Thursday, June 1, 2023

120 लाड़ली लक्ष्मी एक जून को जाएँगी बाघा-हुसैनी वाला बार्डर

31st May 2023 at 14:23 IST

मुख्यमंत्री श्री चौहान हरी झंडी दिखा कर करेंगे रवाना


भोपाल: बुधवार, 31मई 31, 2023: (मध्य प्रदेश स्क्रीन ब्यूरो)::

"माँ तुझे प्रणाम" योजना में प्रदेश की 120 लाड़ली लक्ष्मी एक जून को बाघा-हुसैनी वाला बार्डर की अनुभव यात्रा पर जाएंगी। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान दोपहर 12 बजे रवीन्द्र भवन से लाड़ली लक्ष्मियों को हरी झंडी दिखा कर रवाना करेंगे। दोपहर 3:30 बजे दादर-अमृतसर एक्सप्रेस से रवाना होंगी। खेल और युवा कल्याण मंत्री श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया भी उपस्थित रहेंगी।

अनुभव यात्रा में जाने वाली लाड़ली लक्ष्मियाँ बाघा-हुसैनी वाला बार्डर (अमृतसर पंजाब), स्वर्ण मंदिर, जलियाँवाला बाग और रामतीर्थ का भ्रमण करेंगी। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष निर्णय लिया गया था कि प्रदेश की लाड़ली लक्ष्मी बेटियाँ भी "माँ तुझे प्रणाम" योजना का हिस्सा बनेगी। वर्ष 2022 में 200 लाड़ली लक्ष्मी बेटियों ने बाघा बार्डर की यात्रा की थी।

"माँ तुझे प्रणाम" योजना

मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्रदेश के युवाओं में देश की सीमाओं की सुरक्षा के प्रति जागृति लाने, राष्ट्र के प्रति समर्पण, साहस की भावना जाग्रत करने एवं युवाओं को सेना तथा अर्द्ध सैनिक बलों के प्रति आकर्षित करने के उद्देश्य से वर्ष 2013 में "माँ तुझे प्रणाम" योजना प्रारंभ की गई थी। अब तक 14 हजार 293 युवाओं को भ्रमण पर भेजा गया, जिसमें 7 हजार 779 युवक और 6 हजार 514 युवतियाँ शामिल है। इन्हें लेह-लद्दाख, कारगिल, आर.एस. पुरा (जम्मू-कश्मीर), बाघा-हुसैनीवाला बार्डर (अमृतसर, पंजाब), तनोत माता का मंदिर-लोंगेवॉल (राजस्थान), बीकानेर (राजस्थान), बाडमेर (राजस्थान), कोच्चि (केरल), नाथूला-दर्रा (सिक्किम), तुरा (मेघालय), पेंद्रा-पोल (पश्चिम बंगाल), जय गाँव (पश्चिम बंगाल), अण्डमान-निकोबार और कन्याकुमारी (तमिलनाडु) का भम्रण करवाया गया।

बिन्दु सुनील//समाचार 

Wednesday, April 5, 2023

कांटों वाली भूमि पर फूलों की खेती

Indore: 05 April 2023 at 16:11

प्री-वेडिंग शूट के लिए भी हो रही है लगातार लोकप्रिय 

इन्दौर: 5 अप्रैल 2023: (मध्यप्रदेश स्क्रीन डेस्क)::

चित्तौड़गढ़-भुसावल राष्ट्रीय राजमार्ग पर लोहारी गांव के पास नहर की एक ढलान इन दिनों फूलों वाली ढलान के लिए लोकप्रिय हो रही है। यह ढलान प्री-वेडिंग के कपल्स को खूब आकर्षित कर रही है। इस स्थान के सौंदर्य को पिक्चर में कैद करने और यादगार दृश्य बनाने के लिए अब तक यहां 4 जोड़ों ने प्री-वेडिंग शूट किया है। साथ ही राजमार्ग से गुजरने वाले यात्रियों को भी खुबसूरत निमाड़ का एहसास करा रही है। यहां फूलों की बगिया लगाने की भी बड़ी रोचक कहानी है। खेडीफाटा के किसान शंकर पाटीदार ने बताया कि वे 10 से 15 वर्ष से मिर्च या कपास की खेती में बॉर्डर के रूप में गेंदा फूल लगाया करते थे। जो किसी कीट व्याधि के इंडिकेटर के तौर पर काम किया करती थी। किसी भी फसल पर अटैक आने से पहले फूलों पर अटैक होता है। लेकिन जब रासायनिक छिड़काव या खाद नहीं देना पड़ा और बाजार में वजन व भाव अच्छा मिलने लगा तो पूरी तरह फूलों की खेती की शुरुआत की।     

