Friday, February 6, 2026

पीएमएफएमई योजना से लिखी सफलता की कहानी

Posted Dateline Bhopal on Friday 6th February 2026 at 15:17 IST Regarding Success Story 

प्रदेश के युवा विभिन्न उद्योग स्थापित कर बना रहे हैं अपनी पहचान

सरकारी योजना, तकनीकी मार्गदर्शन एवं ईच्छाशक्ति युवाओं के सपने साकार करने में सहायक


भोपाल: शुक्रवार, 6 फरवरी 2026: (DIPR //MP info// मध्यप्रदेश स्क्रीन डेस्क)::

पीएमएफएमई योजना

केन्द्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री सूक्ष्म, खाद्य, उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) का लाभ लेकर बुरहानपुर जिले के युवा उद्यमी श्री अभिषेक जायसवाल ने उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने डिहाइड्रेट यूनिट की स्थापना की है। यह प्रदेश के युवाओं एवं किसानों को खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में स्वरोजगार से जोड़ने की एक महत्वाकांक्षी योजना है। इस योजना का उद्देश्य उद्यमिता को बढ़ावा देना और युवाओं को आर्थिक रूप से आत्म निर्भर बनाना है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में इस योजना का लाभ अधिक से अधिक युवाओं तक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। शासन द्वारा विभागीय मार्गदर्शन, तकनीकी सहायता एवं वित्तीय सहयोग के माध्यम से युवाओं को उद्यम स्थापना हेतु प्रेरित किया जा रहा है, जिससे वे स्वयं का व्यवसाय स्थापित कर रोजगार के नए अवसर सृजित कर सकें।

यूनिट स्थापना से मिली नई पहचान

बुरहानपुर जिले के युवा उद्यमी अभिषेक जायसवाल एक शिक्षित युवा हैं, जिन्होंने एग्रीकल्चर बीएससी तथा एग्रीकल्चर मैनेजमेंट में एमबीए की पढ़ाई की है। शुरू से ही कृषि से जुड़े परिवार से होने के कारण अभिषेक की कृषि से संबंधित कार्य को आगे बढ़ाने में रूचि थी। उद्यानिकी विभाग के सहयोग से प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना द्वारा अभिषेक ने डिहाइड्रेट यूनिट की स्थापना कर मात्र 4 माह में ही लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।

पीएमएफएमई योजना से मिला संबल

अभिषेक जायसवाल बताते हैं कि उद्यानिकी विभाग के माध्यम से उन्हें पीएमएफएमई योजना की जानकारी प्राप्त हुई, जिसके बाद उन्होंने अपने उद्यम की शुरुआत करने का निर्णय लिया। योजना में उन्होंने बैंक से प्राप्त सहायता राशि के माध्यम से माह अक्टूबर 2025 में डिहाइड्रेट यूनिट की स्थापना की। इस यूनिट में मुख्य रूप से प्याज, केला के डिहाइड्रेट उत्पादों को तैयार करते हैं।

क्या है डिहाइड्रेट यूनिट

डिहाइड्रेशन यूनिट एक ऐसी प्रसंस्करण इकाई है, जिसमें फल एवं सब्जियों जैसे प्याज, केला, हल्दी तथा पत्तेदार सब्जियों से कम तापमान पर नमी हटाकर उन्हें सुखाया जाता है। यह प्रक्रिया जल्दी खराब होने वाली खाद्य सामग्री को लंबे समय तक सुरक्षित रखती है और उन्हें फ्लेक्स, चिप्स अथवा पाउडर के रूप में उपयोग योग्य बनाती है।

डिहाइड्रेशन के कारण उत्पाद लम्बे समय तक सुरक्षित रहते हैं, जिससे भंडारण एवं परिवहन आसान और कम खर्चीला हो जाता है। सही तकनीक से सुखाने पर उत्पाद का रंग, स्वाद एवं पोषण तत्व काफी हद तक सुरक्षित रहते हैं, जिससे ग्राहकों को गुणवत्तापूर्ण एवं पौष्टिक खाद्य उत्पाद उपलब्ध होते हैं।

