइड्रेशन यूनिट एक ऐसी प्रसंस्करण इकाई है, जिसमें फल एवं सब्जियों जैसे प्याज, केला, हल्दी तथा पत्तेदार सब्जियों से कम तापमान पर नमी हटाकर उन्हें सुखाया जाता है। यह प्रक्रिया जल्दी खराब होने वाली खाद्य सामग्री को लंबे समय तक सुरक्षित रखती है और उन्हें फ्लेक्स, चिप्स अथवा पाउडर के रूप में उपयोग योग्य बनाती है।

डिहाइड्रेशन के कारण उत्पाद लम्बे समय तक सुरक्षित रहते हैं, जिससे भंडारण एवं परिवहन आसान और कम खर्चीला हो जाता है। सही तकनीक से सुखाने पर उत्पाद का रंग, स्वाद एवं पोषण तत्व काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं, जिससे ग्राहकों को गुणवत्तापूर्ण एवं पौष्टिक खाद्य उत्पाद उपलब्ध होते हैं।

प्रक्रिया

अभिषेक जायसवाल बताते हैं कि यूनिट में प्याज को डिहाइड्रेट करने के लिए पहले उसका छिलका हटाकर अच्छे से साफ कर कटर मशीन से 1 एमएम स्लाइस बनाए जाते हैं। इन स्लाइसों को क्रेट में भरकर इलेक्ट्रॉनिक ड्रायर में निर्धारित तापमान पर लगभग 10 घंटे रखा जाता है, जिससे डिहाइड्रेटेड उत्पाद तैयार होता है।

पाउडर बनाने के लिए स्लाइस को पल्वराइज़र मशीन में पीसकर पाउडर तैयार किया जाता है और वाइब्रो फिल्टर से छाना जाता है। वहीं केले को डिहाइड्रेट करने के लिए करीबन 60 डिग्री तापमान पर लगभग 8 घंटे तक ड्रायर में रखा जाता है। इसी प्रकार हल्दी, मैथी एवं अन्य उत्पादों के लिए भी लगभग समान प्रक्रिया अपनाई जाती है।

रोजगार के अवसर भी हुए सृजित

यूनिट में वर्तमान में 5 से 6 लोगों को रोजगार मिल रहा है। इससे न केवल अभिषेक का व्यवसाय आगे बढ़ रहा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं।

मांग और बिक्री से बढ़ रही आय

अभिषेक जायसवाल यूनिट में प्रतिमाह लगभग 5-6 क्विंटल उत्पादन की बिक्री कर लेते हैं, जिससे उन्हें लगभग 50 से 60 हजार रुपये शुद्ध आय प्रति माह का मुनाफा हो जाता है। अभिषेक जायसवाल बताते है कि, उत्पादों की पैकेजिंग 30 एवं 50 किलो के पैकेट्स में की जाती है। इसके लिए पैकिंग बैग में सामग्री भरकर पैकेजिंग मशीन से सील कर ग्राहकों तक पहुँचाया जाता है। ग्राहकों द्वारा इन डिहाइड्रेट उत्पादों को पसंद किया जा रहा है। नियमित ग्राहक के साथ-साथ मांग अनुसार पैकेट्स भी तैयार किए जाते हैं।

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़ने की तैयारी

अभिषेक के उत्पादों की बिक्री बुरहानपुर जिले के साथ-साथ इंदौर, मुंबई सहित अन्य शहरों में भी हो रही है। आने वाले समय में वे अपने उत्पादों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से भी विक्रय करने की तैयारी कर रहे हैं।

योजना बनी आत्मनिर्भरता की राह

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना से सही मार्गदर्शन, योजना का लाभ और ईच्छाशक्ति के बल पर युवा न केवल स्वयं का व्यवसाय स्थापित कर रहे हैं, बल्कि अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर बना रहे है।

आशा उइके/अनिल वशिष्ठ


Friday, January 9, 2026

मध्यप्रदेश में सफलता की एक और कहानी

भोपाल : शुक्रवार, जनवरी 9, 2026, 17:38 IST ऑर्गेनिक कृषि से सबंधित 

शेडनेड हाउस:ऑर्गेनिक खीरा ककड़ी से कमाए 6 लाख रुपये

तस्वीर जन संपर्क विवहग शिमला के सोशल मीडिया स्रोत से साभार 

भोपालशुक्रवार 09 जनवरी 2026: ( DIPR //MP info// मध्यप्रदेश स्क्रीन डेस्क)

ऑर्गेनिक कृषि से पैदा होने वाले उत्पादन लगातार जहां आम लोगों में लोकप्रिय हो रहे हैं वहीँ इसे अपनाने वाले किसान वर्ग में भी इसे लेकर बहुत उत्साह है। इन उत्पादनों से जहां उपभोक्ता का स्वास्थ्य अच्छा रहता वहीं इसकी खेती करने वालों को भी अच्छा मुनाफा मिलता है। आज देश के अलग अलग हिस्सों में बहुत से किसान इस तरह की खेती से मुनाफा कमा रहे हैं।  