24 हजार रुपये की लागत से 17 हजार गेंदा 2.5 एकड़ में लगाएँ 

किसान शंकरजी ने बताया कि फूलों की खेती करना आसान भी है और सस्ता भी। 2.5 एकड़ की इस बगिया को बसाने में मात्र 24 हजार रुपये खर्च किये गए है। 17 हजार पौधों की इस बगिया से 80 दिनों बाद फूल आना भी प्रारम्भ हुए हैं। जो लगातार 70 से 80 दिनों तक फसल रहती है। वे 2.50 एकड़ के क्षेत्र में दूसरी बार गेंदा की किमको सीड किस्म की खेती कर रहे हैं। पिछले वर्ष इसी खेत से 150-160 क्विंटल फूलों का उत्पादन ले चुके हैं। 20 से 25 रुपये के भाव से उन्हें फूल उत्पादन में अच्छा मुनाफा हुआ। क्योंकि इस फसल में किसी कीटनाशक या रासायनिक खाद की जरूरत नहीं पड़ती। इस फसल का अधिक मुनाफा लेने के लिए गणेश चतुर्थी, नवरात्रि और दीपावली के सीजन को बेहतर अवसर मान सकते हैं।

गेंदा फूल की इस ढलान में पानी नहीं था तो ट्यूबवेल कराने पर हुए मजबूर    

55 वर्षीय एमकॉम में शिक्षित शंकर भाई ने बताया कि खेती तो उनके पास पर्याप्त है लेकिन 1990 के दशक में पानी नहीं होने से एक फसल ले पाते थे। 1990 से 2010 के मध्य उन्होंने 60 एकड़ खेत के अलग-अलग हिस्सें में अब तक 48 ट्यूबवेल 600 फीट से अधिक गहराई के करवा चुके हैं। लेकिन पानी की पर्याप्त उपलब्धता नहीं हो पाई। फिर 2013 में इंदिरा सागर परियोजना की नहर निकलने के बाद से तस्वीर और खेती का नजरिया बदला। नहर आने के बाद उनके 5 ट्यूबवेल सालभर पानी दे पा रहे है। अब आसपास का पूरा क्षेत्र गर्मी में भी लहलहा रहा है।    

उद्यानिकी विभाग ने पहली बार ड्रिप सिंचाई से परिचय कराया    

कसरावद के वरिष्ठ उद्यान  विस्तार अधिकारी श्री जगदिश मुजाल्दे ने बताया कि 2005-06 में उद्यानिकी विभाग ने पानी के प्रबंधन करने की कला ड्रिप सिंचाई से परिचय कराते हुए 5 एकड़ में ड्रिप सिंचाई अनुदान पर दिया था। इसके बाद अब तक समय-समय पर उनको और भाईयों को इसी भूमि पर 410322 रूपये के अनुदान पर 27 एकड़ में ड्रिप सिंचाई का लाभ दिया। आज वे पूरे 60 एकड़ खेत में ड्रिप सिंचाई से खेती कर रहे है। उद्यानिकी उपसंचालक श्री केके गिरवाल ने बताया कि जिले में वर्ष 2021-22 में फ्लोरीकल्चर का कुल रकबा 152 हे. और इस वर्ष 2022-23 में 220 हे. है।                     महिपाल अजय


Monday, April 3, 2023

नसरूल्लागंज का नाम अब हुआ भैरूंदा

Sunday: 2nd April 2023 at 10:56 PM

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने वायदा निभाया

*मुख्यमंत्री श्री चौहान भैरुंदा के गौरव दिवस में हुए शामिल

*भैरूंदा को 80 करोड़ से अधिक के निर्माण एवं विकास कार्यों का लोकार्पण/भूमिपूजन

*इस मौके पर भैरूंदा नगर विकास के लिए 100 करोड़ रूपये की घोषणा

भोपाल: रविवार, अप्रैल 2, 2023, 22:24 IST:

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार मध्यप्रदेश के नवनिर्माण में पूरे ज़ोरशोर से लगी हुई है। मध्यप्रदेश को नया रंगरूप देने के प्रयास में लगातार लगी हुई है। इसी अभियान के अंतर्गत कुछ स्थानों के नाम भी बदले जा रहे हैं। अब नसरूलगंज का नाम बदल कर भैंरूदा कर दिया गया है। 

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि आज नसरूल्लागंज का नाम बदल कर भैरूंदा कर दिया गया है। उन्होंने पुराने नाम को ऐतिहासिक अन्याय बताते हुए कहा कि नाम परिवर्तन से हमारा वैभव फिर लौटा है। उन्होंने नगर के ऐतिहासिक बदलाव के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री श्री अमित शाह का आभार व्यक्त किया।

