Tuesday, April 21, 2020

राज्यपाल श्री टंडन ने पाँच मंत्रियों को दिलाई शपथ

21st April 2020 at 13:05 IST
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान भी इस अवसर पर उपस्थित रहे 
राज्यपाल श्री लालजी टंडन ने आज यहां राजभवन में सादे समारोह में कुमारी मीना सिंह को कैबिनेट मंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई
भोपाल: मंगलवार 21 अप्रैल 2020: (मध्य प्रदेश स्क्रीन ब्यूरो)::
राज्यपाल श्री लालजी टंडन ने आज राजभवन में राज्य मंत्री-मण्डल के पाँच मंत्रियों डॉ. नरोत्तम मिश्रा, श्री तुलसी सिलावट, श्री कमल पटेल, श्री गोविंद सिंह राजपूत और सुश्री मीना सिंह को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुश्री उमा भारती, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष श्री बी.डी.शर्मा, विधायकगण, अन्य जन-प्रतिनिधि और पुलिस महानिदेशक श्री विवेक जौहरी उपस्थित थे।
शपथ ग्रहण समारोह राजभवन के सांदीपनि सभागार में गरिमापूर्वक आयोजित किया गया। मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस ने शपथ ग्रहण समारोह की कार्यवाही का संचालन किया।
राज्यपाल श्री लालजी टंडन ने आज यहां राजभवन में सादे समारोह में कुमारी मीना सिंह को कैबिनेट मंत्री के रूप में पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। (21/अप्रैल/2020)

Thursday, March 26, 2020

मुख्यमंत्री श्री चौहान को सहायता कोष के लिये एक करोड़ रूपये

Friday:26th 2020 at 20:28 IST
एक करोड़ रूपये भेंट किये वर्धमान टेक्सटाइल्स ने
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को वर्धमान टेक्सटाईल्स लिमिटेड के मध्यप्रदेश के डायरेक्टर श्री यशपाल ने कोरोना से बचाव कार्यों के लिए मुख्यमंत्री  सहायता कोष में सहयोग स्वरूप एक करोड़ रूपये का चैक भेंट किया 
भोपाल: गुरूवार 26 मार्च 2020: (मध्यप्रदेश स्क्रीन ब्यूरो):: 
कोरोना का कहर टूटा तो आम जनता में करुणा का सागर भी उमड़ पड़ा। मध्यप्रदेश के लिए इस राज्य के सामर्थ्यवान लोगों ने भी अपने खज़ाने खोल दिए। इसी संबंध में एक जानीमानी कम्पनी वर्धमान टैक्सटाइल्स ने मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए एक करोड़ रूपये भेंट किये। आशा है कि अन्य लोग भी इस मकसद के लिए शीघ्रता से आगे आएंगे। 
मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को  कोरोना से बचाव कार्यों के लिए वर्धमान टेक्सटाइल्स, बुदनी के डायरेक्टर श्री यशपाल  ने मुख्यमंत्री सहायता कोष में जनसहयोग स्वरूप एक करोड़ रुपए का चैक भेंट किया। उल्लेखनीय है कि एचईजी लिमिटेड द्वारा हाल ही में मुख्यमंत्री सहायता कोष में एक करोड़ रूपये की राशि दी जा चुकी है। आयटीएम यूनिवर्सिटी, ग्वालियर द्वारा मुख्यमंत्री सहायता कोष में 11 लाख रूपये का योगदान दिया गया है।
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने अन्य संस्थाओं, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और समर्थ वर्ग से अपील की है कि वे इस आपदा से बचाव के प्रयासों में अपना आर्थिक सहयोग मुख्यमंत्री सहायता कोष में प्रदान करें। सीएम रिलीफ फंड के भारतीय स्टेट बैंक के खाता क्रमांक 10078152483 (IFSC कोड SBIN0001056) में राशि दी जा सकती है।

Monday, May 7, 2018

राज्यपाल श्रीमती आनन्दीबेन पटेल आज ओंकारेश्वर में

ज्योर्तिलिंग के दर्शन किये और पूजा-अर्चना की
भोपाल: सोमवार, मई 7, 2018, 17:58 IST (मध्य प्रदेश स्क्रीन ब्यूरो):: 