आधुनिक तकनीक और जैविक खेती को अपनाकर अलीराजपुर जिले के ग्राम उण्ड़वा के प्रगतिशील कृषक श्री युवराज सिंह ठाकुर ने क्षेत्र के किसानों के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल प्रस्तुत की है।

श्री ठाकुर ने अपने 4 हजार वर्ग मीटर खेत में शेडनेड हाउस का निर्माण कर खीरा–ककड़ी की फसल ऑर्गेनिक तरीके से लगाई। इस शेडनेट हाउस में बोईगई खीरा फसल की कुल लागत लगभग 2 लाख रुपये रही। खीरा–ककड़ी की इस फसल से उन्हें मात्र 4 माह में लगभग 40 टन उत्पादन प्राप्त हुआ। श्री युवराज सिंह ने उपज को 20 रुपये प्रति किलो के भाव से बाजार में विक्रय किया। वास्तविक लागत के मुकाबले श्री युवराज ठाकुर ने करीब 6 लाख रुपये की शुद्ध कमाई की है।

कृषक श्री युवराज सिंह ठाकुर ने बताया कि ऑर्गेनिक खेती के तरीके से नवाचार की प्रेरणा उद्यानिकी विभाग और इंटरनेट की सहायता से मिली। किसान श्री ठाकुर ने खीरा-ककड़ी के अलावा खेत में आम की विभिन्न प्रजातियां लगाई, साथ ही अमरूद भी लगाया। श्री युवराज सिंह ठाकुर ने किसानों से कहा कि इस खेती को यदि सही तकनीक, मार्गदर्शन से करें तो खेती को भी लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है।

कलेक्टर श्रीमती नीतू माथुर ने किया शेडनेट हाउस का अवलोकन
आलीराजपुर जिले के ग्राम उण्ड़वा के प्रगतिशील कृषक श्री युवराज सिंह ठाकुर ने आधुनिक तकनीक और जैविक खेती को अपनाकर क्षेत्र के किसानों के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल प्रस्तुत की है।
श्री ठाकुर ने अपने 4 हजार वर्ग मीटर खेत में शेडनेड हाउस का निर्माण कर खीरा–ककड़ी की फसल ऑर्गेनिक तरीके से लगाई। इस शेडनेट हाउस बोईगई खीरा फसल की कुल लागत लगभग 2 लाख रुपये रही। उन्होंने बताया कि खीरा–ककड़ी की इस फसल से मात्र 4 माह में लगभग 40 टन उत्पादन प्राप्त हुआ। श्री युवराज सिंह ने उपज को 20 रुपये प्रति किलो के भाव से बाजार में विक्रय किया।वास्तविक लागत के मुकाबले श्री युवराज ठाकुर ने करीब 6 लाख रुपये की शुद्ध कमाई की जो कि उनकी सफलता हेतु उल्लेखनीय है।
कलेक्टर श्रीमती नीतू माथुर ने शेडनेट हाउस का किया निरीक्षण
उण्ड़वा ग्राम में खीरा–ककड़ी की इस सफल फसल का निरीक्षण करने कलेक्टर श्रीमती नीतू माथुर उनके शेडनेट हाउस पहुंचीं। उन्होंने ऑर्गेनिक तरीके से उगाई गई फसल का अवलोकन किया और किसान से संवाद कर यह जाना कि उन्हें इस नवाचार की प्रेरणा कहां से मिली तथा उद्यानिकी विभाग से किस प्रकार सहयोग प्राप्त हुआ तब उन्होंने बताया कि उद्यानिकी विभाग के संपर्क और इंटरनेट की सहायता लेकर उन्होंने यह प्रयास किया।
कलेक्टर श्रीमती माथुर ने खेती की पूरी प्रक्रिया, लागत, उत्पादन, कमाई और मार्केटिंग व्यवस्था की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने श्री युवराज सिंह ठाकुर की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे अपनी इस सफलता को अन्य किसानों के साथ साझा करें, ताकि अधिक से अधिक किसान आधुनिक व जैविक खेती की ओर प्रेरित हों।
आम की खेती को भी मिलेगा बढ़ावा
किसान श्री युवराज सिंह ठाकुर ने खीरा ककड़ी के अलावा उनके खेत में आम की विभिन्न प्रजातियां लगाई है साथ ही अमरूद भी लगाया है। कलेक्टर श्रीमती माथुर ने उनके द्वारा लगाए गए आम की विभिन्न प्रजातियों के बगीचों का भी अवलोकन किया। उन्होंने उद्यानिकी विभाग के अधिकारी श्री कैलाश चौहान को निर्देश दिए कि वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना के अंतर्गत आम को चयनित करने हेतु प्रस्ताव भेजा जाए।
श्री युवराज सिंह ठाकुर ने जिले के किसानों से कहा कि इस खेती को यदि सही तकनीक, मार्गदर्शन से करे तो खेती को भी लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है।