इस
अवसर पर मुख्यमंत्री श्री चौहान ने
रविवार को विशाल जन-समूह के बीच नसरूल्लागंज का नामकरण भैरूंदा करने का उदघोष नगर के गौरव दिवस पर किया। उन्होंने सिंगल क्लिक से नसरुल्लागंज का नाम बदलकर भेरूंदा करने के साथ ही गजट नोटिफिकेशन सांसद श्री रमाकांत भार्गव और अध्यक्ष नगर परिषद श्री मारुति शिशिर को सौंपा। नागरिकों ने वर्षों पुरानी मांग पूर्ण होने और फिर से वैभव लौटाने के लिए मुख्यमंत्री का आभार माना। हजारों की संख्या में उपस्थित नागरिकों का उत्साह देखते ही बनता था। इस अवसर पर आतिशबाजी भी की गई।

विकास परियोजनाओं की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री श्री चौहान ने गौरव दिवस पर नगर को 80 करोड़ 94 लाख से अधिक राशि के अनेक निर्माण एवं विकास कार्यों की सौगात दी। इन कार्यों में 76 करोड़ 25 लाख 51 हजार रूपए की लागत के 16 निर्माण कार्यों का भूमि-पूजन तथा 4 करोड़ 68 लाख 50 हजार रूपए के दो निर्माण कार्यों का लोकार्पण शामिल है। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने भैरूंदा नगर के विकास के लिये 100 करोड़ रूपये देने की घोषणा भी की।

अपनी सरकार की तरफ से किए गए कार्यों के कुछ अंश बताते हुए मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि आज पूरे क्षेत्र में सिंचाई, सड़क, बिजली, शिक्षा आदि के अनगिनत कार्य हुए है। भैरूंदा से अब 350 करोड़ रूपये की लागत से नेशनल हाइ-वे बनाया जायेगा, जो खातेगांव, बडनगर और इटारसी को भी जोड़ेगा। उन्होंने भैरूंदा के दो दर्जन से अधिक गाँव को सीप अंबर लिफ्ट एरिगेशन योजना से जोड़ने की घोषणा की। साथ ही करीब एक दर्जन गाँव में बेराज निर्माण की मंजूरी भी दी।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने लाड़ली बहना योजना को अपने कार्यकाल की सर्वाधिक अच्छी योजना निरूपित करते हुए कहा कि यह योजना गरीब परिवार में खुशहाली के साथ ही बहनों के सशक्तिकरण, मान-सम्मान बढ़ाने और आत्म-निर्भर बनाने की योजना है। उन्होंने सभी पात्र बहिनों से शिविर में बिना कुछ दिए आवेदन करने का आहवान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सी.एम. राइज स्कूल गाँव के गरीब परिवार के बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा का माध्यम बनेंगे। उन्होंने कहा कि लाड़ली लक्ष्मी योजना में बेटियों की शिक्षा का खर्च राज्य सरकार उठा रही है। प्रदेश में अब मेडिकल और इंजीनियरिंग की शिक्षा अब हिंदी भाषी बच्चे भी कर सकेंगे और अपना भविष्य सवांर सकेंगे। उन्होंने भैरूंदा में स्किल पार्क बनाने की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी नौकरियों में भर्ती, स्व-रोजगार योजनाओं से रोजगार देने के साथ ही अब मुख्यमंत्री युवा कौशल कमाई योजना भी जून से लागू की जायेगी। योजना में काम सीख रहे युवाओं को 8 हजार रूपए भी मिलेंगे।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में शराब को हतोत्साहित करने के लिये सभी अहाते बंद कर दिये गये हैं। इस दिशा में समाज को भी सकारात्मक रूख अपनाना होगा। सांसद श्री रमाकांत भार्गव ने भैरूंदा का वैभव लौटाने के लिये मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। गौरव दिवस पर 40 से अधिक विभागीय गतिविधियों एवं उपलब्धियों पर प्रदर्शनी लगाई गई। मुख्यमंत्री ने नगर की विभूतियों को सम्मानित भी किया। कार्यक्रम में स्थानीय जन-प्रतिनिधि, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।

 राजेश बैन

Wednesday, March 29, 2023

मध्यप्रदेश में मछुआरो की वित्तीय मज़बूती का एक और अभियान

Bhopal: Tuesday: 28th March 2023 at 11:34 PM

मछुआरों की सुविधा और वित्तीय सुरक्षा में होगी अब और बढ़ोतरी

 मछुआरों के  क्रेडिट कार्ड बनाने को विशेष शिविर :मंत्री श्री सिलावट


भोपाल : मंगलवार, 28 मार्च 2023: (मध्यप्रदेश स्क्रीन डेस्क)::