विदेशी संस्कृति के तेज़ होते हमलों के बावजूद स्वदेशी नेताओं ने अपनी संस्कृति और धर्म को नहीं छोड़ा। आज भी श्रद्धा का सिलसिला जारी है। राज्यपाल श्रीमती आनन्दीबेन पटेल ने आज उसी श्रद्धा भावना से ओंकारेश्वर में ज्योर्तिलिंग के दर्शन किये और पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर श्रीमती पटेल ने मंदिर में किये गये विकास कार्यों का अवलोकन भी किया।

श्रीमती पटेल को मंदिर समिति द्धारा स्मृति-चिन्ह भी भेंट किया गया। पूजा अर्चना के इस शुभ अवसर पर राज्यपाल ने सैलानी टापू भ्रमण भी किया। श्रीमती पटेल की इस धार्मिक यात्रा से यह अवसर एक और यादगारी दिन बन गया। 

Thursday, May 3, 2018

कृषि से आमदनी बढ़ाने को किसानों ने अपनाई आधुनिक तकनीक

लगातार 5 वर्षो से उन्हें मुनाफा ही मिल रहा है
भोपाल: गुरूवार, मई 3, 2018, 16:32 IST
प्रदेश में किसान अब अपनी आय बढ़ाने के लिये कृषि विशेषज्ञों की मदद से नई-नई तकनीक अपना रहे हैं। इससे किसानों के जीवन-स्तर में काफी बदलाव आया है।
पन्ना जिले के ग्राम अहिरगुवा के किसान अग्निमित्र शुक्ला के पास तीन हेक्टेयर सिंचित रकबा हैं। इस वर्ष  अग्निमित्र को दो एकड़ में चने का लगभग दो गुना उत्पादन मिला है। उन्होंने बताया कि पूर्व वर्षों की तुलना में 18 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के स्थान पर 34 क्विंटल प्रति हेक्टेयर चने का उत्पादन प्राप्त हुआ है। किसान अग्निमित्र बताते हैं कि वे पिछले 7-8 वर्षों से चने की खेती कर रहे हैं। उन्होंने अपने खेत में विभिन्न किस्मों के चने की बोनी की। इन सबके बावजूद उन्हें कभी भी 18 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर से अधिक चने का उत्पादन प्राप्त नहीं हुआ। इस संबंध में उन्होंने वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी से चर्चा की।  कृषि विभाग की चना क्‍लस्टर प्रदर्शन योजना के अंतर्गत अग्निमित्र को चने का जे.जी.-63 प्रजाति का 60 किलो बीज दिया गया। उन्होंने इस बीज को दो एकड़ में बोया, कृषि अधिकारियों की सलाह पर खेत में मृदा स्वास्थ्य कार्ड की अनुशंसा पर उर्वरक भी डाला। इससे बीज का अंकुरण और पौधों की बढ़त भी अच्छी हुई। कृषि की इस तकनीक को अपनाने से इन्हें 34 क्विंटल प्रति हेक्टेयर चने का उत्पादन प्राप्त हुआ है। आज वे इस तकनीक को अपने किसान साथियों को बताते हैं तो वे आश्चर्यचकित रह जाते हैं। अब क्षेत्र के अन्य किसानों ने भी चने की जे.जी.-63 प्रजाति को अपनाने का मन बना लिया है।
खरगोन जिले की कसरावद तहसील के किसान महेंद्र पाटीदार ने उद्यानिकी विभाग के सहयोग से नींबू का बगीचा तो लगा लिया, लेकिन पानी की समस्या ने उनकी चिंता बढ़ा दी थी। ऐसे समय में नव-विवाहित महेंद्र ने अपनी पत्नि को साथ लेकर, बैलगाड़ी पर कोठी बाँधकर एक-एक पौधे को कढ़ी धूप में पानी देकर सिंचाई की पाँच वर्षो के बाद नींबू को पहली फसल आई। पहली फसल से कोई खास मुनाफा तो नहीं हुआ, मगर अंतरवर्ती फसलों कपास, गेहूँ और सोयाबीन के सहारे उनको मुनाफा होता रहा। इसके लगातार बाद 5 वर्षो से उन्हें मुनाफा ही मिल रहा है। अब अग्निमित्र क्षेत्र के प्रतिशील किसान की श्रेणी में भी शामिल हो गये है।
उद्यानिकी विभाग से किसान महेंद्र को एक हेक्टेयर में मल्चिंग शीट के लिए 10 हजार रुपए की सब्सिडी भी मिली। इसके बाद महेंद्र ने मल्चिंग विधि से तरबूज की खेती की और एक लाख 29 हजार 600 रुपए खर्च कर 5 लाख 70 हजार 567 रुपए का शुद्ध मुनाफा लिया। महेंद्र ने मात्र 80 दिनों की तरबूज की फसल में 75 हजार 960 किलोग्राम तरबूज की फसल ली। कृषि और उद्यानिकी विभाग के जानकार बताते हैं कि निमाड़ में मल्चिंग विधि से तरबूज की फसल सफलतापूर्वक लेने वाले महेंद्र पहले किसान हैं। अब महेंद्र कृषि की नई-नई तकनीकों को अपनाकर अलग-अलग प्रयोग करने में जुट गए हैं।
सक्सेस स्टोरी (पन्ना, खरगोन)
मुकेश मोदी

