Monday, August 31, 2020

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने दूसरे दिन भी किया हवाई निरीक्षण

Bhopal: Sunday: 30th August 2020 at15:53 IST
 होशंगाबाद, सीहोर, रायसेन, देवास, हरदा और विदिशा जिलों के जलमग्न क्षेत्र का लिया जायजा 
भोपाल: रविवार: 30 अगस्त 2020: (मध्यप्रदेश स्क्रीन ब्यूरो)::
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हेलीकाप्टर से निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आज दूसरे दिन पुन: प्रदेश के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कल जहां होशंगाबाद, सीहोर, रायसेन के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र देखे थे, वहीं आज फिर से होशंगाबाद, सीहोर और रायसेन जिलों के साथ ही देवास, हरदा और विदिशा जिले के जलमग्न क्षेत्रों को देखा।
कलेक्टर्स से ली विस्तृत जानकारी
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने संबंधित जिला कलेक्टर्स से दूरभाष पर चर्चा कर प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति, प्रभावित जनसंख्या, कोई जनधन क्षति यदि हुई हो और मवेशियों, फसलों एवं अन्न भण्डार की सुरक्षा के संबंध में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आज प्रात: मुख्यमंत्री निवास में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक कर पूरे प्रदेश में अतिवर्षा से जनजीवन पर पड़े प्रभाव और राहत कार्यों के संबंध में जानकारी प्राप्त की। मुख्यमंत्री श्री चौहान इसके पश्चात छह जिलों के बाढ़ प्रभावित इलाकों के हेलीकाप्टर द्वारा निरीक्षण के लिए रवाना हुए।
आपदा प्रबंधन दल सक्रिय हैं, जनता भी सावधान रहे
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कलेक्टर्स को निर्देश दिए हैं कि वे संकट की इस स्थिति में प्रभावित लोगों की पूरी सहायता के लिए सक्रिय रहें। निचली बस्तियों में पानी के भराव की स्थिति को देखते हुए समय रहते नागरिकों को अन्य स्थानों पर शिफ्ट किया जाए। नियंत्रण कक्ष सक्रियता से कार्य करें। जहां आवश्यक हो तत्काल पुलिस, होमगार्ड, सेना और आपदा प्रबंधन दल की सहायता प्राप्त की जाए। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने सभी ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में किए गए सुरक्षा प्रबंधनों की जानकारी भी प्राप्त की। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आपात स्थिति से निपटने के लिए गोताखोर, बोट, हेलीकाप्टर आदि के पुख्ता इंतजाम हैं। जिन क्षेत्रों में सड़कों पर पुल-पुलियों पर बाढ़ का पानी है, उसे पार करने का प्रयास न किया जाए। जनता स्वयं भी सावधान रहे और पिकनिक स्थलों पर जाने से भी लोग बचें। बांधों का जलस्तर बढ़ने से गेट खोलने की सूचना दी जाती है लेकिन बहुत से लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते। आम नागरिकों की सहायता के लिए राज्य सरकार तत्पर है। लेकिन आमजन का सजग रहना बहुत आवश्यक है। जिलों में पदस्थ आपदा प्रबंधन दल हर तरह के संकट में लोगों की सहायता के लिए तैयार हैं।