मछुआरों की ज़िंदगी और आर्थिक हालात कितने कठिन होते हैं इसका अनुमान दूर बैठ कर नहीं लगाया जा सकता। इस ज़िंदगी को कुछ देर जी कर शायद थोड़ा बहुत समझा जा सके। जिन लोगो ने अर्नेस्ट हैमिंग्वे का नावल बूढ़ा आदमी और सागर पदः है वे भी शायद इस कठिन जीवन की कुछ झलक पा सकें। इन लोगों की आर्थिक रीढ़ मज़बूत करने के लिए मध्यप्रदेश सरकार समय समय पर कदम उठाती रही है। इन्हें छात्रवृति देने की बात हो या इन्हें क्रेडिट कार्ड देने की तो सर्कार ने बहुत से महत्वपूर्ण निर्णय समय समय पर लिए हैं।   

जल-संसाधन, मछुआ-कल्याण और मत्स्य विकास मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने  मछुआरों की सर्वांगीण उन्नति के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उन्हें समय पर दिये जाने के निर्देश दिये है। उन्होंने कहा कि पात्र मछुआ भाईयों के किसान क्रेडिट कार्ड बनाने के लिए शिविर लगाए जाएँ। मंत्री श्री सिलावट ने आज निवास कार्यालय में विभागीय समीक्षा की।

मंत्री श्री सिलावट ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व और मंशानुसार मत्स्य विभाग सराहनीय कार्य कर रहा है। आगे भी इसी तरह से कार्य करते रहें। उन्होंने विभागीय योजनाओं में लक्ष्य पूर्ति के लिए अधिकारियों को मछुआ सोसायटी से संपर्क करने और मत्स्य उत्पादन को बढ़ाने के निर्देश दिये।

प्रमुख सचिव श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव, मत्स्य महासंघ के प्रबंध संचालक श्री पुरूषोत्तम धीमान, संचालक श्री भारत सिंह, सेक्रेटरी श्रीमती ज्योति टोप्पो और डिप्टी डायरेक्टर श्री रवि कुमार गजभिये भी इस मौके पर उपस्थित रहे।

गौरतलब है कि इस संबंध में पहले भी कदम उठाए जाते रहे हैं। सात सितंबर 2021 की एक विज्ञप्ति के मुताबिक उस समय भी मछुआरों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता और छात्रवृत्ति की राशि में हुई वृद्धि हुई है। मत्स्य महासंघ की 25 वीं वार्षिक साधारण सभा की बैठक में इसे लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे। 

मछुआ कल्याण और मत्स्य विकास मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने महासंघ की 25वीं वार्षिक साधारण सभा को संबोधित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश सरकार का मुख्य उद्देश्य अंतिम छोर तक के व्यक्ति को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। इसके लिए सरकार हर संभव प्रयास कर रही है। मछुआ समाज मुख्य रूप से मत्स्य पालन और आखेट का कार्य करते हुए जीवन-यापन कर रहा है इनकी आर्थिक स्थिति को बेहतर करने के लिए ही मत्स्य महासंघ का स्थापना की गई थी। लड़कियों के विवाह के लिए "मीनाक्षी कन्या विवाह" जाल-नाव सहित अन्य आर्थिक संबल प्रदान करने वाली योजनायें  मत्स्य महासंघ संचालित कर रहा है।

मंत्री श्रीं सिलावट ने कहा कि सहकारिता के उद्देश्य पर आधारित यह मत्स्य महासंघ सबका विकास, सबका साथ, और सबके विश्वास की अवधारणा पर काम कर रहा है। मंत्री श्री सिलावट ने मछुआ महासंघ की महासभा में गंभीर बीमारी के लिए आर्थिक सहायता राशि को बढ़ाकर 40 हजार से 50 हजार, तकनीकी शिक्षा छात्रवृत्ति योजना में 20 हजार से बढ़ाकर 30 हजार रुपए और मछुआ सोसाइटी  के सदस्यों में किसी की मृत्यु होने पर आर्थिक सहायता राशि 7500 से बढ़ाकर 10 हजार रूपये कर दी है।

साधारण सभा में निर्णय लिया गया कि मेजर कॉर्प और अन्य प्रजाति की मछली पकड़ने पर 32 रूपए किलो के स्थान पर अब 34 रुपए किलो और अन्य छोटी मछलियों को पकड़ने पर 19 रूपए प्रति किलो के स्थान पर 20 रूपए प्रति किलो मत्स्याखेट की  दर निर्धारित कर दी है। इसके साथ ही मछुआ समिति की मांग पर सभी मछुआरों को लाइफ जैकेट उपलब्ध कराने के संबंध में श्री सिलावट ने निर्देश दिए हैं।