Saturday, February 10, 2018

पहन लो जैकेट अगर बिजली नहीं तो क्या हुआ

MP में शिक्षकों के लिए विशेष ड्रेस कोड की जैकेट 
भोपाल: 10 फरवरी 2018: (मध्य प्रदेश स्क्रीन ब्यूरो//इंट.)::
"डिजिटल इंडिया" और "विकास" के इस युग में प्राथमिकताएं बदल रही हैं। कभी जनाब दुष्यंत कुमार साहिब ने कहा था:
भूख है तो सब्र कर रोटी नहीं तो क्या हुआ; 
आजकल दिल्ली में है ज़ेर-ए-बहस ये मुदद्आ। 
अब जबकि प्रदेश में बहुत सी बातें विकास करने वालों का ध्यान मांग रही हैं उस समय कुछ नए ऐलान सामने आ रहे हैं। 
एक ऐलान सुनने में आया है कि मध्य प्रदेश के शिक्षकों को अब नया ड्रेस कोड मिलने वाला है। शिक्षकों को "नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी"(निफ्ट) की तरफ से डिजाइन की गई जैकेट दी जाएंगी।  उनकी शख्सियत में निखार आएगा और वे सचमुच राष्ट्र निर्माता दिखने लगेंगे। आम जनता के मुद्दों से जुड़ कर काम कर रहे एक जानेमाने टीवी चैनल एनडीटीवी की खबर के मुताबिक मध्य प्रदेश के शिक्षा मंत्री विजय शाह ने कहा कि यह फैसला इसलिए लिया गया है ताकि शिक्षकों को महसूस हो कि वे एक महान कार्य कर रहे हैं और उनकी पहचान सरकारी शिक्षक के तौर पर हो सके। इस फैसले मुताबिक राज्य में करीब ढाई लाख सरकारी शिक्षकों को जल्द ही ये जैकेट मुहैया कराई जाएंगी। राज्य के शिक्षा मंत्रालय की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि सभी शिक्षकों को निफ्ट की तरफ से डिजाइन की गई जैकेट पहननी होंगी, जैकेट पर राष्ट्र निर्माता नाम की नेमप्लेट भी लगी होगी। 
गौररतलब है कि यह सरकारी आदेश ऐसे समय आया है जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार ने पिछले वर्ष यह स्वीकार किया था कि राज्य में एक लाख से ज्यादा स्कूलों में बिजली नहीं है, 17 हजार से ज्यादा स्कूल में केवल एक-एक शिक्षक पर निर्भर हैं और करीब 50 हजार से ज्यादा शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं।
इसी बीच कांग्रेस पार्टी ने इसकी आलोचना की है और कहा है की वास्तविक मुद्दों पर दशा देने की बजाये ड्रेस कोड जैसे मुद्दे प्राथमिक बना कर एक ख़ास विचारधारा को लागू करने का छुपा एजेंडा है यह योजना। गौरतलब है कि यह प्रयास काफी देर से जारी है।  डाक बाबुओं के लिए भी विशेष ड्रेस बनाने की बात चली थी। 
अब लगे हाथ दुष्यंत कुमार साहिब की ग़ज़ल के कुछ और शेयर भी पढ़ लीजिये। 
भूख है तो सब्र कर रोटी नहीं तो क्या हुआ 
आजकल दिल्ली में है ज़ेर-ए-बहस ये मुदद्आ ।
मौत ने तो धर दबोचा एक चीते कि तरह 
ज़िंदगी ने जब छुआ तो फ़ासला रखकर छुआ । 
गिड़गिड़ाने का यहां कोई असर होता नही 
पेट भरकर गालियां दो, आह भरकर बददुआ । 
क्या वज़ह है प्यास ज्यादा तेज़ लगती है यहाँ 
लोग कहते हैं कि पहले इस जगह पर था कुँआ । 
आप दस्ताने पहनकर छू रहे हैं आग को 
आप के भी ख़ून का रंग हो गया है साँवला । 
इस अंगीठी तक गली से कुछ हवा आने तो दो 
जब तलक खिलते नहीं ये कोयले देंगे धुँआ । 
दोस्त, अपने मुल्क की किस्मत पे रंजीदा न हो 
उनके हाथों में है पिंजरा, उनके पिंजरे में सुआ । 
इस शहर मे हो कोई बारात हो या वारदात 
अब किसी भी बात पर खुलती नहीं हैं खिड़कियाँ ।

