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Saturday, December 19, 2020

नए कृषि कानूनों से बिचौलियों में हड़कंप- मंत्री पटेल का दावा

Saturday, 19th December 2020 at 20:11 IST

  हरदा के ग्राम धुरगाड़ा में विधेयकों के समर्थन में चौपाल आयोजित 

भोपाल: 19 दिसम्बर 2020:, (मध्यप्रदेश स्क्रीन ब्यूरो)::

भारतीय जनता पार्टी की तरफ से किसानों के आंदोलन का मुकाबला जारी है। इस मकसद के लिए चौपालों का अयिजन भी किया जा रहा है। हाल ही में एक चौपाल हरदा के गांव धुरवाड़ा में भी आयोजित की गई जिसमें किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री श्री कमल पटेल भी पहुंचे। 

किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री श्री कमल पटेल ने कहा है कि नवीन कृषि कानूनों से बिचौलियों में हड़कंप मचा है। उन्होंने कहा कि अब तक बिचौलिए किसानों के लाभ को हजम कर जाते थे। इन कानूनों के आने के बाद किसानों को उनका वाजिब हक मिलेगा। श्री पटेल ने यह बात हरदा जिले के ग्राम धुरगाड़ा में नवीन कृषि विधेयकों के समर्थन में आयोजित किसान चौपाल में कहीं।

मंत्री श्री पटेल ने नए कृषि विधेयकों के समर्थन में आयोजित चौपाल में कहा कि विधेयक किसानों के हित में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा लाए गए हैं। इनसे किसानों की आय बढ़ेगी। खेती का उन्नत स्वरूप विकसित होगा। गांव में कृषि आधारित अधोसंरचनात्मक विकास होगा। किसान अपने उद्योग खुद लगा सकेंगे।   वे किसान के साथ-साथ उद्योगपति भी बन सकेंगे। श्री पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के संबोधन से किसानों में सकारात्मकता का भाव आया है। किसान अब आगे बढ़कर नवीन कृषि विधेयकों का समर्थन कर रहे हैं। ग्राम धुरगाड़ा में भी किसानों ने नारे लगाए कि वे नवीन कृषि विधेयकों के मामले में केंद्र और प्रदेश सरकार के साथ हैं। उनका पूरा- पूरा समर्थन नवीन कृषि विधेयकों के लिए है।

           किसान चौपाल में मंत्री श्री पटेल ने किसानों को आश्वस्त किया कि मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्र में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार किसानों की आय को न सिर्फ दुगुना करेगी बल्कि किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त और समृद्ध बनाने का हर मुमकिन प्रयास करेगी।


Thursday, May 3, 2018

कृषि से आमदनी बढ़ाने को किसानों ने अपनाई आधुनिक तकनीक

लगातार 5 वर्षो से उन्हें मुनाफा ही मिल रहा है
भोपाल: गुरूवार, मई 3, 2018, 16:32 IST
प्रदेश में किसान अब अपनी आय बढ़ाने के लिये कृषि विशेषज्ञों की मदद से नई-नई तकनीक अपना रहे हैं। इससे किसानों के जीवन-स्तर में काफी बदलाव आया है।
पन्ना जिले के ग्राम अहिरगुवा के किसान अग्निमित्र शुक्ला के पास तीन हेक्टेयर सिंचित रकबा हैं। इस वर्ष  अग्निमित्र को दो एकड़ में चने का लगभग दो गुना उत्पादन मिला है। उन्होंने बताया कि पूर्व वर्षों की तुलना में 18 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के स्थान पर 34 क्विंटल प्रति हेक्टेयर चने का उत्पादन प्राप्त हुआ है। किसान अग्निमित्र बताते हैं कि वे पिछले 7-8 वर्षों से चने की खेती कर रहे हैं। उन्होंने अपने खेत में विभिन्न किस्मों के चने की बोनी की। इन सबके बावजूद उन्हें कभी भी 18 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से अधिक चने का उत्पादन प्राप्त नहीं हुआ। इस संबंध में उन्होंने वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी से चर्चा की।  कृषि विभाग की चना क्‍लस्टर प्रदर्शन योजना के अंतर्गत अग्निमित्र को चने का जे.जी.-63 प्रजाति का 60 किलो बीज दिया गया। उन्होंने इस बीज को दो एकड़ में बोया, कृषि अधिकारियों की सलाह पर खेत में मृदा स्वास्थ्य कार्ड की अनुशंसा पर उर्वरक भी डाला। इससे बीज का अंकुरण और पौधों की बढ़त भी अच्छी हुई। कृषि की इस तकनीक को अपनाने से इन्हें 34 क्विंटल प्रति हेक्टेयर चने का उत्पादन प्राप्त हुआ है। आज वे इस तकनीक को अपने किसान साथियों को बताते हैं तो वे आश्चर्यचकित रह जाते हैं। अब क्षेत्र के अन्य किसानों ने भी चने की जे.जी.-63 प्रजाति को अपनाने का मन बना लिया है।
खरगोन जिले की कसरावद तहसील के किसान महेंद्र पाटीदार ने उद्यानिकी विभाग के सहयोग से नींबू का बगीचा तो लगा लिया, लेकिन पानी की समस्या ने उनकी चिंता बढ़ा दी थी। ऐसे समय में नव-विवाहित महेंद्र ने अपनी पत्नि को साथ लेकर, बैलगाड़ी पर कोठी बाँधकर एक-एक पौधे को कढ़ी धूप में पानी देकर सिंचाई की पाँच वर्षो के बाद नींबू को पहली फसल आई। पहली फसल से कोई खास मुनाफा तो नहीं हुआ, मगर अंतरवर्ती फसलों कपास, गेहूँ और सोयाबीन के सहारे उनको मुनाफा होता रहा। इसके लगातार बाद 5 वर्षो से उन्हें मुनाफा ही मिल रहा है। अब अग्निमित्र क्षेत्र के प्रतिशील किसान की श्रेणी में भी शामिल हो गये है।
उद्यानिकी विभाग से किसान महेंद्र को एक हेक्टेयर में मल्चिंग शीट के लिए 10 हजार रुपए की सब्सिडी भी मिली। इसके बाद महेंद्र ने मल्चिंग विधि से तरबूज की खेती की और एक लाख 29 हजार 600 रुपए खर्च कर 5 लाख 70 हजार 567 रुपए का शुद्ध मुनाफा लिया। महेंद्र ने मात्र 80 दिनों की तरबूज की फसल में 75 हजार 960 किलोग्राम तरबूज की फसल ली। कृषि और उद्यानिकी विभाग के जानकार बताते हैं कि निमाड़ में मल्चिंग विधि से तरबूज की फसल सफलतापूर्वक लेने वाले महेंद्र पहले किसान हैं। अब महेंद्र कृषि की नई-नई तकनीकों को अपनाकर अलग-अलग प्रयोग करने में जुट गए हैं।
सक्सेस स्टोरी (पन्ना, खरगोन)
मुकेश मोदी