मंत्री श्री सिलावट ने संचालक मत्स्य विकास और मत्स्य महासंघ के प्रबंध संचालक को निर्देश दिए कि सभी मछुआरों के क्रेडिट कार्ड दिसंबर तक बन जाने चाहिए, जिससे बैंको से जीरो ब्याज दर पर ऋण राशि उपलब्ध हो। महा सभा की बैठक में मंत्री ने सभी मछुआ सोसायटी के अध्यक्षों को माला पहनाकर और बुके देकर सम्मानित किया। उन्होंने संभाग स्तर पर भी क्षेत्रीय बैठकों का आयोजन करने तथा समिति में महिला सदस्यों की भागीदारी के निर्देश दिए हैं।

साधारण सभा में मत्स्य महासंघ द्वारा प्रस्तुत 56 करोड़ की आय और 36 करोड़ के व्यय का बजट सर्वसम्मति से पारित किया गया। प्रदेश के 27 जिलों के जलाशय में मछुआ समिति क्रियाशील हैं। इस वर्ष 445 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से 20 करोड़ की राशि मछुआरों को प्रदान की गई है। मत्स्य महासंघ में 216 और विभाग में 2 हजार मछुआ समिति कार्यरत हैं।

Saturday, December 3, 2022

“अनुगूंज” कार्यक्रम 4 एवं 5 दिसम्बर को

Saturday 3rd December 2022 at 18:38 IST

मुख्यमंत्री 5 को अनुगूँज के धनक कार्यक्रम में होंगे मुख्य अतिथि

*स्कूल शिक्षा मंत्री श्री परमार 4 दिसम्बर को अनुगूँज का करेंगे शुभारंभ

भोपाल: शनिवार 03 दिसम्बर 2022: (मध्यप्रदेश स्क्रीन ब्यूरो)::

स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा ''कला से समृध्द शिक्षा'' के अंतर्गत मध्यप्रदेश में प्रतिवर्ष होने वाले शासकीय विद्यालयों के विद्यार्थियों के सांस्कृतिक कार्यक्रम ''अनुगूँज'' का आयोजन 4 और 5 दिसम्बर को किया जायेगा। स्कूल शिक्षा (स्वतंत्र प्रभार) राज्य मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार 4 दिसंबर को शुभारंभ करेंगे। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान इस कार्यक्रम में 5 दिसम्बर को समापन संध्या में मुख्य अतिथि होंगे। 

''अनुगूँज'' का यह चतुर्थ कार्यक्रम शासकीय सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय, भोपाल में किया जा रहा है, जिसमें मध्यप्रदेश के शासकीय विद्यालयों के लगभग 700 से अधिक विद्यार्थी राज्य स्तर पर अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।

''अनुगूँज'' मध्यप्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग का वैश्विक शिक्षा प्रणाली STEAM (साइंस, टैक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, आर्टस और मैथेमेटिक्स) की दिशा में ''कला से समृध्द शिक्षा'' का अभिनव कार्यक्रम है। अब अनुगूँज के कार्यक्रम अन्य संभागों में भी किये जा रहे हैं। इन संभागों की कुछ मोहक प्रस्तुतियॉं राजधानी भोपाल के राज्य स्तरीय कार्यक्रम में भी शामिल हैं। 

विद्यार्थियों द्वारा पहले दिन अनुगूँज कि 'रंगकार' कार्यक्रम में नाट्य प्रस्तुतियों के साथ ही माइम और बैले नृत्य नाटिका का मंचन किया जाएगा। वहीं दूसरे दिन 'धनक' में वाद्य यन्त्र, गीत संगीत की जुगलबंदी, भारत के विविध शास्त्रीय नृत्य फ्यूज़न और वेस्टर्न नृत्य आदि की मनमोहक प्रस्तुतियाँ होंगी। अनुगूँज के ''सृजन'' भाग में माटीकला, फोटोग्राफी और चित्रकला कार्यशालाओं में विद्यार्थियों द्वारा सृजित कलाकृति की प्रदर्शनी में बच्चों की सहज अभिव्यक्ति और उनकी कलात्मक अभिरूचियों को प्रदर्शित किया जाएगा। 

केन्द्र सरकार द्वारा परिकल्पित ''एक भारत–श्रेष्ठ भारत'' कार्यक्रम में सांस्कृतिक आदान – प्रदान के लिए मध्यप्रदेश को उत्तर पूर्वी राज्यों, मणिपुर एवं नागालैंड के साथ समूहबद्ध किया गया है, जिससे अंतर्राज्यीय संस्कृति, कलाओं एवं शैलियों को जानने का अवसर मिले। इस तारतम्य में अनुगूँज 2022 में इन राज्यों की सांस्कृतिक झलक भी दिखाई देगी।  