Sunday, August 30, 2020

CM चौहान ने बाढ़ वाले गणेशजी से बाढ़ उतरने की प्रार्थना की

Bhopal: Sunday: 30th  August 2020 at 20:54 IST
विदिशा पहुँचकर सपत्नीक पूजा-अर्चना की
*निवास पर भी प्रतिदिन सपरिवार करते हैं श्री गणेश पूजन
*पत्नी श्रीमती साधना सिंह ने निवास पर सजाई हैं विशेष गणेश झाकियां
भोपाल: 30 अगस्त 2020: (मध्यप्रदेश स्क्रीन ब्यूरो)::
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान आज बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के हवाई सर्वे के दौरान विदिशा पहुंचे तथा वहां 'बाढ़ वाले गणेश मंदिर' पहुंचकर पत्नी श्रीमती साधना सिंह सहित विघ्न विनाशक मंगलकारी श्री गणेशजी की पूजा-अर्चना की। श्री चौहान ने गणेशजी से प्रार्थना की कि प्रदेश में बाढ़ जल्दी उतरे तथा हर व्यक्ति सुरक्षित रहे। श्री गणेश बाढ़ सहित प्रदेश पर आए हर संकट को दूर करें तथा सभी का मंगल करें। श्री चौहान ने मंदिर पर आयोजित भंडारे में सर्वप्रथम सपत्नीक कन्याओं का पूजन किया तथा उन्हें भोजन कराया। इसके बाद स्वयं सपत्नीक प्रसाद ग्रहण किया।
मुख्यमंत्री श्री चौहान प्रतिदिन अपने निवास पर विराजित श्री गणेशजी का सपरिवार पूजन करते हैं। गणेश उत्सव के दौरान मुख्यमंत्री की पत्नी श्रीमती साधना सिंह द्वारा मुख्यमंत्री निवास में भगवान श्री गणेश की विशेष झांकियां सजाई गई हैं। इन झांकियों में शिव बारात, शिव पार्वती विवाह, भगवान गणेश द्वारा शिव परिक्रमा, शिव पार्वती परिवार सहित आदि सजाई गई हैं। मुख्यमंत्री की पत्नी श्रीमती साधना सिंह  विगत अनेक वर्षों से गणेश उत्सव के दौरान भगवान गणपति के लिए छप्पन भोग का प्रसाद अपने हाथों से बनाकर लगाती हैं।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने आज भी अपने पूरे परिवार के साथ निवास पर विराजित भगवान श्री गणेश का पूरे विधि विधान के साथ पूजन-अर्चन किया तथा प्रार्थना की कि प्रदेश में आई बाढ़ और कोरोना संकट  को शीघ्र समाप्त करें, प्रदेश की जनता की समृद्धि खुशहाली के लिए आशीर्वाद दें तथा सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें।

Thursday, June 25, 2020

स्व-सहायता समूह आदिवासी क्षेत्रों में भी सक्रिय हुए

गुरूवार जून 25, 2020, 19:00 IST
प्रवासी मजदूरों को इन्हीं के माध्यम से मिलेगा रोज़गार
भोपाल: 25 जून 2020: (मध्यप्रदेश स्क्रीन ब्यूरो)::
प्रदेश के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में प्रवासी आदिवासी मजदूरों और महिलाओं को स्व-सहायता समूह की गतिविधियों से जोड़कर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराये जाने के प्रयास किये जायेंगे। इसके लिये केन्द्रीय जनजातीय मंत्रालय ने प्रदेश की 65 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है। यह जानकारी प्रमुख सचिव, आदिम-जाति कल्याण श्रीमती पल्लवी जैन गोविल की अध्यक्षता में मंत्रालय में हुई बैठक में दी गई। प्रमुख सचिव ने विभिन्न जिलों के अधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से चर्चा की। बैठक में संचालक, आदिवासी क्षेत्रीय विकास योजना सुश्री शैलबाला मॉर्टिन, ग्रामीण आजीविका मिशन, मेपसेट, कौशल विकास और बैंकर्स भी मौजूद थे।
प्रमुख सचिव, आदिम-जाति कल्याण श्रीमती गोविल ने बताया कि प्रदेश में रोजगार सेतु एप के माध्यम से प्रवासी मजदूरों के कौशल के अनुसार सर्वे किया गया है। इसके माध्यम से उन्हें रोजगार के अवसर उपलब्ध कराये जायेंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास किये जायें, जिससे प्रवासी मजदूरों और उनके परिवार को जल्द से जल्द आर्थिक लाभ मिलना शुरू हो जायें। प्रमुख सचिव ने बताया कि आदिवासी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में शैक्षणिक संस्थान हैं। इनमें होने वाली गतिविधियों से भी स्व-सहायता समूहों को जोड़ा जा सकता है।
बैठक में पशु एवं मत्स्य-पालन, पोल्ट्री फार्म, डेयरी से जुड़ी अन्य गतिविधियों, खाद्य प्र-संस्करण, रेशम और मधुमक्खी-पालन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित किये जाने पर चर्चा की गई। बैठक में बताया गया कि सीधी जिले में 31 हजार से अधिक प्रवासी श्रमिक जिले में लौटे हैं। धार जिले में करीब 34 हजार प्रवासी मजदूर जिले में लौटे हैं। इन्हें रोजगार से जोड़ने के लिये मनरेगा में सर्वे का कार्य किया गया है। आयुक्त, आदिम-जाति कल्याण श्री बी. चन्द्रशेखर ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में पूर्व में तैयार शेड का उपयोग इन गतिविधियों से जोड़ने के लिये किया जा सकता है। बैठक में जिला अधिकारियों को योजना के संबंध में प्रस्ताव देने के निर्देश दिये गये।