Sunday, December 21, 2025

भोपाल में किया मेट्रो ट्रेन का शुभारंभ

भोपाल : शनिवार, दिसम्बर 20, 2025, 19:26 IST

मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केन्द्रीय मंत्री श्री मनोहरलाल ने दिखाई हरी झंडी

भोपाल: शनिवार, 20 दिसम्बर 2025 at 19:26 IST:


मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहरलाल ने शनिवार की शाम भोपाल के सुभाष नगर मेट्रो ट्रेन स्ट्रेशन से हरी झंडी दिखाकर 7 किलोमीटर ट्रेक में चलने वाली मेट्रो ट्रेन का शुभारंभ किया।

भोपाल में मेट्रो ट्रेन परियोजना के प्रथम चरण में इस ट्रेक पर नियमित मेट्रो ट्रेन संचालन प्रारंभ किया गया है। भोपाल में लगभग 30 कि.मी. लंबाई में मेट्रो ट्रेन की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केन्द्रीय मंत्री श्री खट्टर ने अनेक जनप्रतिनिधियों, मीडिया प्रतिनिधियों और नागरिकों की उपस्थिति में मेट्रो ट्रेन के शुभारंभ अवसर पर हरी झंडी दिखाकर एम्स के लिए ट्रेन को रवाना किया। इसके पूर्व उन्होंने मेट्रो ट्रेन कार्पोरेशन के वरिष्ठ अधिकारियों से मेट्रो ट्रेन संचालन के संबंध में तकनीकी जानकारियां प्राप्त कीं।

अशोक मनवानी

Friday, December 19, 2025

भोपाल मेट्रो: शहरी परिवहन की दिशा में ऐतिहासिक पहल

प्रविष्टि तिथि: 19th December  2025 at 4:56 PM by PIB Bhopal//मध्यप्रदेश स्क्रीन

भोपाल को शीघ्र ही एक आधुनिक, सुरक्षित एवं विश्वस्तरीय शहरी परिवहन प्रणाली की सौगात

कुल 30.8 किलोमीटर लंबी इस मेट्रो परियोजना में दो प्रमुख कॉरिडोर शामिल हैं—


भोपाल
: 19 दिसंबर 2025: (PIB Bhopal//मध्यप्रदेश स्क्रीन डेस्क):: 

भोपाल में मैट्रो की नई सौगात की दस्तक हो चुकी है। इसके चालू होने पर भोपाल के लोगों को बहुत लाभ मिलेगा। इसकी विभिन्न रंगों की गाड़ियां लोगों को बहुत तेज़ी से आवाजे की सुविधा प्रदान करेंगी। घंटों का सफर मिनटों में सिम्त जाएगा। 

ऑरेंज लाइन: 16.74 किमी की यात्रा तय करेगी। इस फैसले में कई इलाके और स्टेशन कवर होंगें। 


ब्लू लाइन: 14.16 किमी की दूरी तय करेगी। साथ ही परियोजना के अंतर्गत एक अत्याधुनिक मेट्रो डिपो का निर्माण भी किया गया है।

भोपाल मेट्रो के प्रथम चरण के अंतर्गत ऑरेंज लाइन के प्रायोरिटी कॉरिडोर का शुभारंभ किया जा रहा है। लगभग 7 किलोमीटर लंबे इस एलिवेटेड कॉरिडोर में 8 स्टेशन शामिल हैं— एम्स (AIIMS), अलकापुरी, डीआरएम ऑफिस, रानी कमलापति स्टेशन, एमपी नगर, बोर्ड ऑफिस चौराहा, केंद्रीय विद्यालय एवं सुभाष नगर।

यह प्रायोरिटी कॉरिडोर शहर के प्रमुख व्यावसायिक एवं आवासीय क्षेत्रों को जोड़ते हुए यातायात के दबाव को कम करेगा तथा नागरिकों को सुरक्षित, सुगम एवं समयबद्ध यात्रा सुविधा प्रदान करेगा। इस कॉरिडोर की कुल लागत ₹2225 करोड़ है एवं प्रतिदिन लगभग 3000 यात्रियों के लाभान्वित होने की संभावना है।

भोपाल मेट्रो परियोजना को यात्रियों की सुविधा, सुरक्षा एवं पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए विकसित किया गया है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—

सभी स्टेशनों पर हाई-स्पीड लिफ्ट एवं एस्केलेटर  भी उपलब्ध रहेगा।  

इसी तरह दिव्यांगजनों हेतु सुगम प्रवेश, व्हीलचेयर सुविधा एवं ब्रेल साइनेज

AI आधारित CCTV निगरानी, प्लेटफॉर्म स्क्रीन डोर एवं उन्नत सिग्नलिंग प्रणाली

सोलर पावर एवं रीजेनेरेटिव ब्रेकिंग जैसी पर्यावरण-अनुकूल तकनीक

पूर्णतः वातानुकूलित कोच, मोबाइल चार्जिंग पॉइंट एवं आधुनिक यात्री सूचना प्रणाली

भोपाल मेट्रो केवल एक परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि स्मार्ट सिटी, हरित भविष्य और नागरिकों के बेहतर जीवन स्तर की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके शुभारंभ के साथ ही भोपाल एक आधुनिक, सुरक्षित एवं सुलभ राजधानी के रूप में नई पहचान स्थापित करने की ओर अग्रसर है।