अनुगूँज में होने वाले सभी कार्यक्रमों का मंच संचालन एवं कार्यक्रमों की व्यवस्थाओं का दायित्व शासकीय सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय शिवाजी नगर भोपाल के छात्र-छात्राओं द्वारा किया जाएगा।             राजेश दाहिमा

Tuesday, October 4, 2022

उज्जैन का प्राचीन वैभव "श्री महाकाल लोक" में होगा अवतरित

Tuesday 4th October 2022 at 14:22 PM IST

जनसंपर्क संचालनालय की विशेष फीचर श्रृंखला

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 11 अक्टूबर को प्रथम चरण लोकार्पण करेंगे 


भोपाल: 4 अक्टूबर 2022, (मध्यप्रदेश स्क्रीन ब्यूरो)::

भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली, प्राचीन काल-गणना, ज्योतिष, संस्कृति का केन्द्र, महाकवि कालिदास एवं सम्राट विक्रमादित्य की गौरवशाली नगरी का प्राचीन वैभव अब नए स्वरूप "श्री महाकाल लोक" में अवतरित होने जा रहा है। पौराणिक नगरी उज्जैन के वैभव, परंपराओं, धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक महत्व को पूरी तरह ध्यान में रखते हुए राज्य शासन ने श्री महाकाल क्षेत्र के समग्र विकास के लिए प्रभावी विकास योजना बनाई, जो मूर्तरूप ले रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी 11 अक्टूबर को गरिमामय समारोह में योजना के प्रथम चरण के कार्यों का लोकार्पण करने उज्जैन आ रहे हैं।

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में सिंहस्थ-2016 में उज्जैन में विश्व स्तरीय अधो-संरचना का विकास किया गया था। अब ‘’बनारस कॉरिडोर’’ की तर्ज पर "महाकाल लोक" बनाया जा रहा है। योजना के प्रथम चरण में भगवान श्री महाकालेश्वर के आँगन में छोटे एवं बड़े रूद्र सागर, हरसिद्धि मन्दिर, चार धाम मन्दिर, विक्रम टीला आदि का विकास किया गया है। दूसरे चरण में महाराजवाड़ा परिसर का विकास किया जायेगा, जिसमें ऐतिहासिक महाराजवाड़ा भवन का हैरिटेज के रूप में पुनर्पयोग, कुंभ संग्रहालय के रूप में पुराने अवशेषों का समावेश एवं इस परिसर का महाकाल मन्दिर परिसर से एकीकरण होगा।

श्री महाकाल लोक का प्रथम चरण, जिसे तकनीकी रूप से ‘’मृदा प्रोजेक्ट-1’’ कहा जाता है, पूर्ण हो चुका है। प्रथम चरण के कार्यों का 11 अक्टूबर को लोकार्पण के बाद इसे आम श्रद्धालुओं के लिये खोल दिया जायेगा। प्रथम चरण के कार्यों के खुलते ही हरि फाटक ब्रिज की चौथी भुजा से आकर श्रद्धालु जैसे ही त्रिवेणी संग्रहालय पहुँचेंगे, उन्हें बाबा श्री महाकाल के अलौकिक दर्शन होंगे।

"श्री महाकाल लोक" क्षेत्र विकास परियोजना की अनुमानित लागत 800 करोड़ रूपये है, जिसमें प्रथम चरण में 350 करोड़ रूपये से महाकाल प्लाजा, महाकाल कॉरिडोर, मिड-वे झोन, महाकाल थीम पार्क, घाट एवं डैक एरिया, नूतन स्कूल कॉम्पलेक्स और गणेश स्कूल कॉम्पलेक्स का कार्य पूर्ण हो चुका है। महाकाल कॉरिडोर के प्रथम घटक में पैदल चलने के लिए उपयुक्त 200 मीटर लम्बा मार्ग बनाया गया है। इसमें 25 फीट ऊँची एवं 500 मीटर लम्बी म्युरल वॉल बनाई गई है। साथ ही 108 शिव स्तंभ, शिव की विभिन्न मुद्राओं सहित निर्मित हो चुके हैं, जो अलग ही छटा बिखेर रहे हैं। लोटस पोंड, ओपन एयर थिएटर तथा लेक फ्रंट एरिया और ई-रिक्शा एवं आकस्मिक वाहनों के लिए मार्ग भी  बनाए गए हैं। बड़े  रूद्र सागर की झील में स्वच्छ पानी भरा गया है। साथ ही यह सुनिश्चित किया गया है कि पानी स्वच्छ ही रहे।