Sunday, June 14, 2020

कोरोना संक्रमण में मध्यप्रदेश अब देश में 8वें स्थान पर आया

रविवार 14 जून 2020, को 19:40 IST
 एक दिन में एक्टिव प्रकरणों में 151 की कमी आई, 300 मरीज ठीक हुए 
*सभी पैरामीटर्स में उल्लेखनीय सुधार
*रिकवरी रेट अब 71.1 प्रतिशत, डबलिंग रेट 34 दिन
*मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कोरोना की स्थिति एवं व्यवस्थाओं की समीक्षा की
भोपाल: रविवार 14 जून 2020: (मध्यप्रदेश स्क्रीन ब्यूरो)
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि कोरोना संक्रमण में प्रदेश की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। अब प्रदेश पूरे देश में आठवें स्थान पर आ गया है। प्रदेश के सभी कोरोना पैरामीटर्स में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। एक्टिव प्रकरणों में एक दिन में 151 की कमी आई है तथा 300 मरीज स्वस्थ होकर घर गए हैं। अब हमारे एक्टिव प्रकरणों की संख्या 2666 है। हमारी डबलिंग रेट बढ़कर 34.1 दिन तथा रिकवरी रेट 71.1 प्रतिशत हो गई है। यह प्रदेश के लिए बहुत अच्छे संकेत हैं।
मुख्यमंत्री श्री चौहान आज मंत्रालय में वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश में कोरोना की स्थिति एवं व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, डीजीपी श्री विवेक जौहरी, अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य श्री मोहम्मद सुलेमान उपस्थित थे।
रिकवरी रेट में मध्यप्रदेश भारत में दूसरे स्थान पर
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि रिकवरी रेट में मध्यप्रदेश भारत में दूसरे स्थान पर है। म.प्र. की रिकवरी रेट 71.1 प्रतिशत हो गई है, जबकि भारत की 50.6 प्रतिशत है। राजस्थान की सर्वाधिक 75.3 प्रतिशत है। गुजरात की 68.9, उत्तरप्रदेश की 60 तथा तमिलनाडु की 54.8 प्रतिशत है।
कोरोना संक्रमण में म.प्र. अब आठवें स्थान पर
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बताया कि कोरोना संबंधी पैरामीटर्स में सुधार के बाद कोरोना संक्रमण में मध्यप्रदेश भारत में अब 8वें स्थान पर आ गया है। म.प्र. में 10641 कोरोना पॉजिटिव प्रकरण है। सर्वाधिक कोरोना प्रकरण महाराष्ट्र में 1,04,568, इसके बाद तमिलनाडु में 42,687, दिल्ली में 38,958, गुजरात में 23,038, उत्तरप्रदेश में 13,118, राजस्थान में 12,401 तथा पश्चिम बंगाल में 10,698 कोरोना पॉजीटिव प्रकरण हैं।
म.प्र. की डबलिंग रेट भारत में सबसे कम
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना संक्रमण की पूरे देश में मध्यप्रदेश में सबसे धीमी गति है। हमारी डबलिंग रेट 34.1 दिन है, जबकि भारत की 18.4 दिन है। गुजरात की 30.2 दिन, राजस्थान की 26.7 दिन, महाराष्ट्र की 21 दिन तथा उत्तरप्रदेश की 18.6 दिन है।
प्रभारी अधिकारी रोज मॉनीटरिंग करें
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि कोरोना की मॉनीटरिंग के लिए जिलेवार वरिष्ठ अधिकारियों को प्रभारी अधिकारी बनाया गया है। वे  रोज सुबह उठते ही तथा रात में सोने से पहले अपने जिले में कोरोना की स्थिति की मानीटरिंग करें, संबंधित कलेक्टर्स को मार्गदर्शन दें तथा इसकी रिपोर्ट दें।
कोरोना की मृत्यु दर को न्यूनतम करना है
बैठक में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने निर्देश दिए कि प्रदेश में कोरोना की मृत्यु दर को न्यूनतम करना है। इसके लिए सभी कोविड अस्पतालों में सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित की जाए। ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल का पूरा पालन किया जाए तथा हर मरीज पर विशेष ध्यान दिया जाए।
जनता को जागरूक करना आवश्यक
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि लॉकडाउन खुलने के बाद अब जनजीवन सामान्य हो रहा है। अत: लोगों को जागरूक करना आवश्यक है कि वे सभी आवश्यक सावधानियां बरतें। मास्क लगाना, दो गज की दूरी रखना, इधर-उधर नहीं थूकना,  बार बार साबुन से हाथ धोना, सैनेटाईजर का उपयोग आदि सभी आवश्यक है। जागरूकता फैलाने के लिए  जनसहयोग लिया जाए।
प्रदेश के सर्वाधिक संक्रमित शहरों में अब भोपाल नहीं
एसीएस हेल्थ श्री मो. सुलेमान ने बताया कि भारत के सर्वाधिक संक्रमित 15 शहरों में प्रदेश का इंदौर शहर सातवें स्थान पर है। इस सूची में पूर्व में भोपाल भी शामिल था परंतु अब भोपाल इनमें नहीं है।