***//(रिलीज़ आईडी: 2206599)

Tuesday, December 16, 2025

मिशन महिला-शक्ति के स्वर्णिम दो वर्ष-सुश्री निर्मला भूरिया

भोपाल : सोमवार, दिसम्बर 15, 2025, 19:31 IST

दो वर्ष समग्र विकास के अद्वितीय कालखंड के रूप में दर्ज हुए हैं

महिला सशक्तीकरण, सुरक्षा और सम्मान ने लगातार पकड़ी रफ़्तार 

भोपाल: सोमवार, 15 दिसम्बर 2025:(मीडिया लिंक 32//मध्यप्रदेश स्क्रीन डेस्क//)::


मध्यप्रदेश में बीते दो वर्ष महिला सशक्तीकरण, सुरक्षा, सम्मान और समग्र विकास के अद्वितीय कालखंड के रूप में दर्ज हुए हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दूरदर्शी नेतृत्व और संवेदनशील दृष्टिकोण से प्रदेश में महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव  की मंशा स्पष्ट रही है—हर महिला को सुरक्षित जीवन, हर बालिका को प्रोत्साहन तथा हर बच्चे को बेहतर भविष्य का अधिकार मिले। इन्हीं लक्ष्यों को मूर्त रूप देने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा अनेक ऐतिहासिक पहलें की गईं, जिनसे समाज में सकारात्मक परिवर्तन की व्यापक लहर उत्पन्न हुई है।

महिला एवं बाल विकास मंत्री के रूप में मैं यह बताते हुए गर्व का अनुभव करती हूँ कि मिशन वात्सल्य के माध्यम से प्रदेश में हजारों बच्चों को नए जीवन अवसर प्रदान किए गए हैं। स्पॉन्सरशिप योजना ने कमजोर परिस्थितियों में रह रहे बच्चों के लिए सुरक्षा कवच का कार्य किया है, जिसके अंतर्गत प्रति माह 4 हजार रुपये की वित्तीय सहायता ने परिवारों और संस्थाओं दोनों को सशक्त बनाया है। वर्ष 2024-25 में 20,243 बच्चों को इस सहायता का लाभ मिला और वर्ष 2025-26 के लिए 32,896 बच्चों के प्रकरण स्वीकृत किए जा चुके हैं। चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 ने चौबीसों घंटे त्वरित सेवा उपलब्ध कराते हुए दो वर्षों में लगभग 48,872 बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की है।

महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना सबसे क्रांतिकारी पहलों में से एक रही है। कई राज्यों ने इसका अनुसरण किया है। जून 2023 से अक्टूबर 2025 तक महिलाओं को नियमित रूप से 29 किस्तों के माध्यम से आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। तीन बार विशेष सहायता राशि के रूप में प्रति बहन 250 रुपये अतिरिक्त प्रदान किए गए, जिससे लाखों परिवारों को सीधा आर्थिक संबल मिला। कुल 44,917.92 करोड़ रुपये महिलाओं के खातों में पारदर्शी डिजिटल अंतरण के माध्यम से प्रदान किए गए, जिसने मध्यप्रदेश की महिलाओं को आत्मनिर्भरता की नई दिशा दी है।

मिशन शक्ति के अंतर्गत वन स्टॉप सेंटरों, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, पिंक ड्राइविंग लाइसेंस, जेंडर चैंपियन पहल और सशक्त वाहिनी कार्यक्रमों ने महिलाओं और बालिकाओं के सशक्तीकरण को और मजबूती प्रदान की है। वर्ष 2024-25 में वन स्टॉप सेंटरों ने 31,763 महिलाओं को सहायता प्रदान की और 2025-26 में अक्टूबर तक 20,332 महिलाओं को त्वरित राहत और परामर्श उपलब्ध कराया। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के अंतर्गत नवजात बालिकाओं का स्वागत, पूजा-अर्चना और व्यापक पौधारोपण ने समाज में बेटियों के सम्मान की संस्कृति को मजबूत किया है। पिंक ड्राइविंग लाइसेंस और जेंडर चैंपियंस जैसी पहलें बालिकाओं के आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को नई उड़ान दे रही हैं।

राज्य एवं जिला स्तर के हब फॉर एम्पावरमेंट ऑफ वुमन ने जनजागरूकता की दृष्टि से अभूतपूर्व कार्य किया है। 100 दिवसीय अभियान, घरेलू हिंसा निरोधक कार्यक्रम, बाल विवाह मुक्ति प्रतिज्ञा, PC-PNDT अधिनियम जागरूकता अभियान, साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण और आत्मरक्षा कार्यक्रमों ने समाज में व्यापक संवेदनशीलता विकसित की है। वर्ष 2024-25 में 1.47 लाख से अधिक गतिविधियाँ आयोजित हुईं और लाखों नागरिकों की भागीदारी ने यह सिद्ध किया कि मध्यप्रदेश, महिला सम्मान और सुरक्षा के विषय में समाज को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है।