Friday, April 15, 2016

‘ग्राम उदय से भारत उदय’ अभियान का शुभारंभ

14-अप्रैल-2016 21:10 IST
प्रधानमंत्री ने महू में दी बाबा साहिब को श्रद्धांजलि 
डॉ. बी.आर. अम्बेदकर की 125वीं जयंती पर उनकी  जन्मस्थली पर हुआ विशेष आयोजन
The Prime Minister, Shri Narendra Modi addressing the Public Meeting, at the launching ceremony of the “Gram Uday se Bharat Uday” Abhiyan, in Mhow, Madhya Pradesh on April 14, 2016. The Union Minister for Social Justice and Empowerment, Shri Thaawar Chand Gehlot, the Chief Minister of Madhya Pradesh, Shri Shivraj Singh Chouhan and other dignitaries are also seen.   (PIB)
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज भारतीय संविधान के निर्माता बाबा साहेब अम्बेडकर  की 125वीं जयंती पर महू में उनकी जन्मस्थली पर उन्‍हें पुष्‍पांजलि अर्पित की।

प्रधानमंत्री ने इसके बाद महू में आयोजित एक सार्वजनिक सभा में ‘ग्राम उदय से भारत उदय अभियान’ का शुभारंभ किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उनका सौभाग्य  है कि वह इस शुभ दिवस पर महू में हैं। उन्होंने इस अवसर पर यह स्मरण किया कि डॉ. अम्बेडकर ने समाज में अन्याय के खिलाफ लड़़ाई लड़ी थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्‍होंने समानता और सम्मान के लिए लड़ाई लड़ी थी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 14 अप्रैल से लेकर 24 अप्रैल, 2016 तक चलने वाले ग्राम उदय से भारत उदय अभियान’ के तहत गांवों में होने वाले विकास कार्यों पर ध्‍यान केंद्रित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस साल का केंद्रीय बजट किसानों और गांवों को समर्पित है। उन्होंने  कहा कि विकास की पहलों को ग्रामीण विकास पर केंद्रित होना चाहिए।

केंद्र सरकार द्वारा की गई कुछ महत्‍वपूर्ण विकास पहलों का उल्‍लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 1000 दिनों की समय सीमा के भीतर उन 18000 गांवों का विद्युतीकरण किया जा रहा है, जो बिजली की सुविधा से वंचित हैं। उन्‍होंने कहा कि ‘गर्व’ एप के जरिये लोग इस लक्ष्‍य की प्राप्ति में हो रही प्रगति का अवलोकन कर सकते हैं। उन्‍होंने कहा कि गांवों में डिजिटल कनेक्टिविटी आवश्‍यक है।