Saturday, May 23, 2020

मध्यप्रदेश में फिर से लोकप्रिय हो रहा है सागौन का उत्पादन

 कोई जवाब नहीं सागौन की मज़बूती और खूबसरती का 
इंदौर: 23 मई 2020: (मध्यप्रदेश स्क्रीन हिंदी डेस्क)::
कोरोना युग में जीवन शैलियाँ बदल रही हैं। अब जहां ज़िंदगी जहां नए रुख अख्तियार करेगी और उसे खूबसरत बनाने के नए अंदाज़ भी बाजार में निकलेंगे वहीँ जीवन यापन के ढंग तरीकों में भी तब्दीली आएगी। अब कृषि पहले जैसी न रहेगी। वन विभाग, इन्दौर की टिश्यू कल्चर लेब में आधुनिकतम तकनीक से सागौन के उच्च गुणवत्ता वाले जो पौधे तैयार किये जा रहे है उनके उत्पादन से तो यही संकेत मिलता है।  
आप जानते हैं न सागौन? यह टीकवुड द्विबीजपत्री पौधा है। हराभरा पर्यावरण चाहते हैं तो सागौन से दोस्ती कीजिये। यकीन मानिये मन भी हराभरा ही रहेगा। यह चिरहरित यानि वर्ष भर हरा-भरा रहने वाला पौधा है। इनके क्षेत्र में या इनके आसपास रहने से माहौल हराभरा रहेगा ही। यह काफी लम्बा चौड़ा होता है। सागौन का वृक्ष प्रायः 80 से 100 फुट लम्बा होता है। कभी कभी से ज़्यादा भी हो सकता है। इसका वृक्ष काष्ठीय होता है। इसकी लकड़ी हल्की, मजबूत और काफी समय तक चलनेवाली होती है। इसलिए मज़बूती के मामले में भी सका कोई जवाब नहीं होता। इसके पत्ते काफी बड़े बड़े होते हैं।  साथ ही फूल उभयलिंगी और सम्पूर्ण होते हैं। हर काल में लगातार लोक प्रिय बने रहे सागौन का वानस्पतिक नाम टेक्टोना ग्रैंडिस (Tectona grandis) यह बहुमूल्य इमारती लकड़ी है। सदियों से इसके इस्तेमाल को पहल दी जाती है। इसका इतिहास भी काफी लम्बा है। 
सागौन को संस्कृत में 'शाक' कहा जाता है।  लगभग दो सहस्र वर्षों से भारत में यह ज्ञात है और अधिकता से व्यवहृत होती आ रही है। वर्बीनैसी (Verbenaceae) कुल का यह वृहत्‌, पर्णपाती वृक्ष है। यह शाखा और शिखर पर ताज ऐसा चारों तरफ फैला हुआ होता है। भारत, बरमा और थाइलैंड का यह देशज है, पर फिलिपाइन द्वीप, जावा और मलाया प्रायद्वीप में भी बहुतायत में पाया जाता है। भारत में अरावली पहाड़ में पश्चिम में पूर्वी देशांतर अर्थात  झांसी तक में भी पाया जाता है। इसकी लोकप्रियता का अनुमान यहाँ से लगाइये कि असम और पंजाब में भी यह सफलता से उगाया गया है। साल में 50 इंच से अधिक वर्षा वाले और25° से 27° सें. ताप वाले स्थानों में यह अच्छा उपजता है। इसके लिए तीन हज़ार फुट की ऊँचाई के जंगल अधिक उपयुक्त हैं। इससे इसे बहता हुआ पानी आसानी से दिया जा सकता है। खासियत यह भी कि सब प्रकार की मिट्टी में यह उपज सकता है पर पानी का निकास रहना अथवा अधोभूमि का