सखी निवास (वर्किंग वुमन हॉस्टल) और शक्ति सदन ने कार्यरत महिलाओं तथा संरक्षण की आवश्यकता वाली महिलाओं के लिए सुरक्षित आवास का मजबूत तंत्र निर्मित किया है। नए हॉस्टलों के निर्माण से प्रदेश में महिलाओं के लिए और अधिक सुरक्षित सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। महिला हेल्पलाइन 181 ने दो वर्षों में लगभग 1.7 लाख से अधिक महिलाओं को त्वरित सहायता प्रदान की है, जो शासन की संवेदनशीलता का प्रमाण है।

आंगनवाड़ी सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए भी महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। 12,670 मिनी आंगनवाड़ियों को पूर्ण आंगनवाड़ी में उन्नत किया गया, जिसके परिणामस्वरूप सेवाओं की गुणवत्ता और महिलाओं के लिए रोजगार दोनों में वृद्धि हुई है। ‘चयन पोर्टल’ की शुरुआत ने भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया है और हजारों कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं को नई नियुक्ति मिली है। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के माध्यम से आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को मजबूत सामाजिक सुरक्षा प्रदान की गई है।

जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में पीएम-जनमन तथा धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्थान अभियान के माध्यम से सैकड़ों नए आंगनवाड़ी केंद्रों का संचालन प्रारंभ किया गया है। इससे जनजातीय महिलाओं और बच्चों को पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ उनके गांवों तक उपलब्ध कराई गई हैं। हजारों भवनों के निर्माण और उन्नयन से आंगनवाड़ी व्यवस्था अधिक सशक्त और सुरक्षित बनी है।

पोषण अभियान के अंतर्गत लाखों बच्चों के विकास की निगरानी के लिए अत्याधुनिक उपकरण प्रदान किए गए हैं। फेस-मैच आधारित सत्यापन ने हितग्राहियों को पारदर्शी और समयबद्ध लाभ दिलाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे अभियानों ने पोषण और पर्यावरण—दोनों आयामों को जोड़कर जनभागीदारी का नया मॉडल प्रस्तुत किया है।

इन सभी उपलब्धियों के मूल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की वह स्पष्ट सोच और संवेदनशील दृष्टिकोण है, जिसके कारण आज मध्यप्रदेश महिला और बाल विकास के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य केवल योजनाओं की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि हर महिला, हर बालिका और हर बच्चे तक सुरक्षा, सम्मान, समान अवसर और आर्थिक-सामाजिक सशक्तिकरण की रोशनी पहुँचाना है। आने वाले वर्षों में भी यह अभियान निरंतर जारी रहेगा और मध्यप्रदेश, आत्मनिर्भर, समृद्ध और सशक्त समाज के रूप में नए मानक स्थापित करेगा।

 (लेखक मध्यप्रदेश शासन की महिला एवं बाल विकास मंत्री हैं।) 

उनका यह लेख MP Info से साभार लिया गया है 

Sunday, November 9, 2025

विन्ध्य की उड़ान को लगे पंख-- राजेन्द्र शुक्ल

 भोपाल : रविवार, नवम्बर 9, 2025, 17:35 IST

सोमवार से एटीआर 72 की भी उड़ान शुरू

भोपाल : रविवार, नवम्बर 9, 2025, 17:35 IST

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी जब कहते थे कि वह दिन भी अब दूर नहीं जब हमारे देश के 'हवाई चप्पल वाले लोग भी हवाई जहाज में उड़ान भरेंगे' तब विरोधी इसे महज जुमला कहकर बात हवा में उड़ा देते थे। ऐसे लोगों को आज रीवा आकर देखना चाहिए कि सपना किस तरह यथार्थ के धरातल पर उतरकर चरितार्थ होता है।

राजेन्द्र शुक्ल

10 नवंबर 2025 का दिन कई पीढ़ियों की परिकल्पना और सपने को यथार्थ में परिवर्तित होने का दिन है जब एटीआर 72 वायुयान दिल्ली के लिए उड़ान भरेगा। उड्डयन विभाग के हमारे केन्द्रीय मंत्री, माननीय मुख्यमंत्री, विन्ध्य के सांसद, विधायक गण व नागरिक विन्ध्य के विकास के इस मंगलाचरण के साक्षी होंगे। हम यहीं रुकने वाले नहीं है शीघ्र ही इंदौर से वायुमार्ग से जुड़ने वाले हैं। अगले चरण में मुंबई, पुने, बेंगलुरु जैसे शहरों से सभी इसी एयरपोर्ट से उड़ान भरेंगे। हमसे मीडिया के लोग पूछते हैं कि इसके आगे और क्या? मेरा जवाब है एयरबस, सिर्फ 500 मीटर का रनवे और बढ़ा देंगे।