महाकाल थीम पार्क में भगवान श्री महाकालेश्वर की कथाओं से युक्त म्यूरल वॉल, सप्त सागर के लिए डैक एरिया एवं उसके नीचे शॉपिंग और बैठक क्षेत्र सुविधाएँ विकसित की गई हैं। इसी तरह त्रिवेणी संग्रहालय के समीप कार, बस और दोपहिया वाहन की मल्टीलेवल पार्किंग बन चुकी है। इस क्षेत्र में धर्मशाला एवं अन्न क्षेत्र भी बनाये जा रहे हैं। रोड क्रॉसिंग के जरिये पदयात्रियों की कनेक्टिविटी विकसित की गई है। मिड-वे झोन में पूजन सामग्री की दुकानें, फूड कोर्ट, लेक व्यू रेस्टोरेंट, लेक फ्रंट डेवलपमेंट, जन-सुविधाएँ और टॉवर सहित निगरानी एवं नियंत्रण केन्द्र की स्थापना भी की गई है। सुगम मन्दिर पहुँच मार्ग के तहत त्रिवेणी संग्रहालय से हरसिद्धि मार्ग, भगत सिंह मार्ग, हरि फाटक ब्रिज से महाकाल चौराहा, बेगमबाग रोड, सरस्वती शिशु मन्दिर के समानांतर मार्ग, महाकाल चौराहे से महाकाल मन्दिर, महाकाल थाना से बड़ा गणेश नया मार्ग, बड़ा गणेश मन्दिर रोड, नृसिंह घाट के समानांतर नूतन स्कूल तक नवीन मार्ग, हरसिद्धि मन्दिर से भगतसिंह मार्ग को चौड़ा किया गया है और नये मार्ग बनाये गये हैं।

मृदा प्रोजेक्ट दूसरा चरण

श्री महाकाल लोक क्षेत्र विकास योजना के दूसरे चरण ‘’मृदा प्रोजेक्ट-2’’ में महाराजवाड़ा परिसर का विकास किया जायेगा। इस चरण के कार्य वर्ष 2023-24 में पूर्ण होंगे। इसमें ऐतिहासिक महाराजवाड़ा भवन का हैरिटेज के रूप में पुनर्पयोग, पुराने अवशेषों का समावेश कर भवन का आंशिक उपयोग कुंभ संग्रहालय के रूप में करते हुए इस परिसर का महाकाल मन्दिर परिसर से एकीकरण किया जायेगा। स्थानीय कला एवं संस्कृति को दर्शाते हुए सांस्कृतिक हाट का निर्माण होगा। रामघाट फसाड ट्रीटमेंट के घटक में रामघाट की ओर जाने वाले पैदल मार्ग का कायाकल्प, फेरी एवं ठेला व्यवसाइयों के लिये अलग व्यवस्था, वास्तुकलात्मक तत्वों के प्रयोग द्वारा गलियों का सौन्दर्यीकरण तथा रामघाट पर सिंहस्थ थीम आधारित डायनेमिक लाइट शो किया जायेगा। पार्किंग, धर्मशाला, प्रवचन हॉल एवं अन्न क्षेत्र का भी निर्माण किया जा रहा है। दूसरे चरण में महाराजवाड़ा, रूद्र सागर जीर्णोद्धार, छोटा रूद्र सागर लेक फ्रंट, रामघाट का सौन्दर्यीकरण, पार्किंग एवं पर्यटन सूचना केन्द्र, हरि फाटक पुल को चौड़ा करना एवं रेलवे अण्डरपास तथा रूद्र सागर पर पैदल पुल, महाकाल द्वार, बेगमबाग मार्ग का विकास, रूद्र सागर पश्चिमी मार्ग तथा महाकाल पहुँच मार्ग का उन्नयन किया जायेगा।

इसमें छोटा रूद्र सागर लेक फ्रंट विकास योजना में लैंडस्केपिंग सहित मनोरंजन केन्द्र, वैदिक वाटिका एवं योग केन्द्र, मंत्रध्वनि स्थल एवं पार्किंग का विकास होगा। पार्किंग सूचना केन्द्र एवं विक्रय केन्द्र का विकास किया जायेगा। रूद्र सागर जीर्णोद्धार योजना में स्लज को हटाते हुए रूद्र सागर लेक की डीसिल्टिंग की जायेगी। रूद्र सागर को शिप्रा नदी से जोड़ा जायेगा। हरि फाटक ओवर ब्रिज की चारों भुजाओं को चौड़ा किया जायेगा और जयसिंहपुरा के समीप रेलवे अण्डरपास बनाया जायेगा।