सूखा रहना आवश्यक है। गरमी में इसकी पत्तियाँ अक्सर ही  झड़ जाती हैं। गरम स्थानों में जनवरी में ही पत्तियाँ गिरने लगती हैं पर अधिकांश स्थानों में मार्च तक पत्तियाँ हरी रहती हैं। पत्तियाँ एक से दो फुट लंबी और 6 से 12 इंच चौड़ी होती है। इसका लच्छेदार फूल सफेद या कुछ नीलापन लिए सफेद होता है और बहुत ही सुंदर लगता है। इसके बीज गोलाकार होते हैं और पक जाने पर गिर पड़ते हैं। बीज में तेल रहता है। बीज बहुत धीरे-धीरे अँकुरते हैं। पेड़ साधारणतया 100 से  150 फुट ऊँचे और धड़ 3 से 8 फुट व्यास के होते हैं। डोर से देखो तो इनका कद एक अलग किस्म की दिव्य भव्यता का निर्माण करता महसूस होता है।  
इसकी औषधीय खूबियां भी बहुत हैं। इसके धड़ की छाल आधा इंच मोटी, धूसर या भूरे रंग की होती है। इनका रसकाष्ठ सफेद और अंत:काष्ठ हरे रंग का होता है। अंत:काष्ठ की गंध सुहावनी और प्रबल सौरभ वाली होती है। गंध बहुत दिनों तक कायम रहती है। इसकी छाल और फूल दोनों ही विभिन्न दवाएं बनाने के काम आते हैं। 
सागौन की लकड़ी बहुत अल्प सिकुड़ती और बहुत मजबूत होती है। इस पर पॉलिश जल्द चढ़ जाती है जिससे यह बहुत आकर्षक हो जाती है। कई सौ वर्ष पुरानी इमारतों में यह ज्यों की त्यों पाई गई है। दो सहस्र वर्षों के पश्चात्‌ भी सागौन की लकड़ी अच्छी अवस्था में पाई गई है। सागौन के अंत:काष्ठ को दीमक आक्रांत नहीं करती यद्यपि रसकाष्ठ को खा जाती है।
सागौन उत्कृष्ट कोटि के जहाजों, नावों, बोंगियों इत्यादि भवनों की खिड़कियों और चौखटों, रेल के डिब्बों और उत्कृष्ट कोटि के फर्नीचर के निर्माण में प्रधानतया प्रयुक्त होता है।
अच्छी भूमि पर दो वर्ष पुराने पौद (sudling), जो ५ से १० फुट ऊँचे होते हैं, लगाए जाते हैं और लगभग 60 वर्षों में यह औसत 60  फुट का हो जाता है और इसके धड़ का व्यास डेढ़ से दो फुट का हो सकता है। अब इसे जलवायु का ही प्रभाव कहा जा सकता है कि बरमा में 80 वर्ष की उम्र के सागौन पेड़ का घेरा 2 फुट व्यास का हो जाता है, यद्यपि भारत में इतना मोटा होने में 200 वर्ष लग सकते हैं। भारत के ट्रावनकोर, कोचीन, मद्रास, कुर्ग, मैसूर, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के जंगलों के सागौन की उत्कृष्ट लकड़ियाँ अधिकांश बाहर चली जाती हैं। बरमा का सागौन पहले पर्याप्त मात्रा में भारत आता था पर अब वहाँ से ही बाहर चला जाता है। थाईलैंड की लकड़ी भी पाश्चात्य देशों को चली जाती है हालांकि इसकी मांग भारत में कम नहीं है लेकिन विदेश से अधिक धन मिल जाता है। अब इसकी पैदावार बढ़ाने पर भी तीव्रता से विचार हो रहा है। 