प्रधानमंत्री जी ने रीवा में हवाई सेवा के विस्तार के लिए जिस तरह से अपनी रुचि प्रदर्शित की है उसके लिए हम विन्ध्यवासी उनके प्रति चिर ऋणी रहेंगे। 9 सितंबर 2024 को डीजीसीए ने रीवा एयरपोर्ट से 72 सीटर विमान के लिए लायसेंस जारी किया था। 20 अक्टूबर 2024 को माननीय प्रधानमंत्री जी ने रीवा एयर पोर्ट का वर्चुअल उद्घाटन किया इसके साथ ही रीव- दिल्ली और रीवा -इंदौर के लिए हवाई उड़ान का पथ प्रशस्त हुआ। इस के लिये इंडिगो और एलायंस एयर को प्रस्ताव भेजा गया। आज का दिन इसी प्रयत्न का प्रतिफल है।

हमारे तत्कालीन नागरिक उड्डयन मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह जी चौहान ने रीवा में 15 फरवरी 2023 को हवाई अड्डे की आधारशिला रखी थी। इसके साथ ही रीवा भविष्य में उत्तरमध्य भारत का सबसे महत्वपूर्ण एयर ट्रैफिक डेस्टिनेशन बनकर उभरेगा की यात्रा पर चल पड़ा।

दो वर्ष पूर्व इंदौर में आयोजित ग्लोबल इनवेस्टर्स मीट में विश्वभर के उद्यमियों के बीच तत्कालीन केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया जी ने सगर्व यह घोषणा की थी कि हम मध्यप्रदेश का छठवे हवाईअड्डे को निर्मित और विकसित करने जा रहे हैं। उनकी इस घोषणा ने दुनियाभर के उन उद्योगपतियों के ध्यान को आकृष्ट किया जो यहाँ पावर व माइनिंग सेक्टर, वाइल्ड लाइफ टूरिज्म, फूड प्रोसेसिंग इन्डस्ट्रीज की संभावनाओं को देखते हैं। शिक्षा व स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश करने वालों के लिए यह अवसरों का दरवाजा खोलने वाला है। मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि रीवा का हवाईअड्डा चरणबद्ध तरीके से विकसित होने की प्रक्रिया में है। पाँच साल के भीतर ही रीवा का हवाईअड्डा बोइंग की लैंडिंग और अन्तर्राष्ट्रीय उड़ानों के लिए बनकर तैय्यार रहेगा।

देश में श्री मोदी जी और प्रदेश में श्री मोहन यादव जी के कुशल और फलदायी नेतृत्व के अनुभव को देखते हुए मैं यह विश्वास पूर्वक कह सकता हूँ कि अगले पाँच वर्षों के भीतर यह सब पूर्णरूपेण यथार्थ के धरातल पर उतर जाएगा। विन्ध्य की आशाओं के केन्द्र रीवा के विकास का श्रेष्ठ व उन्नत दौर है जो स्वतंत्रता के अमृतकाल में प्रारंभ हो रहा है। मैं जब कहता हूँ कि अब रीवा मध्यप्रदेश के ही नहीं देश के समुन्नत और श्रेष्ठ महानगरों की श्रेणी में कदमताल मिलाकर चल पड़ा है तो इसके पीछे ठोस आधार है। 1956 तक रीवा विन्ध्य प्रदेश की राजधानी रहा है और तब इसकी हैसियत भोपाल, लखनऊ, पटना और भुवनेश्वर जैसे शहरों के समकक्ष थी। कांग्रेस सरकार ने राजनीतिक द्वेषवश रीवा से एक प्रदेश की राजधानी का गौरव छीन लिया। 1956 से 2004 तक यह उपेक्षित और अभिशप्त पड़ा रहा। विन्ध्य में आज जो प्राकृतिक संसाधन हैं वो कल भी थे। आम नागरिकों में विकास की ललक और अपेक्षाएं कल भी वैसी ही थीं। केन्द्र में अटलजी और उसके बाद मोदीजी की नेतृत्व की व प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने आहत और उपेक्षित विन्ध्यवासियों की पीड़ा और भावनाओं को समझा। आज यह क्षेत्र कई मामलों देश में अग्रगण्य है।