प्रधानमंत्री ने किसानों की आय दोगुनी करने के उद्देश्‍य का उल्‍लेख किया और कहा कि ग्रामीणों की क्रय क्षमता को निश्चित तौर पर बढ़ाना है, क्‍योंकि इससे भारत की अर्थव्‍यवस्‍था को नई गति मिलेगी। उन्‍होंने कहा कि पंचायती राज से जुड़े संस्‍थानों को और ज्‍यादा मजबूत एवं और ज्‍यादा जीवंत बनाया जाना चाहिए। (PIB)
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Wednesday, January 15, 2014

INDIA: मध्यप्रदेश में लगातार जारी है बाल लिंगानुपात का घटना

Wed, Jan 15, 2014 at 12:48 PM
An Article by the Asian Human Rights Commission                          -उपासना बेहार
Courtesy Photo
भारत में महिलाओं का घटता लिंग अनुपात एक विकराल समस्या के तौर पर उभर के सामने आ रहा है। ताजा आंकड़ों (2011 जनगणना) के अनुसार देश में छह वर्ष तक की उम्र के बच्चों के लिंगानुपात में सबसे ज्यादा गिरावट देखने में आयी है जो कि सरकार और समाज दोनों के लिए ही शर्मनाक और चिंता की बात है।
1961 से लेकर 2011 तक की जनगणना पर नजर डालें तो यह बात साफ तौर पर उभर कर सामने आती है कि देश में बच्चों के लिंगानुपात (0 से 6 वर्ष) में 1961 से लगातार गिरावट जारी है। पिछली जनगणना (वर्ष 2001) में छह वर्ष तक की उम्र के बच्चों में प्रति एक हजार लड़कों पर लड़कियों की संख्या 927 थी तो वहीँ 2011 की जनगणना के अनुसार बच्चों का लिंगानुपात गिर कर 914 हो गया है. ध्यान देने वाली बात है कि यह अब तक की सारी जनगणनाओं में बच्चों के लिंगानुपात का सबसे निम्नतम स्तर है, जो कि आजादी के बाद सबसे कम हैं।
अगर हम मध्यप्रदेश की बात करें तो प्रदेश में भी बच्चों का लिंगानुपात साल दर साल घटता ही जा रहा है। प्रदेश के जनगणना कार्य निदेशालय द्वारा जनसंख्या 2011के जारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 2001 से 2011 के दौरान शिशु लिंगानुपात में 14 अंकों की गिरावट आई है। यानी शून्य से छह साल तक के 1000 लड़कों के मुकाबले सिर्फ 918 लड़कियां रह गई हैं ( (हालांकि जनगणना 2011 के प्रारंभिक रिर्पोट में यह अनुपात 912 दर्शाया गया था जो कि राष्ट्रीय औसत से भी कम था)। यह1981 से लेकर अब तक का सबसे निम्नतर लिंगानुपात है, 2001 की जनगणना में यह अनुपात 932 का था।
म.प्र. के ग्वालियर और चंबल डिविजन में बाल लिगांनुपात की स्थिति सबसे खराब है, यहाँ के 9 जिलों में से 7 जिलों में बाल लिगांनुपात 900 से कम है। म.प्र का यह इलाका कन्या भ्रुण हत्या और कन्या शिशु हत्या का केन्द्र भी रहा है।
राष्ट्रीय अपराध अभिलेख ब्यूरो 2012 के अनुसार म.प्र. भ्रूण हत्या (30 प्रतिशत) और शिशु हत्या (20 प्रतिशत) के मामले में देश में पहले स्थान पर है। मध्यप्रदेश देश का ऐसा राज्य है जहां सर्वाधिक कन्या भ्रूण हत्या के मामले दर्ज होते हैं। प्रदेश में बेटियों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से लोकसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक मध्यप्रदेश कन्या भ्रूण हत्या में शीर्ष पर है।
यह स्थिति तब है जबकि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा महिलाओं और बालिकाओं के कल्याण को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल का दावा करती है और इसके लिए बेटी बचाओं अभियान, लाड़ली लक्ष्मी योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, इत्यादी योजनाओं के सफलतापूर्वक चलाने का हवाला दिया जाता है।