Wednesday, May 20, 2020

विभिन्न प्रदेशों से लौटे 4 लाख 63 हजार श्रमिक

Wednesday: 20th May 2020 at 15:55 IST
107 ट्रेनों से 1 लाख 35 हज़ार आये औरड़क मार्ग से 3 लाख 28 हजार 
भोपालबुधवार, मई 20, 2020 को 15:55 बजे: (मध्यप्रदेश स्क्रीन)
कोरोना संकट के कारण विभिन्न प्रदेशों में फँसे 4 लाख 63 हजार श्रमिक अब-तक प्रदेश में लाये जा चुके हैं। अपर मुख्य सचिव एवं प्रभारी स्टेट कंट्रोल रूम आईसीपी केशरी ने जानकारी दी है कि 107 ट्रेनो से करीब एक लाख 35 हजार और सड़क मार्ग से लगभग 3 लाख 28 हजार श्रमिक वापस आएं है।
श्री केशरी ने बताया कि 20 मई तक गुजरात से एक लाख 93 हजार, राजस्थान से एक लाख, महाराष्ट्र से एक लाख 7 हजार श्रमिकों के साथ ही गोवा, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, केरल आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु एवं तेलंगाना से भी श्रमिका आऐ हैं।
125 ट्रेन का रिक्विजिशन भेजा गया
श्री केशरी ने बताया है कि अब तक 125 ट्रेनों का रिक्विजिशन भेजा गया है। दिनांक 20 मई को सात ट्रेन विभिन्न स्थानों पर आयी। कल 21 मई को 6 ट्रेन आ रही है। अभी-तक महाराष्ट्र से 32, गुजरात से 27, हरियाणा से 16, तेलंगाना से 7, पंजाब से 5, कर्नाटक से 3, गोवा से 3, केरल, राजस्‍थान और दिल्ली से दो-दो तथा तमिलनाडु एवं जम्मू से एक-एक ट्रेन आ चुकी है।
श्रमिकों को उत्तरप्रदेश सीमा तक पहुँचाने 850 बसें और लगी
प्रदेश की सीमा पर आ रहे अन्य प्रदेशों के श्रमिकों को बस से उत्तरप्रदेश की सीमा तक पहुँचाने के लिये आज से 850 बसें और लगा दी गई है।

Monday, May 4, 2020

मदिरा एवं भांग दुकानों के संचालन की 5 मई से नई व्यवस्था

Monday: 4th May 2020 at 15:34 IST
 भोपाल, इंदौर एवं उज्जैन जिलों में बंद रहेगी मदिरा एवं भांग की बिक्री 
भोपाल: सोमवार: 4 मई  2020: (मीडिया लिंक रविन्द्र//मध्यप्रदेश स्क्रीन):: 
कोरोना को नज़र में रख कर बनाई गयी नयी व्यवस्था  
कोरोना भी बढ़ रहा है और नशे की तलब भी। हालांकि शराब इत्यादि से सरकारों को काफी आमदनी होती है इसके बावजूद राज्य की सरकार ने इसकी बिक्री की आज्ञा सभी जगहों पर नहीं दी। इसके लिए बाकायदा एक विशेष चार्ट जारी किया गया है जो कोरोना की रफ्तार को नजर में रखते हुए बना गया है। 
राज्य शासन ने प्रदेश में नोवल कोरोना वायरस संक्रमण के कारण मदिरा एवं भांग दुकानों के संचालन की जोनवार वर्गीकृत जिलों में नई व्यवस्था 5 मई से लागू की है।
नई व्यवस्था के मुताबिक प्रदेश में रेड जोन में आने वाले भोपाल, इंदौर एवं उज्जैन जिलों में मदिरा एवं भांग की समस्त दुकानें आगामी आदेश तक बंद रहेंगी। रेड जोन के अन्य जिलों जबलपुर, धार, बड़वानी, पूर्वी निमाड़(खण्डवा), देवास एवं ग्वालियर जिलों के मुख्यालय की शहरी क्षेत्रों की दुकानों को छोड़कर अन्य क्षेत्रों की मदिरा एवं भांग की दुकानें संचालित की जाएंगी। ऑरेंज जोन के अंतर्गत आने वाले खरगौन, रायसेन, होशंगाबाद, रतलाम, आगर-मालवा, मंदसौर, सागर, शाजापुर, छिन्दवाड़ा, अलीराजपुर, टीकमगढ़, शहडोल, श्योपुर, डिण्डौरी, बुरहानपुर, हरदा, बैतूल, विदिशा, मुरैना एवं रीवा के कंटेनमेंट एरिया को छोड़कर शेष मदिरा एवं भांग दुकानें संचालित की जाएंगी। ग्रीन जोन के अंतर्गत आने वाले जिलों की सभी मदिरा एवं भांग दुकानों का संचालन प्रारंभ किया जाएगा।
सभी लायसेंसियों को निर्देशित किया गया है कि वे दुकानों पर गृह मंत्रालय, भारत सरकार तथा वाणिज्यिक कर विभाग मध्यप्रदेश शासन द्वारा जारी एसओपी और दो गज की दूरी का पालन भी सुनिश्चित करें।