जब मैं कहता हूँ कि रीवा एयरपोर्ट उत्तरमध्य भारत का सबसे महत्वपूर्ण एयरपोर्ट होगा तो मेरी दृष्टि के सामने सिंगरौली का पावर काम्प्लेक्स उभरकर सामने आता है। सिंगरौली में थर्मल प्लांटस में 20,000 मेगावाट से ज्यादा विद्युत उत्पादन होता है। देश का यह सबसे बड़ा पावर काम्प्लेक्स है। रीवा से सिंगरौली तक विश्वस्तरीय सड़क इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित होकर पूर्णता के करीब है। जो यात्री पाँच घंटे में बनारस पहुँचते थे वे दो घंटे में रीवा एयरपोर्ट के लाउंज में होंगे। विन्ध्य की 29 बड़ी औद्योगिक इकाईयां 225 किमी की परिधि में फैली हैं और प्रायः सभी नेशनल हाइवेज से जुड़ी हैं। अपने रीवा का हाइवेज जंक्शन पहले ही विकसित हो चुका है। इन औद्योगिक इकाइयों के अधिकारियों के लिए रीवा एयरपोर्ट कितनी बड़ी सहूलियत बनने जा रहा है यह अब उनसे ही पूछ सकते हैं। विन्ध्य की वाइल्डलाइफ टूरिज्म का विश्व में स्थान है। यहाँ का सफेद बाघ दुनियाभर के चिड़ियाघरों में दहाड़ रहा है। टीवी में दिखने वाला हर दूसरा बाघ या तो बांधवगढ़ का है या कि पन्ना का। पर्यटकों के लिए यह कितना आसान हो जाएगा। रीवा में 750 मेगावाट का सोलर पावर काम्प्लेक्स एशिया के बड़े पावर प्रोडक्शन यूनिट में शामिल है। रीवा में खूबसूरत जल प्रपातों की श्रृंखला है। भगवान राम का तपोवन चित्रकूट और माँ शारदा के धाम मैहर कौन नहीं आना चाहेगा।

बाणसागर का वृस्तित जल प्रक्षेत्र और उसके द्वीप विकसित होने पर हनुवंतिया के आकर्षण से आगे का प्राकृतिक सौंदर्य प्रस्तुत करेंगे। अपना विन्ध्य पावर हब की तरह सीमेंट का भी प्रोडक्शन काम्प्लेक्स है। प्रायः सभी बड़े औद्योगिक घरानों का निवेश यहां आया है। रीवा में नागपुर की तरह मेडिकल फैसिलटी और कोटा की तरह एकडमीज का विस्तार हो रहा है।

अभी तीन लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित हुई है, बाणसागर का पानी जब 9लाख हेक्टेयर तक पहुँचेगा तब यहाँ के किसानों की स्थिति क्या बनेगी कल्पना की जा सकती है। विन्ध्यवासियों की क्रयशक्ति बढ़ी है और यही सब क्षमता मिलकर रीवा को उत्तरमध्य भारत के सबसे विकसित महानगर बनाने का काम करेगी। रीवा इंदौर की तर्ज पर आगे बढ़ रहा है। शहरी विकास की रेटिंग एजेंसियां रीवा को संभावनाओं का महानगर बता रहे हैं। इन्हीं सबके आधार पर मैं यह कहता हूँ कि रीवा एयरपोर्ट विन्ध्य के उन्नत उडान के लिए स्वर्णिम पंख लगाने जा रहा है।

रीवा में एयरपोर्ट और उड़ानों के फलितार्थ होने में भी परिश्रम की पराकाष्ठा शामिल है। मैं आभारी हूँ तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज जी का, मुझे वह तारीख 13 जनवरी 2015 आज भी याद है जब उन्होंने सिविल एविएशन मिनिस्ट्री को रीवा में एयरपोर्ट की संभावनाओं के अध्ययन के लिए पत्र लिखा। इसके बाद वह सिलसिला चल निकला। प्रधानमंत्री जी ने किफायती दरों वाली उडान योजना लांच की तो उन्हीं की कृपा से रीवा 'उडान' में शामिल हो गया। श्री सिंधिया जी ने जब से उड्डयन विभाग की कमान सँभाली रीवा एयरपोर्ट उनकी प्राथमिकता में सर्वोपरि रहा। एयरपोर्ट अथॉरिटी ने प्रदेश सरकार से कहा कि हमें रीवा के लिए 258 एकड़ भूमि और चाहिए। मुख्यमंत्री जी ने बिना वक्त गँवाए इसके लिए 209 करोड़ रुपये उपलब्ध करा दिए।

जब जनसेवा का भाव और संकल्प प्रबल होता है तब दैवयोग से सभी कार्य ऐसे ही सधते जाते हैं जैसे कि रीवा एयरपोर्ट की कल्पना व उसके बाद यहां से वायुयानों की नियमित उड़ान और उसे अब यथार्थ के धरातल पर उतरते हुए देखना। मैं विन्ध्यजनों की ओर से, रीवा के नागरिकों की ओर विनयवत हूँ, आभारी और कृतज्ञ हूँ।

 (लेखक-मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री हैं)

उनका यह लेख MP Info से साभार लिया गया है 

Friday, October 31, 2025

मध्यप्रदेश स्थापना दिवस:शुभकामनाएँ-श्री राजेन्द्र शुक्ल

 भोपाल : शुक्रवार, अक्टूबर 31, 2025, 20:18 IST

स्वस्थ, समृद्ध और आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर अग्रसर मध्यप्रदेश

भोपाल: शुक्रवार, 31 अक्टूबर 2025: (MP Info//Media Link 32//मध्यप्रदेश स्क्रीन डेस्क)::

मध्यप्रदेश स्थापना दिवस के इस गौरवशाली अवसर पर मैं प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ। यह दिन हमें न केवल अपने अतीत की उपलब्धियों का स्मरण कराता है, बल्कि भविष्य की नई ऊँचाइयों को प्राप्त करने का संकल्प भी देता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ऊर्जावान नेतृत्व में मध्यप्रदेश "विकसित भारत" के विज़न को साकार करने की दिशा में दृढ़तापूर्वक अग्रसर है।