जनगणना 2011 के बच्चों के लिंगानुपात के आकंड़े बताते हैं कि घटते लिंगानुपात को कम करने के लिए बीते सालों से जो नीतियों अपनाई जा रही उसका असर होता नही दिख रहा है। कन्या भ्रुण हत्या को रोकने के लिए वैसे तो पी.सी.पी.एन.डी.टी. एक्ट है, लेकिन इसका कड़ाई से पालन नही किया जा रहा है। सरकार की लाख दावों के बावजूद समाज में कन्या भ्रुण हत्या की घटनाएं कम होने के बदले बढ़ ही रही हैं।
दूसरी तरफ इस बात को भी रेखांकित किये जाने की जरूरत है कि साल दर साल इस गिरते लिंगानुपात की समस्या हमारे समाज में मौजुद पितृसत्तात्मक सोच की देन है। हमारे समाज में आज भी ऐसी सामाजिक परंपरा और मान्यताएं मौजुद हैं जो महिलाओं के खिलाफ हैं और घटता लिंगानुपात इसी का प्रतिबिम्ब है।
कहने को तो हम 21 सदी में कदम रख चुके हैं, भारत मंगल पर जीवन की खोज के लिए अभियान चला रहा है लेकिन दुर्भाग्यवश हमारा समाज आज भी रूढि़वादी सोच की कैद में है। लोग आज भी संकीर्ण मानसिकता और समाज में कायम अंधविश्वासों, दकियानुसी रीति-रिवाजों और पुराने सामाजिक व्यवस्था को मान कर बेटा और बेटी में भेद कर रहे हैं। आज भी कन्या के जन्म पर पूरे परिवार में मायूसी और शोक छा जाती और समाज लड़की की तुलना में लड़के को ही ज्यादा महत्व देता है। चूंकि हमारे समाज में ज्यादातर मां-बाप बेटे को अपने बुढ़ापे की लाठी मानते है और वंश परंपरा को आगे बढ़ाने में लड़के की ही भूमिका सर्वमान्य है इसी सोच के चलते हर साल लाखों बच्चियाँ जन्म लेने से पहले ही मार दी जाती हैं और यह सिलसिला थमने के बजाये बढ़ता ही जा रहा है।
इसके अलावा कन्याओं के कम होने का एक ओर कारण, जन्म के बाद से बच्चियों की ठीक तरीके से देखभाल ना होने के चलते उनकी मृत्यु दर का अधिक होना भी है लेकिन अगर जैविक रुप से देखें तो लड़कियों में जीने की क्षमता ज्यादा होती है। एस.आर.एस. बुलेटीन सितंबर 2013 के अनुसार प्रदेश में शिशु मृत्यु दर 56 है। जो कि देश में सबसे ज्यादा है। वही यह दर लड़कों में 54 तथा लड़कियों में 59 है। यानी शिशु मृत्यु में बालिका शिशु की मृत्यु दर बालक शिशु मृत्यु दर से ज्यादा है।
घटता लिंगानुपात एक सामाजिक समस्या है इस लिए इसे रोकने के लिए कानूनी प्रावधानों के साथ साथ समाज की तरफ से भी गंभीर प्रयास किये जाने की जरुरत है और इसके लिए समाज के पितृसत्तात्मक सोच में बदलाव लाना होगा। सरकारों को भी योजनाऐं चलाने के साथ साथ पितृसत्तात्मक सोच पर भी प्रहार करने की आवशकता है।
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About the AuthorMs. Upasana behar is associated with Urban and Rural Growth Academy Bhopal. She can be contacted at upasana2006@gmail.com.
About AHRC: The Asian Human Rights Commission is a regional non-governmental organisation that monitors human rights in Asia, documents violations and advocates for justice and institutional reform to ensure the protection and promotion of these rights. The Hong Kong-based group was founded in 1984.