प्रक्रिया

अभिषेक जायसवाल बताते हैं कि यूनिट में प्याज को डिहाइड्रेट करने के लिए पहले उसका छिलका हटाकर अच्छे से साफ कर कटर मशीन से 1 एमएम स्लाइस बनाए जाते हैं। इन स्लाइसों को क्रेट में भरकर इलेक्ट्रॉनिक ड्रायर में निर्धारित तापमान पर लगभग 10 घंटे रखा जाता है, जिससे डिहाइड्रेटेड उत्पाद तैयार होता है।

पाउडर बनाने के लिए स्लाइस को पल्वराइज़र मशीन में पीसकर पाउडर तैयार किया जाता है और वाइब्रो फिल्टर से छाना जाता है। वहीं केले को डिहाइड्रेट करने के लिए करीबन 60 डिग्री तापमान पर लगभग 8 घंटे तक ड्रायर में रखा जाता है। इसी प्रकार हल्दी, मैथी एवं अन्य उत्पादों के लिए भी लगभग समान प्रक्रिया अपनाई जाती है।

रोजगार के अवसर भी हुए सृजित

यूनिट में वर्तमान में 5 से 6 लोगों को रोजगार मिल रहा है। इससे न केवल अभिषेक का व्यवसाय आगे बढ़ रहा है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं।

मांग और बिक्री से बढ़ रही आय

अभिषेक जायसवाल यूनिट में प्रतिमाह लगभग 5-6 क्विंटल उत्पादन की बिक्री कर लेते हैं, जिससे उन्हें लगभग 50 से 60 हजार रुपये शुद्ध आय प्रति माह का मुनाफा हो जाता है। अभिषेक जायसवाल बताते है कि, उत्पादों की पैकेजिंग 30 एवं 50 किलो के पैकेट्स में की जाती है। इसके लिए पैकिंग बैग में सामग्री भरकर पैकेजिंग मशीन से सील कर ग्राहकों तक पहुँचाया जाता है। ग्राहकों द्वारा इन डिहाइड्रेट उत्पादों को पसंद किया जा रहा है। नियमित ग्राहक के साथ-साथ मांग अनुसार पैकेट्स भी तैयार किए जाते हैं।

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़ने की तैयारी

अभिषेक के उत्पादों की बिक्री बुरहानपुर जिले के साथ-साथ इंदौर, मुंबई सहित अन्य शहरों में भी हो रही है। आने वाले समय में वे अपने उत्पादों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से भी विक्रय करने की तैयारी कर रहे हैं।

योजना बनी आत्मनिर्भरता की राह

प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना से सही मार्गदर्शन, योजना का लाभ और ईच्छाशक्ति के बल पर युवा न केवल स्वयं का व्यवसाय स्थापित कर रहे हैं, बल्कि अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर बना रहे है।

आशा उइके/अनिल वशिष्ठ


Friday, January 9, 2026

मध्यप्रदेश में सफलता की एक और कहानी

भोपाल : शुक्रवार, जनवरी 9, 2026, 17:38 IST ऑर्गेनिक कृषि से सबंधित 

शेडनेड हाउस:ऑर्गेनिक खीरा ककड़ी से कमाए 6 लाख रुपये

तस्वीर जन संपर्क विवहग शिमला के सोशल मीडिया स्रोत से साभार 

भोपालशुक्रवार 09 जनवरी 2026: ( DIPR //MP info// मध्यप्रदेश स्क्रीन डेस्क)

ऑर्गेनिक कृषि से पैदा होने वाले उत्पादन लगातार जहां आम लोगों में लोकप्रिय हो रहे हैं वहीँ इसे अपनाने वाले किसान वर्ग में भी इसे लेकर बहुत उत्साह है। इन उत्पादनों से जहां उपभोक्ता का स्वास्थ्य अच्छा रहता वहीं इसकी खेती करने वालों को भी अच्छा मुनाफा मिलता है। आज देश के अलग अलग हिस्सों में बहुत से किसान इस तरह की खेती से मुनाफा कमा रहे हैं।  

आधुनिक तकनीक और जैविक खेती को अपनाकर अलीराजपुर जिले के ग्राम उण्ड़वा के प्रगतिशील कृषक श्री युवराज सिंह ठाकुर ने क्षेत्र के किसानों के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल प्रस्तुत की है।