श्री महाकालेश्वर थाने के पास स्थित महाकाल द्वार का संरक्षण किया जायेगा और यहाँ हेरिटेज कॉरिडोर विकसित होगा। इसी तरह बेगमबाग क्षेत्र का विकास एवं सौन्दर्यीकरण भी होगा। रूद्र सागर पर 210 मीटर लम्बा पैदल पुल बनाया जायेगा, जो पीएचई की पानी की टंकी से महाकाल थीम पार्क को जोड़ेगा। इस चरण में श्री महाकाल मन्दिर परिसर के आगे के भाग का लगभग 70 मीटर तक विस्तार किया जायेगा। इसमें 11 भवनों के अधिग्रहण की कार्यवाही पूर्ण हो चुकी है। इस क्षेत्र में बैठने का स्थान, लैंडस्केपिंग एवं पैदल मार्ग भी प्रस्तावित हैं।

Saturday, September 24, 2022

गायों की अतिदयनीय हालत भी झंकझोरती क्यों नहीं सत्ता को

24th September 2022 at 5:06 PM 

समाज भी मूक दर्शक बना देखता ही रहता है 

एल एस हरदेनिया ने लिखा मुख्यमंत्री को पत्र 

नीचे दिया गया पत्र जानेमाने समाज सेवी,पत्रकार और सक्रिय लेखक एल एस हरदेनिया ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज चौहान को लिखा है। इसमें गायों की दयनीय हालत की जो तस्वीर शब्दों में बताई गई है वह केवल मध्यप्रदेश के को छह क्षेत्रों की बात करती है लेकिन वास्तव में यह दृश्य पूरे देश के बहुत से इलाकों का है। उत्तरभारत के पंजाब और आसपास भी यह सब देखने को मिल जाता है। कहने को गौ माता कहा जाता है लेकिन वास्तव में जो हालत है वह किसी मान की न हो। शायद  धर्म कर्म और नैतिकता गौण हो गई है और सियासत व फायदे नंबर एक पर आ गए हैं। श्री हरदेनिया का पत्र जिस स्थिति को दिखा रहा है वह सभी का ध्यान मांगती है जो धर्म की बात करते हैं, गौ माता की बात करते हैं, गौ सेवा और गौशाला की बात करते हैं। पढ़िए श्री हरदेनिया का पत्र। 

प्रति, 

माननीय श्री शिवराज सिंह चौहान,
मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश

मैं दिनांक 21 सितंबर को अपने गांव (कौड़िया, जिला नरसिंहपुर) गया था। मैं भोपाल से उदयपुरा के रास्ते से गया था। रास्ते में मुझे अनेक स्थानों पर गायों के झुंड दिखे। हर झुंड में 50 से लेकर 100 से ज्यादा गायें थीं। भोपाल से उदयपुरा के बीच कम से कम 15 स्थानों पर गायों के झुंड सड़क के बीचों-बीच बैठी हुई अवस्था में या खड़े हुए मिले। स्पष्टतः ये गायें भूखी और प्यासी होंगीं। रास्ते में मुझे 8 से 10 गायें मृत अवस्था में भी मिलीं। इनकी मृत्यु हुए निश्चित ही कई दिन बीत गए होंगें क्योंकि उनसे भीषण दुर्गन्ध आ रही थी और उनके शरीर में कीड़े पड़ चुके थे।

सवाल यह है कि इतनी बड़ी संख्या में ये गायें सड़क पर कैसे पहुंचीं? इनके मालिक कौन हैं? वे क्यों इतने क्रूर हैं कि उन्होंने गायों को सड़क पर छोड़ दिया। ये गायें कई स्थानों पर सड़क की पूरी चौड़ाई को घेरकर बैठी या खड़ी थीं। ऐसी स्थिति में वाहन चालकों अत्यधिक सावधानी से चलना पड़ता है। रात्रि में  तो वाहन चालकों को और अधिक सतर्कता बरतनी पड़ती है। यह स्थिति तब है जब हम गायों को गौमाता कहते हैं, हम गायों की अच्छी से अच्छी देखभाल करने का दावा करते हैं।

मेरा अनुरोध है कि हाईवे पर इतनी बड़ी संख्या में गायों के आ जाने के क्या कारण हैं और इसके लिए कौन लोग जिम्मेदार हैं इसकी सूक्ष्म जांच की जाए।

हम जब इसी मार्ग से वापस लौट रहे थे तब तेज वर्षा हो रही थी। वर्षा में भीगने के कारण ये गायें खासकर छोटे बछड़े ठंड से कांप रहे थे। ऐसी स्थिति में गायों और उनके बछड़ों को देखकर हम लोगों के दिल भी पसीज गए।

मेरा अनुमान है कि ऐसी ही स्थिति अन्य मार्गों और स्थानों की भी होगी। मेरा अनुरोध है कि इस बात की जांच करवाएं कि हम गायों के साथ इतनी क्रूरता क्यों कर रहे हैं।

आशा है इस संबंध में जरूरी एवं उचित कदम उठाए जाएंगे।  यदि संभव हो तो मुझे अवगत भी करवाएंगे।

  सधन्यवाद

एल एस हरदेनिया