लेखक राजेंद्र शुक्ल 

स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में बीते वर्षों में मध्यप्रदेश ने ऐतिहासिक परिवर्तन देखा है। राज्य सरकार ने "स्वस्थ मध्यप्रदेश – सशक्त मध्यप्रदेश" के मंत्र को व्यवहार में उतारते हुए स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार, चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार और जनसेवा में संवेदनशीलता के नए आयाम स्थापित किए हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में हमारी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि प्रदेश के हर नागरिक को गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ मिलें। इसी दृष्टि से बीते समय में चिकित्सा संस्थानों के सुदृढ़ीकरण पर विशेष बल दिया गया है। प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि की गई है। इन संस्थानों के माध्यम से न केवल डॉक्टरों और विशेषज्ञों की उपलब्धता बढ़ी है, बल्कि ग्रामीण अंचलों में भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँची हैं। राज्य सरकार ने चिकित्सा शिक्षा में पारदर्शिता और गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। आधुनिक प्रयोगशालाओं, सिमुलेशन सेंटर्स और ई-लर्निंग के माध्यम से चिकित्सा शिक्षा को आधुनिक युग के अनुरूप बनाया जा रहा है।

राज्य के स्वास्थ्य अधोसंरचना को मज़बूत करने के लिए जिला चिकित्सालयों, सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के उन्नयन का कार्य निरंतर चल रहा है। टेलीमेडिसिन सेवाओं का विस्तार किया गया है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के नागरिक भी विशेषज्ञ परामर्श प्राप्त कर सकें। साथ ही, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में मातृ शिशु संजीवन मिशन और अनमोल 2.0 से समेकित प्रयास किए जा रहे हैं। मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण की दिशा में भी राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति की है। डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल स्टाफ की बड़ी संख्या में नियुक्तियाँ की गई हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में दक्षता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों पर विशेष बल दिया जा रहा है। हमने यह सुनिश्चित किया है कि हर स्वास्थ्य केंद्र पर आवश्यक मानव संसाधन, दवाएँ और उपकरण उपलब्ध रहें।

स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए हर संभव संसाधन पर कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में पीपीपी मॉडल (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) को बढ़ावा दिया गया है। इससे निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता और तकनीकी क्षमताओं का लाभ आम नागरिकों तक पहुँचाया जा रहा है। एयर एम्बुलेंस सेवा, मोबाइल मेडिकल यूनिट्स और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं का सतत विस्तार और उन्नयन किया जा रहा है। प्रदेश में "मेडिकल डिवाइस पार्क" की स्थापना की दिशा में भी कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसका उद्देश्य प्रदेश को चिकित्सा उपकरण निर्माण का केंद्र बनाना है, जिससे आत्मनिर्भरता के साथ-साथ रोजगार के अवसरों का सृजन भी होगा।

हमारा संकल्प है कि आने वाले वर्षों में प्रत्येक जिले में मेडिकल कॉलेज की स्थापना हो और हर नागरिक को अपने जिले में ही उच्चस्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो। डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड, ई-संजीवनी जैसी योजनाओं के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को तकनीकी रूप से और अधिक सशक्त बनाया जा रहा है। आयुष्मान भारत योजना ने मध्यप्रदेश सहित पूरे देश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और प्रभावशीलता को नया आयाम दिया है। इस योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों को प्रतिवर्ष पाँच लाख रुपये तक का नि:शुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार ने योजना के क्रियान्वयन को और अधिक सशक्त बनाया है, जिससे गरीब एवं मध्यमवर्गीय परिवारों को गंभीर बीमारियों के उपचार में आर्थिक राहत मिली है। प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों, चिकित्सा महाविद्यालयों और पंजीकृत निजी अस्पतालों में आयुष्मान कार्डधारकों को सहज, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ मिल रही हैं। यह योजना "सबका स्वास्थ्य–सबका विकास" के संकल्प को साकार करती हुई सामाजिक सुरक्षा का मजबूत आधार बन चुकी है।

मध्यप्रदेश आज स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, उद्योग और अवसंरचना के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के "सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास" के विज़न को ध्येय मानकर सरकार सतत कार्य कर रही है। मध्यप्रदेश स्थापना दिवस हमें यह प्रेरणा देता है कि हम सब मिलकर अपने प्रदेश को विकास, स्वास्थ्य और खुशहाली के नए शिखरों तक पहुँचाएँ। आने वाला दशक "स्वस्थ, शिक्षित और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश" के रूप में हमारे संकल्प का साक्षी बनेगा — यही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।

मध्यप्रदेश स्थापना दिवस की पुनः हार्दिक शुभकामनाएँ।

 (लेखक मध्यप्रदेश के उपमुख्यमंत्री हैं)

उनका यह लेख MP Info से साभार लिया गया है