श्री ठाकुर ने अपने 4 हजार वर्ग मीटर खेत में शेडनेड हाउस का निर्माण कर खीरा–ककड़ी की फसल ऑर्गेनिक तरीके से लगाई। इस शेडनेट हाउस में बोईगई खीरा फसल की कुल लागत लगभग 2 लाख रुपये रही। खीरा–ककड़ी की इस फसल से उन्हें मात्र 4 माह में लगभग 40 टन उत्पादन प्राप्त हुआ। श्री युवराज सिंह ने उपज को 20 रुपये प्रति किलो के भाव से बाजार में विक्रय किया। वास्तविक लागत के मुकाबले श्री युवराज ठाकुर ने करीब 6 लाख रुपये की शुद्ध कमाई की है।

कृषक श्री युवराज सिंह ठाकुर ने बताया कि ऑर्गेनिक खेती के तरीके से नवाचार की प्रेरणा उद्यानिकी विभाग और इंटरनेट की सहायता से मिली। किसान श्री ठाकुर ने खीरा-ककड़ी के अलावा खेत में आम की विभिन्न प्रजातियां लगाई, साथ ही अमरूद भी लगाया। श्री युवराज सिंह ठाकुर ने किसानों से कहा कि इस खेती को यदि सही तकनीक, मार्गदर्शन से करें तो खेती को भी लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है।

कलेक्टर श्रीमती नीतू माथुर ने किया शेडनेट हाउस का अवलोकन
आलीराजपुर जिले के ग्राम उण्ड़वा के प्रगतिशील कृषक श्री युवराज सिंह ठाकुर ने आधुनिक तकनीक और जैविक खेती को अपनाकर क्षेत्र के किसानों के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल प्रस्तुत की है।
श्री ठाकुर ने अपने 4 हजार वर्ग मीटर खेत में शेडनेड हाउस का निर्माण कर खीरा–ककड़ी की फसल ऑर्गेनिक तरीके से लगाई। इस शेडनेट हाउस बोईगई खीरा फसल की कुल लागत लगभग 2 लाख रुपये रही। उन्होंने बताया कि खीरा–ककड़ी की इस फसल से मात्र 4 माह में लगभग 40 टन उत्पादन प्राप्त हुआ। श्री युवराज सिंह ने उपज को 20 रुपये प्रति किलो के भाव से बाजार में विक्रय किया।वास्तविक लागत के मुकाबले श्री युवराज ठाकुर ने करीब 6 लाख रुपये की शुद्ध कमाई की जो कि उनकी सफलता हेतु उल्लेखनीय है।
कलेक्टर श्रीमती नीतू माथुर ने शेडनेट हाउस का किया निरीक्षण
उण्ड़वा ग्राम में खीरा–ककड़ी की इस सफल फसल का निरीक्षण करने कलेक्टर श्रीमती नीतू माथुर उनके शेडनेट हाउस पहुंचीं। उन्होंने ऑर्गेनिक तरीके से उगाई गई फसल का अवलोकन किया और किसान से संवाद कर यह जाना कि उन्हें इस नवाचार की प्रेरणा कहां से मिली तथा उद्यानिकी विभाग से किस प्रकार सहयोग प्राप्त हुआ तब उन्होंने बताया कि उद्यानिकी विभाग के संपर्क और इंटरनेट की सहायता लेकर उन्होंने यह प्रयास किया।
कलेक्टर श्रीमती माथुर ने खेती की पूरी प्रक्रिया, लागत, उत्पादन, कमाई और मार्केटिंग व्यवस्था की विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने श्री युवराज सिंह ठाकुर की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे अपनी इस सफलता को अन्य किसानों के साथ साझा करें, ताकि अधिक से अधिक किसान आधुनिक व जैविक खेती की ओर प्रेरित हों।
आम की खेती को भी मिलेगा बढ़ावा
किसान श्री युवराज सिंह ठाकुर ने खीरा ककड़ी के अलावा उनके खेत में आम की विभिन्न प्रजातियां लगाई है साथ ही अमरूद भी लगाया है। कलेक्टर श्रीमती माथुर ने उनके द्वारा लगाए गए आम की विभिन्न प्रजातियों के बगीचों का भी अवलोकन किया। उन्होंने उद्यानिकी विभाग के अधिकारी श्री कैलाश चौहान को निर्देश दिए कि वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना के अंतर्गत आम को चयनित करने हेतु प्रस्ताव भेजा जाए।
श्री युवराज सिंह ठाकुर ने जिले के किसानों से कहा कि इस खेती को यदि सही तकनीक, मार्गदर्शन से करे तो खेती को भी लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है।